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Eid ul Adha ki Namaz Padhne Ka Sahi Tarika Step by Step

ईद उल अजहा का त्योहार हर मुसलमान के लिए बहुत खुशी का मौका होता है। इस दिन हम अल्लाह की राह में कुर्बानी देते हैं और उसकी रजा हासिल करने की कोशिश करते हैं। लेकिन इस मुबारक दिन की शुरुआत ईद की खास नमाज़ से होती है। बहुत से लोग साल में सिर्फ दो बार ही ईद की नमाज़ पढ़ते हैं। इस वजह से वे अक्सर अतिरिक्त तकबीरों का तरीका भूल जाते हैं। क्या आपके साथ भी ऐसा होता है? घबराने की कोई बात नहीं है। आज हम इस लेख में Eid ul adha ki Namaz padhne ka sahi tarika step by step बहुत ही आसान भाषा में सीखेंगे। इस गाइड को पढ़ने के बाद आप बिना किसी हिचकिचाहट के नमाज़ पढ़ सकेंगे।

Eid ul Adha ki Namaz Padhne Ka Sahi Tarika Step by Step

ईद की नमाज़ से पहले की तैयारी और सुन्नतें

ईद के दिन सुबह जल्दी उठना एक बहुत अच्छी आदत है। सुबह उठकर सबसे पहले मिसवाक करें और अच्छी तरह से गुसल करें। गुसल करने से बदन साफ होता है और मन में ताजगी आती है। इसके बाद अपने सबसे अच्छे या नए साफ कपड़े पहनें। ईद की नमाज़ के लिए जाने से पहले खुशबू लगाना भी सुन्नत है।

ईद उल अजहा की नमाज़ से पहले कुछ भी न खाना सुन्नत तरीका है। आप नमाज़ पढ़ने के बाद ही अपनी कुर्बानी के गोश्त से कुछ खाएं। नमाज़ के लिए जाते समय और वापस आते समय रास्ते में तकबीर पढ़ना बहुत जरूरी है। तकबीर के बोल हैं: "अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाह, वल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, वलिल्लाहिल हम्द।"

ईदगाह जाते समय एक रास्ते से जाएं और वापस दूसरे रास्ते से आएं। ऐसा करने से रास्ते में मिलने वाले ज्यादा लोगों से मुलाकात होती है। यह भाईचारे को बढ़ावा देता है। ईद की नमाज़ हमेशा जमात के साथ पढ़ी जाती है। इसे अकेले घर पर नहीं पढ़ा जा सकता। इसलिए समय पर ईदगाह या मस्जिद पहुंचना बहुत जरूरी है।

ईद की सुबह का नजारा बहुत ही खूबसूरत होता है। हर तरफ खुशी और उल्लास का माहौल रहता है। लोग सुबह सवेरे उठकर फज्र की नमाज़ अदा करते हैं। इसके बाद वे ईद की नमाज़ की तैयारी में लग जाते हैं। बच्चों में इस दिन को लेकर एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। वे नए कपड़े पहनकर अपने बड़ों के साथ ईदगाह जाने के लिए तैयार होते हैं। नमाज़ के लिए जाने से पहले अपने दांतों को साफ करना और नए वस्त्र पहनना बहुत ही उत्तम माना गया है। यदि आपके पास नए कपड़े न हों तो आपके पास मौजूद सबसे साफ कपड़े पहनें। इससे मन में पवित्रता का भाव जागृत होता है।

ईद उल अजहा की नमाज़ की नीयत कैसे करें?

किसी भी इबादत को शुरू करने से पहले नीयत करना सबसे जरूरी कदम है। नीयत का मतलब असल में दिल का इरादा होता है। अगर आप अपने दिल में जानते हैं कि आप ईद की नमाज़ पढ़ रहे हैं तो वह काफी है। लेकिन ज़बान से भी नीयत के शब्द कहना दिल को तसल्ली देता है।

ईद उल अजहा की नमाज़ की नीयत इस तरह की जाती है। "मैं नीयत करता हूँ दो रकात नमाज़ वाजिब ईद उल अजहा की, छह अतिरिक्त तकबीरों के साथ, वास्ते अल्लाह ताला के, पीछे इस इमाम के, रुख मेरा काबा शरीफ की तरफ।"

