कियामत नुमा हादसा
जमीने करबला का खूनी मंजर
HINDI
सय्यिदुश्शुहदा हज़रते इमामे हुसैन और इन के रुफका की अदीमुल मिशाल जांबाजियां
.
विलादते मुबारका
सय्यिदुश्शुहदा हज़रते इमामे हुसैन رضي الله تالا أنه की विलादत 5 शा'बान सि. 4
हि. को मदीनए मुनव्वरा में हुई। हुजूरे पुरनूर, सय्यिदे आलम ﷺने आप का नाम हुसैन
और शब्बीर रखा और आप की कुन्यत अबू अब्दुल्लाह और लकब सिबते रसूलुल्लाह और
रैहानतुर्रसूल है और आप के बरादरे मुअज्जम की तरह आप को भी जन्नती जवानों का
सरदार और अपना फ़रज़न्द फ़रमाया।
हुजूरे अकदस, नबिय्ये अकरम ﷺ को आप के साथ कमाले राफ्त व महब्बत थी। हदीष शरीफ़
में इरशाद हुवा :
عن ابن عباس من أحبهما فقد أحب ومن أبغضهما فقد ابغضنی
"जिस
ने इन दोनों (हज़रते इमामे हसन व इमामे हुसैन
رضي الله تالا أنه) से महब्बत
की उस ने मुझ से महब्बत की और जिसने इन से अदावत की उस ने मुझ से अदावत की।"
"जन्नती
जवानों का सरदार" फ़रमाने से मुराद येह है कि जो
लोग राहे खुदा में अपनी
जवानी में राहिये जन्नत हुए हज़रते इमामैन करीमैन उन के सरदार हैं और जवान किसी
शख्स को ब लिहाज़ इस के नौ उम्री के भी कहा जाता है और ब लिहाज़ शफ़्क़ते
बुजुर्गाना के भी, आदमी की उम्र कितनी भी हो उस के बुजुर्ग उस को जवान बल्कि
लड़का ही कहते हैं, शैख़ और बुढ्ढा नहीं कहते हैं। इसी तरह ब माना फुतुव्वत व
जवामर्दी भी लफ़्ज़े जवान का इतलाक़ होता है ख़्वाह कोई शख्स बुढ्ढा हो मगर
हिम्मते मर्दाना रखता हो वोह अपनी शुजाअत व बसालत के लिहाज़ से जवान कहलाया जाता
है। हज़रते इमामे हुसैन رضي الله تالا أنه की उम्र शरीफ़ अगर्चे वक्ते विसाल पचास
से ज़ाइद थी। मगर शुजाअत व जवांमर्दी के लिहाज़ से नीज़ शफ़्क़ते पिदरी के
इल्तिज़ा से आप को जवान फ़रमाया गया और येह मा'ना भी हो सकते हैं कि अम्बियाए
किराम व खुलफ़ाए राशिदीन के सिवा इमामैने जलीलैन तमाम अहले जन्नत के सरदार हैं
क्यूंकि जवानाने जन्नत से तमाम अहले जन्नत मुराद हैं इस लिये कि जन्नत में बुढ्ढे
और जवान का फ़र्क न होगा। वहां सब ही जवान होंगे और सब की एक उम्र होगी ।
.
हुजूर
सय्यिदे आलम ﷺ ने इन दोनों फ़रज़न्दों को अपना फूल फ़रमाया । वोह दुन्या में मेरे
दो फूल हैं।
हुजूरे अकदस ﷺ इन दोनों नौनिहालों को फूल की तरह सूंघते और सीनए
मुबारक से लिपटाते ।
हुजूरे पुरनूर सय्यिदे आलम ﷺ की चची हज़रते उम्मुल फज्ल
बिन्ते अल हारिष हज़रते अब्बास बिन अब्दुल मुत्तलिब رضي الله تالا أنه की ज़ौजा
एक रोज़ हुजूरे अन्वर ﷺ के हुजूर में हाज़िर हुई और अर्ज़ किया : या रसूलल्लाह ﷺ
आज मैं ने एक परेशान ख्वाब देखा, हुजूर ﷺ ने दरयाफ़्त फ़रमाया : क्या ? अर्ज़
किया : वोह बहुत ही शदीद है। उन को उस ख्वाब के बयान की जुरअत न होती थी।
हुजूर
ﷺ ने मुकर्रर दरयाफ्त फ़रमाया तो अर्ज़ किया कि मैं ने देखा कि जसदे अतहर का
एक टुकड़ा काटा गया और मेरी गोद में रखा गया । इरशाद फ़रमाया : तुम ने बहुत अच्छा
ख्वाब देखा, फ़ातिमा ज़हरा (رضی اللہ عنہ) के बेटा होगा और वोह तुम्हारी गोद में
दिया जाएगा। ऐसा ही हुवा । हज़रते इमामे हुसैन رضي الله تالا أنه पैदा हुए और
हज़रते उम्मुल फज्ल की गोद में दिये गए।
.
