Ad Code

Ticker

6/recent/ticker-posts

Ashura Ka Roza | आशूरा का रोज़ा – Fazilat, Tarika aur 9-10-11 Muharram ka Amal (Hadees Se Sabit)

Ashura Ka Roza | आशूरा का रोज़ा – Fazilat, Tarika aur 9-10-11 Muharram ka Amal (Hadees Se Sabit), Muharram, Ashura Roza, Roza Ki Fazilat, 10 Muharram, Muharram 2026, IslamicCreation
Ashura Ka Roza | आशूरा का रोज़ा – Fazilat, Tarika aur 9-10-11 Muharram ka Amal (Hadees Se Sabit)
🌙
🕌 IslamicCreation.com
أَرْجُو أَن يُكَفِّرَ اللَّهُ بِهِ السَّنَةَ الَّتِي قَبْلَهُ
— नबी ﷺ (मुस्लिम: 1162)
1 साल के गुनाहों का कफ़्फ़ारा
हदीस से साबित ✅
Muharram 2026 — Special
Ashura Ka Roza — Fazilat, Tarika
आशूरा का रोज़ा — 9, 10, 11 मुहर्रम का मुकम्मल अमल
क़ुरआन और हदीस से साबित — रोज़े की फ़ज़ीलत, 9+10 या 10+11 क्यों? मूसा AS की कहानी, सेहरी-इफ़्तार की दुआ और ख़ास अमल।
🌙 9+10 या 10+11 ⭐ 1 साल का कफ़्फ़ारा ✅ हदीस से साबित 📖 अरबी + हिंदी
📅 Updated: जून 16, 2026
IslamicCreation.com🌙 Muharram 1448 AH

Ashura Ka Roza | आशूरा का रोज़ा – Fazilat, Tarika aur 9-10-11 Muharram ka Amal (Hadees Se Sabit) 2026

🌙 आशूरा (10 मुहर्रम) का रोज़ा इस्लाम में एक बेहद ख़ास नेकी है। नबी करीम ﷺ ने ख़ुद यह रोज़ा रखा और इसकी ताकीद फ़रमाई। हदीस में है — यह रोज़ा पिछले एक साल के गुनाहों का कफ़्फ़ारा है। 2026 में आशूरा 26 जून (शुक्रवार) को है — यानी अभी वक़्त है! इस पोस्ट में जानें — रोज़े की फ़ज़ीलत, 9+10 या 10+11 क्यों रखें, मूसा AS की पूरी कहानी, सेहरी-इफ़्तार की दुआएँ और आशूरा के ख़ास अमल — सब हदीस की रोशनी में।

📅 Ashura 2026 — रोज़े की तारीख़ (Quick Answer)

⭐ Option 1 — Afzal
9 + 10 मुहर्रम
25 + 26 जून
2026
गुरुवार + शुक्रवार
"अगले साल 9 का रोज़ा भी रखूँगा" — नबी ﷺ (मुस्लिम: 1134)
✅ Option 2 — Jaiz
10 + 11 मुहर्रम
26 + 27 जून
2026
शुक्रवार + शनिवार
यहूदियों की मुशाबहत से बचने के लिए एक और दिन मिलाना जाइज़ है।
🚫 सिर्फ़ 10 मुहर्रम का अकेला रोज़ा — मकरूह (ना-पसंदीदा) है। 9+10 या 10+11 मिलाकर रखें।

⭐ आशूरा के रोज़े की फ़ज़ीलत — Ashura Roza Ki Fazilat (Hadees Se)

आशूरा के रोज़े की फ़ज़ीलत के बारे में 3 ख़ास हदीसें हैं जो हर मुसलमान को जाननी चाहिए:

⭐ सबसे मशहूर हदीस — Ashura Roza Ki Fazilat
أَرْجُو أَن يُكَفِّرَ اللَّهُ بِهِ السَّنَةَ الَّتِي قَبْلَهُ
"Arjoo an yukaffirallaahu bihis-sanatallati qablah"
हिंदी तर्जुमा: "मुझे अल्लाह से उम्मीद है कि वो इस रोज़े की वजह से पिछले एक साल के (सग़ीरा) गुनाहों को माफ़ कर दे।"
📚 नबी ﷺ का फ़रमान — (मुस्लिम: 1162, अबू क़तादा رضی اللہ عنہ से रिवायत)

हज़रत अबू हुरैरा رضی اللہ عنہ से रिवायत है कि नबी ﷺ ने फ़रमाया: "रमज़ान के बाद सबसे अफ़ज़ल रोज़े — अल्लाह के महीने मुहर्रम के रोज़े हैं।"

📚 (मुस्लिम: 1163)

हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास رضی اللہ عنہ फ़रमाते हैं: "मैंने नबी ﷺ को किसी दिन का रोज़ा इतनी फ़िक्र से रखते नहीं देखा जितना आशूरा (10 मुहर्रम) के दिन।"

📚 (बुख़ारी: 2006)

📖 नबी ﷺ ने आशूरा का रोज़ा क्यों रखा? — Musa AS Ki Poori Kahani

📖 मदीना में पहली मुलाक़ात — हज़रत मूसा AS का रोज़ा
जब नबी ﷺ मदीना तशरीफ़ लाए — उन्होंने यहूदियों को 10 मुहर्रम (आशूरा) का रोज़ा रखते देखा।
नबी ﷺ ने पूछा: "तुम यह रोज़ा क्यों रखते हो?" — उन्होंने जवाब दिया: "यह वो मुबारक दिन है जब अल्लाह ने हज़रत मूसा AS और बनी इस्राईल को फ़िरऔन और उसकी फ़ौज से नजात दी — और फ़िरऔन पानी में डूब गया।"
हज़रत मूसा AS ने शुक्राने का रोज़ा रखा — इसीलिए यहूदी भी यह दिन मनाते हैं।
नबी ﷺ ने फ़रमाया: "हम मूसा के ज़्यादा हक़दार हैं — उनकी उम्मत से।" और नबी ﷺ ने आशूरा का रोज़ा रखा और सहाबा को भी रखने का हुक्म दिया।

हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास رضی اللہ عنہ से रिवायत है: "जब नबी ﷺ ने यहूदियों को आशूरा का रोज़ा रखते देखा और वजह पूछी — तो फ़रमाया: 'हम मूसा के तुमसे ज़्यादा क़रीब हैं।' और आशूरा का रोज़ा रखा और रखने का हुक्म दिया।"

📚 (बुख़ारी: 2004, मुस्लिम: 1130)
📖 वो मशहूर वाक़िआ — सूरह शुअरा: 63
فَأَوْحَيْنَا إِلَىٰ مُوسَىٰ أَنِ اضْرِب بِّعَصَاكَ الْبَحْرَ ۖ فَانفَلَقَ فَكَانَ كُلُّ فِرْقٍ كَالطَّوْدِ الْعَظِيمِ
"Fa-awhaynaa ilaa Moosaa anidrib bi'asaakal bahr, fanfalaqa fakaana kullu firqin kat-tawdil-'azeem"
तर्जुमा: "तो हमने मूसा को वही भेजी — अपना असा (लाठी) दरिया पर मारो। दरिया फट गया और हर हिस्सा बड़े पहाड़ जैसा हो गया।"
📚 क़ुरआन — सूरह शुअरा: 63

❓ 9+10 या 10+11 — Kaun Sa Rakhein Aur Kyun?

यह सवाल सबसे ज़्यादा पूछा जाता है। इसका जवाब एक मशहूर हदीस में है:

हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास رضی اللہ عنہ से रिवायत है: "जब नबी ﷺ ने आशूरा का रोज़ा रखा और लोगों को रखने का हुक्म दिया — तो लोगों ने कहा: 'ऐ अल्लाह के रसूल! यह दिन तो यहूदी और ईसाई भी मनाते हैं।' — तो नबी ﷺ ने फ़रमाया: 'इंशाअल्लाह अगले साल हम 9 का रोज़ा भी रखेंगे।' लेकिन अगला साल आने से पहले नबी ﷺ का विसाल हो गया।"

📚 (मुस्लिम: 1134)

इस हदीस से उलमा ने निकाला:

  • 9+10 मुहर्रम (Afzal): नबी ﷺ का इरादा यही था — यहूदियों की मुशाबहत (similarity) न हो। 25+26 जून 2026।
  • 10+11 मुहर्रम (Jaiz): कुछ उलमा ने यह option भी बताया — दोनों तरफ़ से एक दिन मिलाना। 26+27 जून 2026।
  • सिर्फ़ 10 मुहर्रम (Makrooh): सिर्फ़ 10 का अकेला रोज़ा यहूदियों जैसा हो जाता है — मकरूह है।
सबसे आसान याद रखने का तरीक़ा: अगर आप 25+26 जून (9+10 मुहर्रम) का रोज़ा रख सकते हैं — यह सबसे अफ़ज़ल है। अगर 25 जून miss हो जाए — 26+27 जून (10+11) का रखें।

🌙 रोज़े का मुकम्मल तरीक़ा — Roza Ka Tarika (Sehri Se Iftar Tak)

1
नीयत (Niyyat) — रात को या सेहरी में

आशूरा के रोज़े की नीयत करें: "मैं कल (10 मुहर्रम) का नफ़्ल रोज़ा रखता/रखती हूँ।" नीयत दिल से होती है — ज़बान से कहना ज़रूरी नहीं।