जब आप इस तरह नीयत कर लें तो इमाम साहब के तकबीर कहने का इंतज़ार करें। जैसे ही इमाम साहब "अल्लाहु अकबर" कहें, अपने दोनों हाथ कानों तक उठाएं। इसके बाद अपने हाथों को नाफ के नीचे बांध लें। अब चुपचाप खड़े होकर सना पढ़ें। सना के शब्द हैं: "सुब्हानका अल्लाहुम्मा व बिहम्दिका व तबारकस्मुका व तआला जद्दुका व ला इलाहा गैरुक।"

नीयत के विषय में एक बात समझना बहुत आवश्यक है। नीयत कोई कठिन मंत्र नहीं है जिसे रटना पड़े। यह केवल आपके मन का एक संकल्प है। यदि आप केवल मन में यह सोच लेते हैं कि आप अल्लाह की इबादत के लिए ईद की नमाज़ पढ़ रहे हैं तो आपकी नीयत पूरी हो जाती है। लेकिन हमारे बुजुर्गों ने कुछ शब्द निर्धारित किए हैं ताकि हमारा ध्यान न भटके। जब आप सफ में खड़े होते हैं तो अपने पैरों के बीच उचित दूरी रखें। कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होना जमात की नमाज़ की मुख्य विशेषता है। इससे दिलों की दूरियां भी कम होती हैं। जब तक इमाम साहब नमाज़ शुरू न करें तब तक आप शांत रहें और मन में अल्लाह का ध्यान करें।

पहली रकात और तीन अतिरिक्त तकबीरें

सना पूरी करने के बाद सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शुरू होता है। यही वह जगह है जहाँ लोग अक्सर गलती करते हैं। यहाँ इमाम साहब तीन अतिरिक्त तकबीरें कहेंगे। आपको हर तकबीर पर इमाम साहब का पूरी तरह अनुसरण करना है।

पहली अतिरिक्त तकबीर में इमाम साहब "अल्लाहु अकबर" कहेंगे। आपको अपने दोनों हाथ कानों तक उठाने हैं और उन्हें खुला छोड़ देना है। इस बार हाथ बांधने नहीं हैं।

दूसरी अतिरिक्त तकबीर में इमाम साहब फिर से "अल्लाहु अकबर" कहेंगे। आपको दोबारा अपने हाथ कानों तक उठाने हैं और फिर से खुला छोड़ देना है।

तीसरी अतिरिक्त तकबीर में इमाम साहब तीसरी बार "अल्लाहु अकबर" कहेंगे। इस बार आपको अपने हाथ उठाने हैं और उन्हें नाफ के नीचे बांध लेना है।

इस पूरे तरीके को याद रखने का एक बहुत सरल नियम है। पहले दो बार हाथ उठाने के बाद छोड़ देने हैं और तीसरी बार हाथ बांध लेने हैं। इसके बाद इमाम साहब धीरे से आउजुबिल्लाह और बिस्मिल्लाह पढ़ेंगे। फिर वे ज़ोर से सूरह फातिहा और कोई दूसरी सूरह पढ़ेंगे। आपको बहुत ध्यान और खामोशी से इमाम साहब की किरात सुननी है।

जब सूरह पूरी हो जाएगी तो इमाम साहब "अल्लाहु अकबर" कहकर रुकू में जाएंगे। आप भी उनके साथ रुकू में जाएं और तस्बीह पढ़ें। इसके बाद सीधे खड़े होकर समिअल्लाहु लिमन हमिदह और रब्बना लकल हम्द कहें। फिर रोज़ाना की नमाज़ की तरह दो सजदे करें और दूसरी रकात के लिए खड़े हो जाएं।

जब आप पहली रकात में हाथ बांध लेते हैं तो आपका पूरा ध्यान केवल सजदे की जगह पर होना चाहिए। इधर उधर देखना या अपने कपड़ों को ठीक करना नमाज़ के ध्यान को भंग करता है। जब इमाम साहब अतिरिक्त तकबीरें कहते हैं तो उनकी आवाज़ को ध्यान से सुनें। कई बार नए लोगों को उलझन होती है कि हाथ कब उठाने हैं और कब छोड़ने हैं। इसे सरल बनाने के लिए आप अपने मन में दोहरा सकते हैं कि पहले दो बार में हाथ छोड़ना है और तीसरी बार में बांधना है। यह सरल सा नियम आपको कभी भी गलती नहीं करने देगा। इसके बाद की प्रक्रिया बहुत ही सरल है जिसे आप हर रोज़ की नमाज़ में करते आ रहे हैं।