उम्मुल फ़ज़्ल फ़रमाती हैं :
मैं ने एक रोज़ हुजूरे अकदस ﷺ की ख़िदमते अक्दस में हाज़िर हो कर हज़रते
इमामे हुसैन رضي الله تالا أنه को आप ﷺ की गोद में दिया, क्या देखती हूं कि
चश्मे मुबारक से आंसूओं की लड़ियां जारी हैं। मैं ने अर्ज़ किया : या नबियल्लाह
ﷺ मेरे मां बाप हुजूर पर कुरबान ! येह क्या हाल है ? फ़रमाया : जिब्रील
(अलैहिस्सलाम) मेरे पास आए और उन्हों ने येह खबर फ़रमाई कि मेरी उम्मत इस
फ़रज़न्द को क़त्ल करेगी । मैं ने कहा : क्या इस को ? फ़रमाया : हां और मेरे पास
इस के मक्तल की सुर्ख मिट्टी भी लाए ।
शहादत की शोहरत
हज़रते इमामे आली मकामرضي الله تالا أنه की विलादत के साथ ही आप की शहादत की ख़बर
मशहूर हो चुकी, शीर ख्वारगी के अय्याम में हुजूरे अकदस नबिय्ये करीम ﷺ ने उम्मुल
फ़ज़्ल को आप की शहादत की खबर दी, खातूने जन्नत رحمة الله عليه ने अपने इस
नौनिहाल को ज़मीने करबला में खून बहाने के लिये अपना खूने जिगर (दूध) पिलाया, अली
मुर्तज़ा رضي الله تالا أنه ने अपने दिल बन्द जिगर पैवन्द को ख़ाके करबला
में लौटने और दम तोड़ने के लिये सीने से लगा कर पाला, मुस्तफ़ा ﷺ ने बयाबान
में सूखा हल्क़ कटवाने और राहे खुदा में मर्दाना वार जान नज्र करने के लिये इमामे
हुसैन رضي الله تالا أنه को अपनी आगोशे रहमत में तबिय्यत फ़रमाया, येह आगोशे
करामत व रहमते फ़िरदौसी चमनिस्तानों और जन्नती ऐवानों से कहीं ज़ियादा बाला
मर्तबत है, उस के रुतबे की क्या निहायत और जो इस गोद में परवरिश पाए उस की इज्जत
का क्या अन्दाज़ा ।
.
उस वक्त का तसव्वुर दिल लर्जा है जब कि इस फ़रज़न्दे अरजुमन्द की विलादत की मसर्रत के साथ साथ शहादत की खबर पहुंची होगी, सय्यिदे आलम ﷺ की चश्मए रहमत चश्मने अश्कों के मोती बरसा दिये होंगे, इस खबर ने सहाबए किबार जां निषाराने अहले बैत के दिल हिला दिये, इस दर्द की लज्जत अली मुर्तज़ा رضي الله تالا أنه के दिल से पूछिये, सिदको सफ़ा की इम्तिहानगाह में सुन्नते खलील अदा कर रहे हैं। हज़रते खातूने जन्नत की खाके जेरे क़दमे पाक पर कुरबान ! जिस के दिल का टुकड़ा नाज़नीन लाडला सीने से लगा हुवा है, महब्बत की निगाहों से इस नूर के पुतले को देखती हैं, वोह जान निषार अपने सरवर आफ़रीं तबस्सुम से दिलरुबाई करता है, हुमक हुमक कर महब्बत के समुन्दर में तलातुम पैदा करता है, मां की गोद में खेल कर शफ़्क़ते मादरी के जोश को और ज़ियादा मौजज़न करता है, मीठी मीठी निगाहों और प्यारी प्यारी बातों से दिल लुभाता है, ऐन ऐसी हालत में करबला का नक्शा आप के पेशे नज़र होता है। जहां येह चहीता, नाज़ो का पाला, भूका प्यासा, बयाबान में बे रहूमी के साथ शहीद हो रहा है, न अली मुर्तजा साथ हैं न हसने मुज्तबा, अज़ीज़ो अकारिब बरादरो फ़रज़न्द कुरबान हो चुके हैं, तन्हा येह नाज़नीन हैं, तीरों की बारिश से नूरी जिस्म लहू लुहान हो रहा है, खैमे वालों की बेकसी अपनी आंखों से देखता है और राहे खुदा में मर्दाना करता है। करबला की ज़मीन मुस्तफ़ा ﷺ के फूल से रंगीन होती है, वोह शमीमे पाक जो हबीब खुदा ﷺ को प्यारी थी कूफ़ा के जंगल को इत्र बीज़ करती है, खातूने जन्नत की नज़र के सामने येह नक्शा फिर रहा है और फ़रज़न्द सीने से लिपट रहा है। हज़रते हाजरा इस मन्ज़र को देखें।
.