2
सेहरी — फ़जर से पहले खाएँ

सेहरी खाना सुन्नत है। नबी ﷺ ने फ़रमाया: "सेहरी खाओ — इसमें बरकत है।" (बुख़ारी: 1923) 💰 बरकत की दुआ भी पढ़ें।

3
सेहरी की दुआ पढ़ें

सेहरी के वक़्त यह दुआ पढ़ें — नीचे दी गई है।

4
दिन में — नेक अमल करें

रोज़े के दिन — ग़ीबत, झूठ, ग़ुस्से से बचें। ज़्यादा से ज़्यादा इस्तिग़फ़ार, दरूद और क़ुरआन तिलावत करें।

5
इफ़्तार — मग़रिब पर खोलें

मग़रिब की अज़ान के साथ रोज़ा खोलें। सबसे पहले खजूर या पानी से इफ़्तार करें — यह सुन्नत है। इफ़्तार की दुआ पढ़ें।

🤲 सेहरी और इफ़्तार की दुआएँ — Sehri Aur Iftar Ki Duaein

🌅 सेहरी (Roza Rakhne Ki Niyyat) Ki Dua
وَبِصَوْمِ غَدٍ نَّوَيْتُ مِنْ شَهْرِ مُحَرَّمَ
"Wa bisawmi ghadin nawaytu min shahri Muharram"
हिंदी तर्जुमा: "मैंने मुहर्रम के महीने का कल का रोज़ा रखने की नीयत की।"
⏰ कब पढ़ें: सेहरी करते वक़्त या रात को सोने से पहले।
🌙 इफ़्तार (Roza Kholne) Ki Dua
اللَّهُمَّ إِنِّي لَكَ صُمْتُ وَبِكَ آمَنتُ وَعَلَيْكَ تَوَكَّلتُ وَعَلَىٰ رِزْقِكَ أَفْطَرْتُ
"Allahumma inni laka sumtu wa bika aamantu wa 'alayka tawakkaltu wa 'alaa rizqika aftartu"
हिंदी तर्जुमा: "ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा, तुझ पर ईमान लाया, तुझ पर भरोसा किया और तेरे रिज़्क़ से इफ़्तार किया।"
📚 (अबू दाऊद: 2358)
⏰ कब पढ़ें: इफ़्तार करते वक़्त — खजूर या पानी लेते हुए।

📿 आशूरा के दिन के ख़ास अमल — Ashura Ke Din Kya Karein

वक़्तअमलफ़ायदा
🌅 सेहरीसेहरी की दुआ + नीयतरोज़े की बरकत का आग़ाज़
🕌 फ़जर बादआयतुल कुर्सी 3 बार + इस्तिग़फ़ार 100 बारदिन की हिफ़ाज़त
☀️ दिन मेंदरूद शरीफ़ 100 बार + क़ुरआन तिलावतरूहानी बरकत
🕌 ज़ुहर बादसूरह इख़्लास 3 बार + दरूद 11 बारदिन की नेकियाँ
💰 किसी भी वक़्तसदक़ा देना — ग़रीब को खाना खिलाएँरोज़े का सवाब दोगुना
🕌 अस्र बादइस्तिग़फ़ार 100 बार + हस्बियल्लाह 7 बारगुनाहों से पाकी
🌆 मग़रिबइफ़्तार की दुआ + खजूर से इफ़्तारसुन्नत पर अमल
🌙 रात2 रकात नफ़्ल + दुआआशूरा की रात की इबादत

💡 कफ़्फ़ारा का मतलब — Kaffarah Ka Matlab Kya Hai?

बहुत से लोग सोचते हैं — "एक साल के सब गुनाह माफ़" — यानी क्या बड़े गुनाह भी माफ़ हो जाते हैं?

📌 उलमा की राय: हदीस में "गुनाह माफ़" का मतलब है — सग़ीरा गुनाह (छोटे गुनाह)। कबीरा (बड़े) गुनाहों के लिए — सच्ची तौबा ज़रूरी है। (इमाम नवावी، अल-मजमूअ)
इसका मतलब: आशूरा का रोज़ा — पिछले साल की लापरवाहियाँ, छोटी ग़लतियाँ और सग़ीरा गुनाह — अल्लाह के फ़ज़्ल से माफ़ हो जाते हैं। यह अल्लाह की बहुत बड़ी रहमत है। 🤲 हाजत की दुआ के साथ तौबा करें।