दूसरी रकात और अंतिम तीन तकबीरें

दूसरी रकात की शुरुआत में इमाम साहब हाथ बांधकर खड़े होंगे। वे पहले सूरह फातिहा पढ़ेंगे और उसके बाद कोई दूसरी सूरह पढ़ेंगे। इस रकात में अतिरिक्त तकबीरें सूरह पढ़ने के बाद होती हैं। यही बात पहली और दूसरी रकात में अंतर पैदा करती है।

जब इमाम साहब सूरह पूरी कर लेंगे तो वे रुकू में जाने से पहले तीन अतिरिक्त तकबीरें कहेंगे।

पहली तकबीर पर इमाम साहब "अल्लाहु अकबर" कहेंगे। आप अपने हाथ कानों तक उठाएं और छोड़ दें।

दूसरी तकबीर पर इमाम साहब फिर "अल्लाहु अकबर" कहेंगे। आप दोबारा हाथ उठाएं और छोड़ दें।

तीसरी तकबीर पर इमाम साहब फिर से "अल्लाहु अकबर" कहेंगे। आप तीसरी बार भी हाथ उठाएं और छोड़ दें।

चौथी तकबीर पर इमाम साहब "अल्लाहु अकबर" कहकर सीधे रुकू में चले जाएंगे। इस चौथी तकबीर पर आपको अपने हाथ नहीं उठाने हैं। आपको सीधे रुकू में चले जाना है।

रुकू पूरा करने के बाद आप सीधे खड़े होंगे और फिर दो सजदे करेंगे। सजदों के बाद आप तशहुद की हालत में बैठ जाएंगे। यहाँ आपको अत्तहिय्यात, दरूद शरीफ और दुआ ए मासूरा पढ़नी है। इसके बाद इमाम साहब दोनों तरफ सलाम फेरेंगे और आपकी नमाज़ पूरी हो जाएगी।

दूसरी रकात में जब आप खड़े होते हैं तो हाथ बंधे रहते हैं। इस रकात में सूरह फातिहा और दूसरी सूरह पहले पढ़ी जाती है। इसके बाद ही अतिरिक्त तकबीरें होती हैं। यह पहली रकात से थोड़ा अलग है और इसी कारण लोग अक्सर यहाँ गलती कर बैठते हैं। जब इमाम साहब सूरह पढ़ चुके हों तो वे रुकू में जाने से पहले तकबीरें कहेंगे। इस समय आपको तीन बार हाथ उठाने हैं और तीनों बार उन्हें छोड़ देना है। चौथी बार जब तकबीर कही जाएगी तो बिना हाथ उठाए सीधे रुकू में चले जाना है। इस अंतर को यदि आप समझ लेते हैं तो आपकी नमाज़ पूरी तरह से सही होगी।

Eid ul Adha ki Namaz Padhne Ka Sahi Tarika Step by Step

नमाज़ के बाद खुतबा और दुआ की अहमियत

सलाम फेरने के बाद आपको अपनी जगह से तुरंत उठना नहीं चाहिए। ईद की नमाज़ के बाद इमाम साहब का खुतबा सुनना वाजिब है। बहुत से लोग नमाज़ खत्म होते ही भागने लगते हैं। यह बहुत गलत तरीका है। खुतबा शांति से बैठ कर सुनना चाहिए क्योंकि इसमें बहुत सी काम की बातें और दीन की नसीहतें होती हैं।

खुतबा खत्म होने के बाद इमाम साहब दुआ मांगते हैं। इस दुआ में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और रो-रोकर अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगें। अपनी सेहत, परिवार और पूरी दुनिया के मुसलमानों की भलाई के लिए दुआ करें। दुआ के बाद एक दूसरे से गले मिलें और ईद की मुबारकबाद दें।

अगर आप नमाज़ के नियमों के बारे में और अधिक जानना चाहते हैं, तो आप हमारी वेबसाइट पर our guide on Eid ke sunnat tarike देख सकते हैं। इससे आपको त्योहार के दिनों की सभी सुन्नतों के बारे में सही जानकारी मिल जाएगी।

खुतबा सुनना नमाज़ का ही एक अहम हिस्सा माना जाता है। इसे सुनना हर नमाज़ी के लिए जरूरी है। खुतबे के दौरान किसी भी प्रकार की बातचीत करना या मोबाइल का उपयोग करना सख्त मना है। इस समय पूरी एकाग्रता के साथ इमाम साहब की बातें सुनें। वे अक्सर समाज की भलाई और आपसी भाईचारे पर बात करते हैं। दुआ के समय अपने दोनों हाथों को फैलाएं। यह वह समय होता है जब अल्लाह अपने बंदों की दुआओं को बहुत जल्दी स्वीकार करता है। अपने माता पिता और पूर्वजों की मगफिरत के लिए भी दुआ मांगें।

