मुहर्रमुल हराम इस्लामी सन् व साल का पहला महीना है इस महीने की दस तारीख़ को यौमे आशूरा कहते हैं, तारीखे आलम में यह दिन बड़ा ही अहम दिन शुमार किया जाता है, दुनिया के बड़े बड़े अहम वाक़िआत इसी दिन रू नुमा हुए
इसी दिन हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की तौबह कुबूल हुई,
इसी दिन हज़रत नूह अलैहिस्सलाम की कश्ती कोहे जदी पर सलामती के साथ पहुँची
इसी दिन हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को ख़लीलुल्लाह का लक़बे जलील अता किया गया,
इसी दिन नारे मनरूद आप पर गुलज़ार हुई,
इसी दिन हज़रत याकूब अलैहिस्सलाम और आपके बेटों की एक अर्से बाद मुलाक़ात हुई,
इसी दिन हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम कैद से रिहाई दिये गए,
इसी दिन हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम मछली के पेट से ज़िन्दा व सलामत बाहर तशरीफ़ लाए,
इसी दिन हज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम को सलतनत व अंगुश्त्री अता हुई,
इसी दिन हज़रत मूसा व हारून अलैहिमस्सलाम की दुआ कुबूल हुई,
इसी दिन बनी इस्राईल के लिये दरयाए नील में रास्ते पैदा किये गए, और उन्हें फ़िरऔन से नजात मिली, इसी दिन फिरऔन अपनी फिरौनियत और फिरऔनियों समेत दरयाए नील में गर्क हो गया,
इसी दिन हज़रत इदरीस व हज़रत ईसा अलैहिमस्सलाम आसमान पर उठाए गए
और यही वह दिन है जिसमें सिब्ते पयम्बर हज़रत अली मुरतज़ा رضي الله تالا أنه के नूरे नज़र हज़रत फ़ातिमा رضی اللہ عنہ के लखते जिगर, सय्यिदुश शुहदा हज़रत सैयिदुना इमाम हुसैन और उनके शहज़ादगाने आली वक़ार अअवानो अन्सार और रुफकाए जां निसार रिज़वानुल्लाहि अन्हुम अजमईन ने मैदाने करबला में भूक और प्यास के आलम में जामे शहादत नोश फ़रमाकर यज़ीद व यज़ीदियत को हमेशा के लिये दफ्न कर दिया।
शबे आशूरा के नवाफ़िल
नियत की मैंने चार रकअत (या दो रकअत) नफ्ल नमाज़ की, वास्ते अल्लाह तआला के, मुंह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर
नोट:नफ़्लनमाज़ में वक़्त का नाम लेना ज़रूरी नहीं। (1) शबे आशूरा में चार रकअत नफ़्ल एक सलाम से अदा करें, हर रकअत में सूरए फ़ातिहा के बाद आयतुल कुर्सी एक बार और सूरए इख्लास (कुल हुवल्लाह) तीन बार पढ़े,
जब क़अदा ऊला में बैठे तो अत्तहिय्यात के बाद दुरूद शरीफ़ वदुआए मासूरा पढ़कर खड़े हों, तीसरी रकअत सना से शुरू करे, नमाज़ से फ़ारिग होकर सूरए इख्लास (कुल हुवल्लाह) १०० मरतबा पढ़े।
(2) दो दोरकअत की नियत से सौ रकअत नफ़्ल अदा करे, हर रकअत में सूरए फ़ातिहा के बाद सूरए इख्लास (कुल हुवल्लाह) तीन तीन बार पढ़े। नमाज़ से फ़ारिग होकर 70 बार यह तस्बीह पढ़े। सुब्हानल्लाहि वल हम्दु लिल्लाहि वला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर०