⚠️ आशूरा में की जाने वाली ग़लतियाँ — Jo Bilkul Na Karein

  • सिर्फ़ 10 मुहर्रम का अकेला रोज़ा: यह मकरूह है — 9+10 या 10+11 मिलाकर रखें।
  • मातम और ज़ंजीर ज़नी: यह क़ुरआन और सुन्नत से साबित नहीं — नबी ﷺ ने मना फ़रमाया। (बुख़ारी: 1294)
  • आशूरा की ख़ास नमाज़: आशूरा की कोई ख़ास नमाज़ हदीस से साबित नहीं — जो नमाज़ें Viral होती हैं वो बेबुनियाद हैं।
  • आशूरा पर सोग (Mourning) मनाना: ग़म तो है — लेकिन काले कपड़े, मातम, और ख़ास "सोग" की रस्में बिद्दत हैं।
  • आशूरा को ख़ुशी का त्यौहार मनाना: यह भी ग़लत है — यह दिन इबादत और रोज़े का है।

❓ FAQ — Ashura Ka Roza 2026

Q
Ashura Ka Roza Kab Hai 2026 Mein?
Option 1 (Afzal): 9+10 मुहर्रम — 25+26 जून 2026 (गुरुवार+शुक्रवार)। Option 2: 10+11 मुहर्रम — 26+27 जून 2026 (शुक्रवार+शनिवार)।
Q
Ashura Ka Roza Rakhne Se Kya Milta Hai?
हदीस में है — "मुझे अल्लाह से उम्मीद है कि वो इस रोज़े की वजह से पिछले एक साल के गुनाह माफ़ कर दे।" (मुस्लिम: 1162) — यानी सग़ीरा गुनाहों की माफ़ी
Q
9 Aur 10 Muharram Ka Roza Kyun Rakhte Hain?
नबी ﷺ ने फ़रमाया: "अगले साल 9 का भी रोज़ा रखूँगा" — ताकि यहूदियों की मुशाबहत न हो। नबी ﷺ का विसाल हो गया — इसलिए उलमा ने 9+10 या 10+11 का हुक्म दिया। (मुस्लिम: 1134)
Q
Sirf 10 Muharram Ka Roza Rakh Sakte Hain?
जायज़ है लेकिन मकरूह (ना-पसंदीदा) है। हदीस की रोशनी में 9+10 या 10+11 मिलाकर रखना ज़्यादा बेहतर और सुन्नत के क़रीब है।
Q
Kya Ashura Ka Roza Farz Hai?
नहीं — आशूरा का रोज़ा फ़र्ज़ नहीं, Mustahab (सुन्नत की तरह) है। लेकिन इसका सवाब बेशुमार है — जो रख सके उसे ज़रूर रखना चाहिए।
Q
Ashura Ke Din Kya Khana Chahiye?
कोई ख़ास खाना हदीस से साबित नहीं है। सुन्नत यह है — खजूर से इफ़्तार करें। सेहरी में हल्का और पौष्टिक खाना खाएँ। परिवार को खाना खिलाना (सदक़ा) इस दिन की बरकत है।
Q
Kya Aurat Ashura Ka Roza Rakh Sakti Hai?
हाँ — बिल्कुल। हैज़ (माहवारी) के दिनों में रोज़ा नहीं रख सकतीं — उन दिनों को बाद में क़ज़ा कर सकती हैं। इस्लाम में औरत के हक़ूक़ पढ़ें।
Q
Ashura Ka Roza Rakhne Ke Liye Niyyat Kab Karein?
नफ़्ल रोज़े की नीयत — रात को या सेहरी के वक़्त — दोनों जाइज़ है। मुहर्रम 2026 की पूरी जानकारी के लिए हमारी पोस्ट पढ़ें।

🌙 आख़िरी बात — इस मौक़े को हाथ से न जाने दें!

وَصِيَامُ يَوْمِ عَاشُورَاءَ أَحْتَسِبُ عَلَى اللَّهِ أَن يُكَفِّرَ السَّنَةَ الَّتِي قَبْلَهُ

"और आशूरा के दिन का रोज़ा — मुझे अल्लाह से उम्मीद है कि वो पिछले एक साल के गुनाहों का कफ़्फ़ारा करे।" (मुस्लिम: 1162)

आशूरा 2026 — 26 जून (शुक्रवार) — सिर्फ़ कुछ दिन बाक़ी हैं। अभी नीयत पक्की करें — 25+26 जून का रोज़ा रखें, सदक़ा दें और इस्तिग़फ़ार करें। अल्लाह से उम्मीद रखें — वो पिछले एक साल के गुनाह माफ़ करेगा! 🤲

#AshuraKaRoza #आशूराकारोज़ा #10MuharramRoza #AshuraFazilat #Muharram2026 #IslamicCreation

🔗 यह भी पढ़ें

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

Ad Code