देखना तो येह है कि इस फ़रज़न्दे अरजुमन्द के
जद्दे करीम, हबीबे खुदा ﷺ हैं, हज़रते हक़ तबारक व तआला इन का रिज़ाजू है बहरो बर
में इन का हुक्म नाफ़िज़ है, शजरो हजर सलाम अर्ज करते हैं और मुतीए फ़रमान हैं,
चांद इशारों पर चला करता है, डूबा हुवा सूरज पलट आता है, बद्र में मलाइका लश्करी
बन कर हाज़िरे ख़िदमत होते हैं, कौनैन के ज़रे ज़र्रे पर ब हुक्मे इलाही - हुकूमत
है, अव्वलीन व आख़िरीन सब की उक्दा कुशाई इशारए चश्म पर मौकूफ़ व मुन्हसिर है, इन
के गुलामों के सदके में खल्क के काम बनते हैं, मददें होती हैं, रोजी मिलती
है|
(तर्जमए कन्जुल ईमान : और बेशक करीब है कि तुम्हारा रब्ब तुम्हें
इतना देगा कि तुम राजी हो जाओगे )
बावुजूद इस के इस फ़रज़न्दे अरजुमन्द की
ख़बरे शहादत पा कर चश्मे मुबारक से अश्क तो जारी हो जाते हैं मगर मुस्तफ़ा
ﷺ दुआ के लिये हाथ नहीं उठाते, बारगाहे इलाही में इमामे हुसैन
عَلَيْهِ ٱلسَّلَامُ के अमनो सलामत और इस हादशाए हाइला से महफूज़ रहने और
दुश्मनों के बरबाद होने की दुआ नहीं फ़रमाते, न अली मुर्तजा अर्ज करते हैं कि या
रसूलल्लाह ﷺ इस ख़बर ने तो दिलो जिगर पारा पारा कर दिये, आप ﷺ के कुरबान !
बारगाहे हक में अपने इस फ़रज़न्द के लिये दुआ फ़रमाइये । न ख़ातूने जन्नत
इल्तिजा करती हैं कि ऐ सुल्ताने दारैन ! आप ﷺ के फैज़ से आलम फैज़याब है और आप
ﷺ की दुआ मुस्तजाब । मेरे इस लाडले के लिये दुआ फ़रमा दीजिये, न अहले बैत न
अज़वाजे मुतहहरात न सहाबए किराम सब खबरे शहादत सुनते हैं, शोहरा आम हो जाता है
मगर बारगाहे रिसालत ﷺ में किसी तरफ़ से दुआ की दरख्वास्त पेश नहीं होती। बात
येह है कि मकामे इम्तिहान में साबित क़दमी दरकार है, येह महले उज्र व तअम्मुल
नहीं, ऐसे मौक़अ पर जान से दरैग जांबाज़ । मर्दो का शैवा नहीं, इख्लास से जां
निषारी ऐन तमन्ना है।
दुआएं की गई मगर येह कि येह फ़रज़न्द मकामे सफ़ा
व वफ़ा में सादिक़ सबित हो । तौफीके इलाही - मुसाइद रहे, मसाइब का हुजूम और आलाम
का अम्बोह इस के क़दम को पीछे न हटा सके।
.
