क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि जब आप नमाज़ के लिए खड़े होते हैं, तो आपका दिमाग कहीं और चला जाता है? आप सोच रहे होते हैं कि दुकान पर क्या काम बचा है या फिर आज रात के खाने में क्या बनाना है। यह एक बहुत ही आम बात है जो बहुत से लोगों के साथ होती है। नमाज़ में ध्यान न लगना एक ऐसी परेशानी है जिससे लगभग हर कोई कभी न कभी गुज़रता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप इसे ठीक नहीं कर सकते हैं। नमाज़ हमारी इबादत का सबसे मुख्य हिस्सा है और इसमें हमारा दिल और दिमाग दोनों का मौजूद होना बहुत ज़रूरी है। आज हम इसी बात पर चर्चा करेंगे कि कैसे आप अपनी नमाज़ को बेहतर बना सकते हैं। हम आपको कुछ ऐसे आसान और व्यावहारिक तरीके बताएंगे जो आपके ध्यान को भटकने से रोकने में मदद करेंगे।
नमाज़ से पहले की तैयारी कैसे करें?
नमाज़ की शुरुआत उस वक्त नहीं होती जब आप हाथ बांधकर खड़े होते हैं। इसकी शुरुआत तो तभी हो जाती है जब आप वुज़ू करने के लिए उठते हैं। वुज़ू को सिर्फ एक रस्म की तरह जल्दी-जल्दी मत कीजिए। जब आप पानी से अपने हाथ, मुंह और पैर धोते हैं, तो यह सोचिए कि आप अपने अंगों के गुनाहों को साफ कर रहे हैं। यह सोच आपके दिमाग को दुनिया की बातों से हटाकर अल्लाह की तरफ लगाने में बहुत मदद करेगी। वुज़ू को शांत मन से और ध्यान से करना नमाज़ के लिए पहली सीढ़ी है।
इसके बाद जब आप मसल्ले या नमाज़ पढ़ने की जगह पर आते हैं, तो तुरंत नमाज़ शुरू न करें। कम से कम एक मिनट के लिए वहां चुपचाप बैठें या खड़े रहें। अपने दिल को यह समझाएं कि आप किसके सामने खड़े होने जा रहे हैं। आप इस पूरी दुनिया के मालिक के सामने बात करने जा रहे हैं। जब आपके दिल में यह बात बैठ जाएगी, तो आपके अंदर अपने आप एक आदर और डर पैदा होगा। यह छोटा सा ठहराव आपके भटकते हुए दिमाग को शांत करने के लिए बहुत ज़रूरी है।
आप हमारे इस्लामिक सीख और जानकारी वाले ब्लॉग पर जाकर इस तरह के और भी लेख पढ़ सकते हैं जो आपकी रोज़ाना की इबादत को आसान बनाते हैं। वहां हमने कई ऐसी बातें बताई हैं जो हर मुसलमान को जाननी चाहिए।
नमाज़ में खुशू क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?
खुशू का सीधा और सरल मतलब होता है ध्यान, नम्रता और दिल का हाज़िर होना। जब आप नमाज़ पढ़ते हैं, तो केवल आपका शरीर ही नहीं बल्कि आपका दिल और दिमाग भी उसी जगह होना चाहिए। अगर आपका शरीर नमाज़ में खड़ा है लेकिन आपका दिमाग बाज़ार में घूम रहा है, तो उसे हम खुशू वाली नमाज़ नहीं कह सकते। नमाज़ में खुशू पैदा करना हर मुसलमान का एक बड़ा सपना होता है। बिना खुशू के पढ़ी गई नमाज़ वैसी ही है जैसे बिना आत्मा के कोई शरीर।
अल्लाह ने कुरान में साफ़ तौर पर फरमाया है कि वे मोमिन कामयाब हो गए जो अपनी नमाज़ में खुशू अख्तियार करते हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि हमारी इबादत की कामयाबी इस बात पर निर्भर करती है कि हम उसे कितने ध्यान से पढ़ते हैं। हम दिन में पांच बार नमाज़ पढ़ते हैं। अगर हम हर बार बिना ध्यान के बस उठते-बैठते रहेंगे, तो हमें वह दिली सुकून कभी नहीं मिलेगा जिसकी हमें तलाश है। सुकून पाने के लिए दिल का अल्लाह के सामने पूरी तरह झुकना बेहद ज़रूरी है।
खुशू कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो आपको रातों-रात मिल जाएगी। इसके लिए आपको रोज़ाना थोड़ी कोशिश करनी होगी। जब भी आपका ध्यान भटके, आपको उसे वापस खींचकर लाना होगा। यह एक तरह की दिमागी कसरत है जिसे आपको हर रोज़ करना होगा।
नमाज़ में ध्यान लगाने के 5 बेहतरीन तरीके