दसवीं मुहर्रम आशूरा के दिन रोज़े की बड़ी फ़ज़ीलत है, हुजूर सय्यिदे आलम सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम का इरशाद है कि आशूरा का रोज़ा एक साल के गुनाहों को मिटा देता है
यौमे आशूरा इन मअमूलात पर अमल करें, और बरकाते दारैन हासिल करें। गुस्ल करना, सुर्मा लगाना, नाखून तराशना, सदक़ा करना, अपने अहलो अयाल पर रिज्क़ में वुसअत करना, यानी किस्म किस्म के उम्दा खाने तैयार करके खिलाना, मरीज़ों की इयादत करना, यतीमों के सिर पर हाथ फैरना, मुसलमानों में सुलह कराना, उलमाए किराम की ज़्यारत करना, एक हज़ार मरतबा कुल हुवल्लाह शरीफ़ पढ़ना, अपने और तमाम मुसलमानों के लिये दुआ करना, नवाफ़िल पढ़ना, शरबत या पानी की सबील लगाना खिचड़ा पकाना, वाज़ो नसीहत और शहादत की मज्लिस मुनअकिद करना, मज्लिसे शहादत में वाक़िआते शहादत के साथ खुलफ़ाए राशिदीन और दीगर सहाबए किराम रिज़वानुल्लाहि तआला अन्हुम अजमईन का ज़िक्रे खैर करना वगैरह।
नमाज़े यौमे आशूरा
दसवीं मुहर्रम आशूरा के दिन गुस्ल करें फिर दो रकअत नफ़्ल अदा करे, हर रकअत में सूरए फ़ातिहा के बाद सूरए इख्लास (कुल हुवल्लाह) दस मरतबा पढ़े। नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी एक बार और दुरूदे इब्राहीमी (अत्तहिय्यात के बाद वाली दुरूद शरीफ़) नौ बार पढ़ कर दुआए आशूरा पढ़े, यह दुआ सेहत व आफ़ियत, खैरो बरकत, इल्मो अमल, कामयाबी और हुसूले नेअमत के लिये बेहद फाएदे मन्द है।
दुआए आशूरा
अल्लाहुम्मा सल्लि अला सय्यिदिना मुहम्मदिव व अला आलि सय्यिदिना मोहम्मर्दिव व बारिक व सल्लिम 0 सुब्हानल्लाहि अदा दल ख़ल्कि व मिलअल मीज़ानि व मुन्तहल इल्मि व मब्लगर रिदाइ वज़िनतिल अर्शि वल हम्दु लिल्लाहि अदादल ख़ल्क़ि व मिलअल मीज़ानि व मुन्तहल इल्मि व मब्लगर रिदाइ व ज़िनतल अर्शि वला इलाहा इल्लल्लाहु अदादल ख़लिक व मिलअल मीज़ानि व मुन्तहल इल्मि व मब लग़र रिदाइ व ज़िनतल अर्शि वल्लाहु अकबर अदादल ख़ल्क़ि व मिलअल मीज़ानि व मुन्तहल इल्मि व मब्लगर रिदाई व ज़िनतल अर्शि वला हौला वला कुव्वता इल्ला बिल्ला हिल अलिय्यिल अज़ीम अदादल खल्क़ि व मिल अल मीज़ानि व मुन्तहल इलमि व मब्लगर रिदाइ व ज़िनतल अरशिला मल्जा अवला मनजा अ वला ख़ला सा वला मनासा वला मगरिबा वला मफ़ ज़ अ मिनल्लाहि इल्ला इलैहि सुब्हानल्लाहि अ द दश्शफ़्इ वल वित्रि व अदादा कलिमा तिल्लाहित ताम्मति वला हौला वला कुव्वता इल्ला बिल्ला हिल अलिय्यिल अज़ीम ०
व हुवा हस्बीव निअमल वकील व निअमल मौला व निअमन नसीर ०