ईद की नमाज़ में होने वाली आम गलतियां और समाधान

अक्सर देखा जाता है कि लोग अतिरिक्त तकबीरों में भ्रमित हो जाते हैं। वे भूल जाते हैं कि कब हाथ छोड़ना है और कब बांधना है। इसका सबसे आसान समाधान यह है कि आप हमेशा इमाम साहब की आवाज़ और हरकतों पर पूरा ध्यान दें। जल्दबाजी में खुद से कोई कदम न उठाएं।

एक और आम गलती यह है कि लोग ईदगाह में देर से पहुंचते हैं। अगर आपकी पहली रकात छूट गई है तो क्या करें? इसके लिए आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। इमाम साहब के सलाम फेरने के बाद आप खड़े हो जाएं। अपनी छूटी हुई रकात को बिना अतिरिक्त तकबीर की गलती किए पूरा करें।

अगर आप धार्मिक मामलों और नमाज़ के सही तरीकों के बारे में और अधिक विस्तार से पढ़ना चाहते हैं, तो आप Islamic gyan aur masle masail पर जा सकते हैं। वहाँ आपको हर तरह के मसाइल का आसान हल मिल जाएगा।

यदि आप ईदगाह पहुंचने में थोड़े लेट हो गए हैं और इमाम साहब पहली रकात की अतिरिक्त तकबीरें कह चुके हैं तो क्या करें? ऐसे समय में जब आप जमात में शामिल हों तो तुरंत अपनी नीयत बांधें और खुद ही तीन बार अतिरिक्त तकबीरें कहकर इमाम साहब के साथ शामिल हो जाएं। यदि इमाम साहब रुकू में चले गए हैं तो आप रुकू में ही तकबीरें कह सकते हैं। इन नियमों को समझने से आपका आत्मविश्वास बढ़ता है और आप बिना किसी हिचकिचाहट के नमाज़ पूरी कर पाते हैं। अपने बच्चों को भी इन नियमों के बारे में पहले से बताएं ताकि वे भी सही तरीके से नमाज़ सीख सकें।

तशरीक के दिन और उनकी तकबीरें

ईद उल अजहा के अवसर पर तकबीर ए तशरीक का बहुत बड़ा महत्व है। यह तकबीर ९ ज़िलहिज्जा की फज्र की नमाज़ से शुरू होती है और १३ ज़िलहिज्जा की असर की नमाज़ तक पढ़ी जाती है। हर फर्ज़ नमाज़ के तुरंत बाद इसे एक बार ज़ोर से पढ़ना हर मुसलमान पर वाजिब है।

इसके बोल हैं: "अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाह, वल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, वलिल्लाहिल हम्द।" चाहे आप अकेले नमाज़ पढ़ रहे हों या जमात के साथ, इस तकबीर को पढ़ना न भूलें। यह अल्लाह की बड़ाई बयान करने का एक बहुत ही सुंदर तरीका है जो इन दिनों में विशेष रूप से किया जाता है।

ईद उल अजहा के दिन कुर्बानी और सामाजिक दायित्व

नमाज़ पूरी होने के बाद ही कुर्बानी का काम शुरू करना चाहिए। नमाज़ से पहले कुर्बानी करना सही नहीं माना जाता। इसलिए जैसे ही आप ईद की नमाज़ से फारिग हों, अपने घर जाएं और कुर्बानी की तैयारी करें। कुर्बानी करते समय जानवर के साथ नरमी का बर्ताव करना चाहिए।

कुर्बानी के गोश्त के तीन हिस्से करना सुन्नत तरीका है। एक हिस्सा अपने परिवार के लिए रखें। दूसरा हिस्सा अपने रिश्तेदारों और दोस्तों में बांटें। तीसरा हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को दें। यह त्योहार हमें दूसरों की मदद करना और अपनी प्यारी चीज़ों को अल्लाह की राह में कुर्बान करना सिखाता है।

अपने आस-पास के गरीबों का खास ख्याल रखें। कोशिश करें कि कोई भी आपके पड़ोस में भूखा न रहे। ईद की असली खुशी तभी है जब हम सबको साथ लेकर चलें। अपने बच्चों को भी इस काम में शामिल करें ताकि वे भी दान और धर्म का महत्व समझ सकें।

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