अहादीस में इस शहादत की बहुत
ख़बरें वारिद हैं। इब्ने सा'द व तबरानी ने हज़रते उम्मुल मोअमिनीन आइशा सिद्दीका
رضی اللہ عنہ से रिवायत की, कि हुजूरे अनवर ﷺ ने फ़रमाया : मुझे जिब्रील ने
खबर दी कि मेरे बाद मेरा फ़रज़न्द हुसैन رضي الله تالا أنه जमीने तफ्फ़ में क़त्ल
किया जाएगा और जिब्रील मेरे पास येह मिट्टी लाए, उन्हों ने अर्ज़ किया कि येह
हुसैन رضي الله تالا أنه की ख्वाबगाह (मक्तल) की ख़ाक है । तफ्फ़ क़रीबे कूफ़ा उस
मकाम का नाम है जिस को करबला कहते हैं।
इमाम अहमद ने रिवायत की, कि
हुजूरे अकदस -ﷺ ने फ़रमाया कि मेरी दौलत सराए अकदस में वोह फ़िरिश्ता आया जो
इस से क़ब्ल कभी हाज़िर न हुवा था, उस ने अर्ज किया कि आप ﷺ के फ़रज़न्द
हुसैन عَلَيْهِ ٱلسَّلَامُ क़त्ल किये जाएंगे और अगर आप चाहें तो मैं
आप को उस ज़मीन की मिट्टी मुलाहज़ा कराऊं जहां वोह शहीद होंगे। फिर उस ने थोड़ी
सी सुर्ख मिट्टी पेश की। इस किस्म की हदीषे ब कषरत वारिद हैं, किसी में बारिश के
फ़िरिश्ते के ख़बर देने का तजकिरा है, किसी में उम्मे सलमा को ख़ाके करबला
तफ़्वीज़ करने और इस ख़ाक के खून हो जाने को अलामते शहादते इमाम करार देने का
तजकिरा है । जिस से मालूम होता है कि हुजूरे अक़दस ﷺ को इस शहादत की बार बार
इत्तिला दी गई और । हुजूर ﷺ ने भी बारहा इस का तजकिरा फ़रमाया और येह शहादत
हज़रते इमाम عَلَيْهِ ٱلسَّلَامُ के अहदे तुफूलिय्यत से खूब मशहूर हो
चुकी और सब को मालूम हो गया कि आप insan का मशहद करबला है।
.
हाकिम ने इब्ने
अब्बास رضي الله تالا أنه से रिवायत की, कि हम को कोई शक बाक़ी न रहा और अहले बैत
ब इत्तिफ़ाक़ जानते थे कि इमाम हुसैन رضي الله تالا أنه करबला में शहीद होंगे।
अबू
नुऐम ने नजी हज्रमी से रिवायत की, कि वोह सफ़रे सिफ्फ़ीन में हज़रते मौला अली
मुर्तज़ा رضي الله تالا أنه के हमराह थे, जब हम एक जगह के करीब पहुंचे जहां
हज़रते यूनुस عَلَيْهِ ٱلسَّلَامُ का मज़ारे अकदस है तो हज़रते अली
मुर्तजा رضي الله تالا أنه ने निदा की, कि ऐ अबू अब्दुल्लाह ! फुरात के कनारे
ठहरो। मैं ने अर्ज़ किया : किस लिये ? फ़रमाया : नबिय्ये करीम ﷺ ने फ़रमाया कि
जिब्रील ने मुझे खबर दी है कि इमामे हुसैन फुरात के किनारे शहीद किये
जाएंगे और मुझे वहां की एक मुश्त मिट्टी दिखाई।
अबू नुऐम ने अस्बग बिन
नबाता से रिवायत की, कि हम हज़रते मौला अली رضي الله تالا أنه के हमराह हज़रते
इमामे हुसैन رضي الله تالا أنه की क़ब्र के मकाम पर पहुंचे । हज़रते मौला अली رضي
الله تالا أنه ने बयान फ़रमाया : यहां उन शोहदा के ऊंट बंधेगे, यहां उन के कजावे
रखे जावेंगे, यहां उन के खून बहेंगे, जवानाने आले मुहम्मद ﷺ इस मैदान में
शहीद होंगे, आस्मान व जमीन उन पर रोएंगे।
इन खबरों से मालूम होता है कि अली
मुर्तजा और सहाबए किराम ज़मीने करबला के चप्पे चप्पे को पहचानते थे, उन्हें मालूम
था कहां ऊंट बांधे जाएंगे, कहां सामान रखा जाएगा, कहा खून बहेंगे। येह शहादत का
कमाल है ऐसा एलान आम हो, अपने पराए सब जान जाएं, मक़ाम बता दिया गया हो, वहां की
ख़ाक शीशियों में रख ली गई हो, उस के खून हो जाने का इन्तिज़ार हो और शौके शहादत
में कमी न आए, जज्बए जां निषारी रोज़ अफ्जूं होता रहे, तमाम चाहने वाले पहले से
बा ख़बर हों, हर दिल इस ज़ख्म का मज़ा ले और सब्रो इस्तिक्लाल के साथ जान अता
करने वाले की राह में जान कुरबान की जाए। येह मर्दाने कामिल और फ़रज़न्दाने
मुस्तफ़ा ﷺ का हिस्सा और इन्हीं का हौसला है।
.