अब हम उन व्यावहारिक और आसान तरीकों के बारे में बात करेंगे जिन्हें आप आज से ही अपनी नमाज़ में लागू कर सकते हैं। ये तरीके बहुत ही सीधे हैं और इनके परिणाम आपको बहुत जल्दी देखने को मिलेंगे।
1. जो आप पढ़ रहे हैं उसका अर्थ समझें
सबसे बड़ा और सबसे असरदार तरीका यह है कि आप नमाज़ में जो कुछ भी पढ़ते हैं, उसका मतलब आपको पता होना चाहिए। सना, सूरह फातिहा, दूसरी सूरह और रुकू व सज्दे की दुआओं का हिंदी या अपनी भाषा में अनुवाद याद करें। जब आप नमाज़ में "अल्हम्दुलिल्लाह" कहें, तो आपके दिल को पता होना चाहिए कि आप अल्लाह का शुक्र अदा कर रहे हैं। जब आप शब्दों का मतलब समझेंगे, तो आपका दिमाग अपने आप उन शब्दों के साथ जुड़ जाएगा। अगर आप बिना सोचे-समझे केवल अरबी शब्द बोलते जाएंगे, तो आपके दिमाग को भटकने का पूरा मौका मिलेगा। इसलिए थोड़ा समय निकालकर नमाज़ के अनुवाद को ज़रूर याद करें।
2. अपनी नज़र को सज्दे की जगह पर टिका कर रखें
नमाज़ के दौरान अपनी आँखों को इधर-उधर न घुमाएं। जब आप खड़े हों, तो आपकी नज़र ठीक उसी जगह होनी चाहिए जहाँ आपका माथा सज्दे में जाता है। जब आप रुकू में हों, तो आपकी नज़र आपके पैरों पर होनी चाहिए। जब आप बैठें, तो आपकी नज़र आपकी गोद पर होनी चाहिए। इधर-उधर देखने से आपके दिमाग को नई चीज़ें दिखती हैं और वह उनके बारे में सोचने लगता है। जब आप अपनी नज़र को एक जगह बांध लेते हैं, तो आपका दिमाग भी शांत हो जाता है। यह एक शारीरिक तरीका है जो आपके मन को वश में करने में बहुत मदद करता है।
3. नमाज़ को बहुत आराम से और धीरे-धीरे पढ़ें
कई बार हम नमाज़ को एक काम की तरह समझते हैं जिसे जल्दी से खत्म करके हमें दूसरे कामों में लगना होता है। यह बहुत बड़ी गलती है। नमाज़ को हमेशा आराम से और रुक-रुक कर पढ़ें। सूरह फातिहा की हर एक आयत को पढ़ने के बाद थोड़ा रुकें। हमारे प्यारे नबी भी इसी तरह रुक-रुक कर पढ़ते थे। रुकू और सज्दे में भी जल्दबाज़ी न करें। जब आप सज्दे में जाएं, तो कम से कम कुछ सेकंड के लिए वहां रुकें और अल्लाह की बड़ाई को महसूस करें। जल्दबाज़ी करने से नमाज़ का सारा आनंद और सुकून खत्म हो जाता है। शांत होकर पढ़ने से आपका ध्यान अपने आप लगने लगेगा।
4. यह सोचें कि यह आपकी आखिरी नमाज़ हो सकती है
यह एक बहुत ही शक्तिशाली विचार है जो हमारे नबी ने हमें सिखाया है। जब भी आप नमाज़ के लिए खड़े हों, तो अपने मन में यह बात लाएं कि शायद इसके बाद आपको कोई दूसरी नमाज़ पढ़ने का मौका न मिले। मौत का कोई समय तय नहीं है और वह कभी भी आ सकती है। अगर आपको पता हो कि यह आपकी ज़िंदगी की आखिरी नमाज़ है, तो क्या आप इसमें कोई कमी छोड़ेंगे? क्या आपका ध्यान किसी और चीज़ पर जाएगा? बिल्कुल नहीं। आप अपना सब कुछ उस नमाज़ को बेहतरीन बनाने में लगा देंगे। इस विचार को मन में रखने से नमाज़ का स्तर पूरी तरह बदल जाता है।
5. हर नमाज़ में अलग-अलग सूरह पढ़ें
अक्सर हम रोज़ाना की नमाज़ों में वही दो-तीन छोटी सूरह पढ़ते हैं जो हमें सबसे पहले याद हुई थीं। ऐसा करने से हमारा दिमाग उनका आदी हो जाता है। हमारी जुबान अपने आप उन सूरह को बोलती जाती है और हमारा दिमाग कहीं और सोच रहा होता है। इसका सबसे अच्छा उपाय यह है कि आप कुछ नई छोटी सूरह याद करें और उन्हें बदल-बदल कर पढ़ें। जब आप कोई नई सूरह पढ़ते हैं, तो आपका दिमाग पूरी तरह सक्रिय रहता है क्योंकि उसे याद रखना होता है कि आगे क्या पढ़ना है। इससे आपका ध्यान भटकने का रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है। नए सूरह सीखने के लिए आप हमारी गाइड जो रोज़ाना की दुआओं पर है को देख सकते हैं, जहाँ हमने आसान तरीके बताए हैं।
नमाज़ में बुरे विचार या वसवसे क्यों आते हैं?