गुफ़रा नका रब्बना व इलैकल मसीर ०
व सल्लल्लाहु अला खैरि ख़लक़िहि व नूरि अरशिहि सय्यिदिना मुहम्मदिव व अला आलिहि व अस्हाबिही अजमईना व हुवा अरहमुर राहिमीन०
अल्लाहुम्मा या क़ाबिला तौबति आदमा अलैहिस्सलामु यौमा आशूरा अ,
व या राफ़िआ इदरीसाअलैहिस्सलामु यौमा आशूरा अ,
व या मुन्जि आ इस्माईला अलैहिस्सलामु यौमा आशूरा अ,
व या जामिआ शम्लि याकूबा अलैहिस्सलामु यौमा आशूरा अ,
व या गियासा इब्राहीमा अलैहिस्सलाम मिन नारि नमरूदा यौमा आशूरा अ,
व या मुख़्लिसा यूसुफ़ा अलैहिस्सलामु मिनस सिज्नि यौमा आशूरा अ,
व या फ़ारिजा कबि ज़िन्नूनि अलैहिस्सलामु यौमा अशूरा अ,
व या नासिरा मुहम्मदिर रसूलिल्लाहि सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लमा फ़िल ग़ारि यौमा आशूरा अ
व मुअतिश शहादति लिल हुसैनि रज़ियल्लाहो अन्हो फ़िल अरदिल कर बलाइ यौमा आशूरा
आ वया ख़ालिक़ल जन्नति वन्नारि यौमा आशूरा अ, व या ख़ालिकस समाइवल अरदियौमा आशूरा अ,
वख़ालिक़ल जिबालिवल बिहारि यौमा आशूरा अ, व या ख़ालिक़ल अर्शिवल कुरसिय्यि यौमा आशूरा अ,
व या ख़ालिकल जिबराईला व मीकाईला व इसराफीला व इज़राईला वल मलाइकति अलैहिमुस्सलामु यौमा आशूरा अ,
व या मुअतिया सुलैमाना अलैहिस्सलामुल मुल्का वल ख़ातमा यौमा आशूरा अ, व या मुग़रिका फ़िरऔना यौमा आशूरा अ, व या मुन्जि अ, बनी इस्राईला यौमा आशूरा अ, व या ग़ाफ़िरू लि मुहम्मदिन सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लमा मा तक़द्दमा मिन जंबिहि वमा तअख्ख़रा यौमा आशूरा अ, या अल्लाहु या रहमानु या रहीमु या ख़ालिक़ल लैलि वनहारि बिहक्कि जद्दिल हसनि वल हुसैनि व बि हक्कि हैदरि निल कर्रारि व बिहक्कि फ़ातिमति बिन्ति सैयिदिल अबरारि ख़ल्लिस्ना मिनन्नारि ०
या अज़ीजु या ग़फ़्फ़ारू या क़ादियल हाजाति व या वलिय्यल हसनात ० व याराफ़िअस सय्यिआति इरफासय्यिआतिना बिजाहि यौमा आशूरा अ, या हय्यु या कय्यूमु या ज़लजलालिवल इकरामि ० व या मालिकि यौमिद्दीन ० इय्याका नअबुदु व इय्याका नस्तईन ० फी उमुरिडुनिया वल आख़िरति या रब्बल आलमीन ० या अल्लाहु बि हक्कि इज्जति रसूलिल्लाहि व हुरमतिहि व बर कतिहि व शानिहि व जलालिहि व जमालिहि नजिना मिन शरिहासिदिन इजा हसद व नजिना मिनत ताऊनि वल वबाइ व मिन शरिकुल्लिल बलाइ बिहुरमति यौमा आशूरा अ, ला इलाहा इल्लल्लाहु रब्बुस समावाति वल अर्दि वमा बैनहुमा वमा तहतस सरा ० अलहम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन ० व सल्लल्लाहु अला खैरि ख़लकिहि मुहम्मदिव व आलिहि व अस्हाबिहि अजमईना बिरहमतिका या अरहमर राहिमीन ० आमीन ० सुम्माआमीन
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