पहाड़ भी होता तो
वहशत से घबरा उठता और ज़िन्दगी का एक एक लम्हा काटना मुश्किल हो जाता मगर तालिबे
रिज़ाए हक, मौला की मर्जी पर फ़िदा होता है, इसी में उस के दिल का चैन और उस की
हक़ीकी तसल्ली है, कभी वहशत, परेशानी उस के पास नहीं फटकती, कभी इस मुसीबते उजमा
से खलासी और रिहाई के लिये वोह दुआ नहीं करता, इन्तिज़ार की साअतें शौक़ के साथ
गुज़ारता है और वक्ते मवऊद का बेचैनी के साथ मुन्तज़िर रहता है।
शहादत के वाक़िआत
यजीद का मुख्तसर तजकिरा
यज़ीद बिन मुआविया अबू खालिद उमवी वोह बद नसीब शख्स है जिस की पेशानी पर अहले
बैते किराम के बे गुनाह क़त्ल का सियाह दाग है और जिस पर हर करन में दुन्याए
इस्लाम मलामत करती रही है और क़ियामत तक इस का नाम तहक़ीर के साथ लिया जाएगा। येह
बद बातिन, सियाह दिल, नंगे खानदान 25 हि. में अमीरे मुआविया के घर मैसून बिन्ते
बहदल कलबिया के पेट से पैदा हुवा । निहायत मोटा, बद नुमा, कषीरुश्शे'र, बद खुल्क,
तुन्द खू, फ़ासिक, फ़ाजिर, शराबी, बदकार, ज़ालिम, बे अदब, गुस्ताख़ था । इस की
शरारतें और बेहूदगियां ऐसी हैं जिन से बद मुआशों को भी शर्म आए।
अब्दुल्लाह बिन हन्ज़ला इब्नुल गसील (رضي الله تالا أنه ) ने फ़रमाया : खुदा
की कसम ! हम ने यज़ीद पर उस वक़्त खुरूज किया जब हमें अन्देशा हो गया कि उस की
बदकारियों केई सबब आसमन से पत्थर न बरसने लगें । (वाक़िदी) महरमात के साथ निकाह
और सूद वगै मुन्हिय्यात को इस बे दीन ने अलानिया रवाज दिया। मदीनए तय्यिबा व
मक्कए मुकर्रमा की बे हुरमती कराई। ऐसे शख्स की हुकूमत गुर्ग की चोपानी से
ज़ियादा खतरनाक थी, अरबाबे फ़िरासत और अस्हाबे अस्रार उस वक्त से डरते थे जब कि
इनाने सल्तनत इस शकी के हाथ में आई, 59 हि. में हज़रते अबू हुरैरा رضي الله تالا
أنه ने दुआ की : या रब्ब - मैं तुझ से पनाह मांगता हूं सि. 60 हि. के आगाज़
और लड़कों की हुकूमत से" इस दुआ से मालूम होता है कि हज़रते अबू हुरैरा رضي الله
تالا أنه जो हामिले अस्रार थे उन्हें मालूम था कि सि. 60 हि. का आगाज
लड़कों हैं की हुकूमत और फ़ितनों का वक्त है। उन की येह दुआ कबूल हुई और उन्हों
ने सि. 59 हि. में ब मुक़ाम मदीनए तय्यिबा रिहलत फ़रमाई।"
रूयानी ने
अपनी मुस्नद में हज़रते अबू दरदा सहाबी رضي الله تالا أنه से एक हदीष
रिवायत की है जिस का मज़मून येह है कि मैं ने हुजूरे अक़दस, नबिय्ये करीम ﷺ से
सुना कि हुजूर ने फ़रमाया कि “मेरी सुन्नत का पहला बदलने वाला बनी उमय्या
का एक शख्स होगा जिस का नाम यज़ीद होगा।"
अबू या'ला ने अपनी मुस्नद
में हज़रते अबू उबैदा رضي الله تالا أنه से रिवायत की, कि हुजूरे
पुरनूर सय्यिदे आलम ﷺ ने फ़रमाया कि “मेरी उम्मत में अदलो इन्साफ़ काइम रहेगा
यहां तक कि पहला रखना अन्दाज़ व बानिये सितम बनी उमय्या का एक शख्स होगा जिस का
नाम “यज़ीद" होगा।" येह हदीस ज़ईफ़ है।
.