बहुत से लोग इस बात से बहुत परेशान रहते हैं कि जैसे ही वे अल्लाह के सामने खड़े होते हैं, उनके दिमाग में फालतू और बुरे विचार आने लगते हैं। कई लोग तो इतने निराश हो जाते हैं कि वे नमाज़ पढ़ना ही छोड़ देते हैं। आपको यह समझना होगा कि यह शैतान की एक चाल है। शैतान कभी नहीं चाहता कि आप अल्लाह के करीब जाएं या आपको नमाज़ का सुकून मिले। इसलिए वह जानबूझकर आपके दिमाग में पुरानी बातें, काम और परेशानियां डालने लगता है।
अगर नमाज़ के दौरान आपके दिमाग में कोई विचार आता है, तो उससे घबराएं नहीं। उस विचार से लड़ने की कोशिश न करें, बल्कि बहुत ही शांति से अपना ध्यान वापस अपनी नमाज़ पर ले आएं। जब आप बार-बार अपना ध्यान वापस लाते हैं, तो अल्लाह आपकी इस कोशिश को देखता है और इस पर भी आपको इनाम देता है। नमाज़ छोड़ना शैतान की सबसे बड़ी जीत होगी, इसलिए कोशिश करते रहें और कभी भी हार न मानें।
नमाज़ की पाबंदी करने के कुछ आसान नियम
नमाज़ में ध्यान तभी लग सकता है जब आप नियमित रूप से नमाज़ पढ़ने की आदत डालेंगे। अगर आप हफ्ते में एक-दो बार ही नमाज़ पढ़ेंगे, तो ध्यान लगाना बहुत मुश्किल होगा। रोज़ाना नमाज़ पढ़ने के लिए अपने मोबाइल में अज़ान का अलार्म लगाएं। जैसे ही अज़ान की आवाज़ सुनाई दे, अपने सारे कामों को वहीं रोक दें। चाहे आप कितने भी व्यस्त क्यों न हों, केवल दस मिनट के लिए दुनिया से अपना नाता तोड़ लें।
ये दस मिनट आपके पूरे दिन को बेहतर बना देंगे। अपने घर में नमाज़ पढ़ने के लिए एक शांत जगह तय करें जहाँ लोगों का आना-जाना कम हो। घर के सदस्यों को भी बता दें कि यह आपका नमाज़ का समय है ताकि वे आपको परेशान न करें। जब आप रोज़ाना एक ही जगह और समय पर नमाज़ पढ़ेंगे, तो आपका शरीर और दिमाग अपने आप उस समय शांत होने के लिए तैयार हो जाएगा।
नमाज़ के बाद तुरंत न उठें, थोड़ा समय दें
नमाज़ पूरी होने के बाद तुरंत खड़े होकर भागने की आदत को बदलें। जब आप दोनों तरफ सलाम फेर लें, तो कम से कम दो से तीन मिनट के लिए उसी जगह बैठे रहें। तीन बार अस्तगफिरुल्लाह कहें और अल्लाह से अपने दिल की बातें करें। यह वह समय होता है जब अल्लाह की रहमत बरस रही होती है और आपकी दुआएं कुबूल होने के सबसे ज़्यादा मौके होते हैं।
इस छोटे से समय में आपको जो शांति मिलेगी, वह आपके दिल को बहुत हल्का कर देगी। यह शांति आपको अगली नमाज़ के लिए फिर से तैयार करेगी। अपने जीवन की मुश्किलों को अल्लाह के सामने रखें और उनसे मदद मांगें। जब आप इस तरह से नमाज़ का समापन करेंगे, तो आपको महसूस होगा कि नमाज़ केवल एक शारीरिक क्रिया नहीं है, बल्कि अल्लाह से बातचीत करने का एक जीवंत माध्यम है।
नमाज़ में ध्यान लगाना कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो एक दिन में ठीक हो जाएगी। यह एक सतत प्रक्रिया है जिसमें आपको हर दिन थोड़ी मेहनत करनी होगी। आज हमने जो तरीके बताए हैं, उनमें से किसी एक तरीके को चुनकर आज से ही शुरू करें। जैसे-जैसे आप कोशिश करेंगे, वैसे-वैसे आपकी नमाज़ में सुधार होता जाएगा। क्या आपने कभी इनमें से किसी तरीके को आजमाया है? अपनी नमाज़ को बेहतर बनाने के लिए हमेशा प्रयासरत रहें और अल्लाह से मदद मांगते रहें।
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