ENGLISH
Mishap like accident
Bloody scene of Karbala on the ground
Sayyidush Shuhada Hazrat Imam Husain and Adimul Mishal Valery of Rufka of Inn
Viladte Mubaraka
Wiladat of Sayyidushhuda Hazrat Imam Hussain رضي الله الا ن 5 Sha'ban s.
4 h. was held in Madinah Munawwara. Huzoor Purnoor, Sayyid Alam, named you
Hussain and Shabbir and your Kunyat is Abu Abdullah and Lakb Sibte Rasulullah
and Raihantur Rasool and like your brother Muazzam, you have also been called
the chief of the heavenly soldiers and your son.
Huzoor Akdas, Nabiyye Akram had great love and affection with you.
Irshaad happened in Hadish Sharif:
ن ابن اس من ما د ومن ما د ابغضنی
"Who has given these two (Hazrat Imam Hassan and Imam Hussain
رضي الله الا نه) he loved me, and whoever met them, he loved me."
It
is the intention of saying "Sardar of Jannati Jawans" that one who
People
go to heaven in their youth. He is called a young man but only a boy, he is
not called a Sheikh and an old man. In the same way, futuvat and youthfulness
are also used to describe the words of a young man, wishing a person is old
but has courage and is masculine, he is called a young man in terms of his
strength and wealth. The age of Hazrat Imam Hussain رضي الله الا نه was more
than fifty years of age. But from the point of view of Shujaat and youth, you
were made young by the knowledge of Neez Shafqate Pidri, and it may be true
that except Ambiya, Kiram and Khulfay Rashideen, Immaine Jalilain is the chief
of all the first heaven because the young ones are all the better ones from
the heaven. This is because there will be no difference between old and young
in Paradise. There everyone will be young and everyone will have an age.
.
Huzoor
Sayyid Alam offered his flowers to these two sons. I have two flowers in that
world.
Huzoor Akdas Smells these two young people like flowers and
wrap them with Seena Mubarak.
Hazrat Ummul Fazl binte al Harish
Hazrat Abbas bin Abdul Muttalib رضي الله الا نه ki aunt of Huzoor Purnoor
Sayyid Alam appeared in the presence of Huzoor Anwar one day and prayed: I saw
ya Rasulullah Khazoorb today inquired: What? Requested: He is very shadid. He
did not have the courage to narrate that dream.
Huzoor asked for a
request and requested that I saw that a piece of Athar was cut and placed on
my lap. Irshad said: You have had a very good dream, Fatima will be the son of
Zahra (رضی اللہ نہ) and he will be given in your lap. That's how it happened.
Hazrat Imam Hussain رضي الله الا ن was born and given in the lap of Hazrat
Ummul Fazl.
Ummul Fazl narrates: One day I attended Huzoor Akdas
and placed Hazrat Imam Husain رضي الله الا ن in your lap, do I see that
streams of tears continue to flow from Chashme Mubarak. I prayed: Ya
Nabiyallah sacrifice on my parents Huzoor! What's up? Said: Jibril (alaihis
salaam) came to me and he gave the news that my Ummah will kill this person. I
said: what to this? Said : Yes and also brought to me the red soil of its
muktal.
.
Fame of martyrdom
The news of your martyrdom has become famous with the death of Hazrat
Imam Ali Maqam ن, in the ayyam of Sheer Khwaargi, Huzoor Akdas Nabiyyy Kareem
informed Ummul Fazl about your martyrdom, khatuna is your paradise. Naunihal
fed his bloody liver (milk) to shed blood in Karbala on the ground, Ali
Murtaza رضي الله الا نه licked his heart closed liver to return to Karbala and
die, Mustafa in Bayaban In order to cut dry light and to give life to manly
attack in Rahe Khuda, Imam Husain رضي الله الا نه blessed him with blessings.
Very much and what is the respect of the one who gets upbringing in this
lap.
The picture of that time is heart-wrenching, when the
news of martyrdom would have reached along with the death of this man
Arjumand, the spectacles of Sayyid Alam would have showered pearls of tears.
Shake, ask the heart of this pain Lajjat Ali Murtaza رضي الله الا نه,
performing the Sunnah Khalil in the examination of Sidko Safa. Hazrat
Khatune, the blueprint of paradise, sacrificed his life on Pak! Whose heart
piece is attached to the chest of the beloved Nazneen, looks at the effigy of
this noor with the eyes of love, that soul adores the soul of his sarwar,
Afreen Tabassum, creates a talum in the sea of love, mother By playing in
her lap, Shafqate enjoys more the spirit of Madri, captivates the heart with
sweet sweet eyes and sweet words, in such a condition the map of Karbala is
visible to your profession. Where Yeh Chahita, Nazo's nurtured, hungry
thirsty, martyred with mercy in Bayban, neither Ali Murtazal is with him nor
has he laughed Mujtaba, Azizo Aqarib Baradro Farzand has been sacrificed,
lonely he is Nazneen, Noori from the rain of arrows The body is bleeding, he
sees with his own eyes the helplessness of the people of the group, and is
manly in God. The land of Karbala is colored with Mustafa's flower, that
Shameem Pak who was dear to Habib Khuda, sows the perfume of Kufa's forest,
this map is turning in front of the eyes of the heavenly paradise and the
farzand is clinging to his chest. Hazrat Hazra Watch this scene.
.
It
is to be seen that this brother Arjumand's efforts are Kareem, Habibe is God,
Hazrat Haq Tabarak and Ta'ala have their Rizaju, their orders are Nafiz in
Bahrao Bar, Shajro Hajjar salam and Mutiye are decrees, the moon walks on
gestures. does, the setting sun turns over, Malaika in Badr becomes a Lashkari
and attends, Ilahi-ruled on the basis of Kaunain; In the sadak of the slaves,
the work of the Khalk is done, there is help, one gets the livelihood.
(Likely
Kanjul Iman: And surely it is near that your Lord will give you enough that
you will agree)
In spite of the news of his son Arjumand attaining
martyrdom, tears are released from Chashme Mubarak but Mustafa does not raise
his hand for prayer Do not pray for destruction, neither does Ali Murtaza pray
that Ya Rasulullah This news has made your heart and souls mercury mercury,
you sacrificed! In Bargahe Haq, offer prayers for your son. Neither Khatune
Paradise does the illusion that O Sultane Darain! Alam is Faizab from the Faiz
of you Om and your blessings are Mustajab. Offer prayers for this dear of
mine, neither ahle bait nor azwaje mutaharat na sahabye kiram everyone hears
the news of martyrdom, fame becomes common, but in Bargahe Risalaat, the
request for prayer is not presented from any side. The thing is that there is
a need to have a proven step in the makame examination, this is not mahle urjr
and taammul, at such a time, you are brave enough to die. Not the Shaiva of
men, Nishari is a desire to know from Ikhlas.
.
Prayers were
offered but that this Farzand Maqame should be a Sadiq Sabit in Safa and Wafa.
Tawfike Ilahi - May the Musa'id be there, the mass of Masaib and Amboh of Alam
could not reverse this step.
There are many reports of this
martyrdom in the Ahadees. Ibn Sa'ad and Tabarani narrated from Hazrat Ummul
Moa'min Aisha Siddiqa رضی اللہ نہ that Huzoor Anwar said: I was informed by
Jibreel that after me my brother Hussein رضي الله الا نه would be buried in me
and Jibreel When he brought earth to him, he asked that it was the blueprint
of the dream (maktal) of Husayn رضي الله الا نه. Taff near Kufa is the name of
the place which is called Karbala.
Imam Ahmad narrated that
Huzoor Aqdas - said that in my wealth Sarai Aqdas came that angel who had
never appeared before him, he requested that you 's Farzand Hussain
َلَيْهِ ٱلسَّلَامُ and if you are killed If you want, I can help you
with the soil of the land where he will be martyred. Then he offered a little
ruddy soil. This type of hadith is very wise, some have the tradition of
giving the news of the angel of rain, in some it is the practice of telling
Umm Salma to do Karbala Tafweez and calling the death of this Khak a martyr as
the Imam. From which it is known that Huzoor Aqdas Om was repeatedly informed
of this martyrdom. Huzur also recited this twelve times and this martyrdom
became very famous with the words of Hazrat Imam َلَيْهِ لسَّلَامُ
tufuliyyat and everyone came to know that you are the Mashhad of the human
being.
.
The Hakim narrated to Ibn Abbas رضي الله الا ن that we
had no doubts and knew by coincidence that Imam Hussain رضي الله الا نه would
be martyred in Karbala.
Abu Nuaim narrated from Naji Hajrmi,
that he was the companion of Hazrat Maula Ali Murtaza رضي الله الا نه in Safar
Siffin, when we came near a place where Hazrat Yunus َلَيْهِ ٱلسَّلا الا ر
الاي said, O Abu Abdullah! Stay on the edge of the fury. I applied: for
what? Said: Prophet Kareem said that Jibril has informed me that Imam Hussein
will be martyred on the banks of the Euphrates and showed me a lump of soil
there.
Abu Nuaim narrated to Asbag bin Nabata that we reached
the tomb of Imam Hussain رضي الله الا ن, the companion of Hazrat Maula Ali رضي
الله الا ن. Hazrat Maula Ali رضي الله الا ن said: Here the camels of those
proud will be tied, here their crows will be kept, here their blood will flow,
the young Ale Muhammad will be martyred in this field, heaven and earth will
weep over them.
.
It is known from these reports that Ali
Murtaza and Sahabe Kiram knew every corner of the land of Karbala, they knew
where the camels would be tied, where the goods would be kept, where the blood
would flow. This is the miracle of martyrdom, such a declaration should be
common, let all your strangers know, the place has been told, the dust there
has been kept in the vials, wait for it to bleed and there should not be any
decrease in the passionate martyrdom. May the blessings be on every day, May
all the loved ones know in advance, May every heart rejoice in this wound, and
let life be sacrificed in the way of the one who gives life with patience. Yeh
Mardane Kamil and Farzandane Mustafa are the part and encouragement of
them.
Even if there was a mountain, he would have been terrified
and it would have been difficult to pass every moment of his life, but Talebe
Rizae Haq is enamored of Maula's wishes, in this he has peace of his heart and
his real satisfaction, sometimes cruelty, trouble is there. He never fails to
come near, never prays for relief and release from this trouble Ujma, spends
the days of waiting with passion and waits with restlessness for the speaker
Mawud.
.
Due to martyrdom
Yazid's Mukhtsar Tajkira
Yazid bin Muawiyah Abu Khalid Umwi is a man of bad luck, whose face is
stained with the black color of the sinful murder of Ahle Baite Kiram and on
whom the world has been rebuking Islam in every moment and till the Day of
Judgment, his name will be taken with tahkir. Yeh bad talkin, dark heart, bare
family 25 h. In the house of Amir Muawiya, Maisoon binte Bahadal was born in
the womb of Kalbia. He was very fat, bad-natured, bitter, bad-blooded, sly,
phasic, fazir, drunken, wicked, cruel, dishonest, arrogant. His mischief and
folly are such that even the wicked should be ashamed.
.
Abdullah bin Hanzala Ibnul Ghasil (رضي الله الا نه ) said: O
God! We scoffed at Yazid when we feared that his misdeeds would not cause
stones to rain from the sky. (Waqidi) The marriage with Mehrmat and the grant
of interest and other benefits was given by this al-Din to Alaniya. Madinae
Tayyiba and Makkah Mukarrama's benediction was done. The rule of such a man
was more dangerous than that of Gurg's Chopani, Arbabe Farasat and Asabe Asrar
were afraid when the Inane Sultanate came into the hands of this Shaki, 59 H.
In I Hazrat Abu Huraira رضي الله الا ن he prayed: Ya Lord - I seek refuge from
you, sir. 60 h. It is known from this prayer that Hazrat Abu Hurairah رضي الله
الا نه , who was Hamil Asrar, knew that the beginning of C.60 is
the time for the rule of boys and the time of fits. Dua was accepted and he
granted tayyiba relief in the year 59.
Ruyani narrates a hadith
from Hazrat Abu Darda Sahabi رضي الله الا نه in his musnad, which
states that I heard from Huzoor Aqdas, Prophet Kareem that Huzoor said, "The
first convert of my Sunnah became There will be a man whose name will be
Yazid."
Abu Ya'la narrated in his musnad from Hazrat Abu Ubaidah
رضي الله الا ن, that Huzoor Puranur Sayyid Alam said that "In my Ummah there
will be justice and justice, until the first lay, the end and the bane, became
a person of sitam. Whose name will be "Yazid". This hadith is Zaif.
.
URDU
حادثے کی طرح حادثہ
زمین پر کربلا کا خونی منظر۔
سید الشہدا حضرت امام حسین اور روفکا آف ان کے عادل المشال والری
ولادت مبارک۔
ولایت الشہداء حضرت امام حسین رضی اللہ عنہ 5 شعبان س. 4 گھنٹے مدینہ
منورہ میں منعقد ہوا۔ حضرت پورنور ، سید عالم نے آپ کا نام حسین اور شبیر رکھا
اور آپ کی کنیت ابو عبداللہ اور لک سبط رسول اللہ اور رائےنطور رسول ہے اور آپ کے
بھائی معظم کی طرح آپ کو بھی آسمانی سپاہیوں کا سردار اور آپ کا بیٹا کہا گیا
ہے۔
حضرت اکادس ، نبیے اکرم کو آپ سے بہت محبت اور پیار تھا۔ حدیث شریف میں ارشاد ہوا:
ن ابن اس من ما دمن ما ابغضنی۔
"یہ دونوں کس نے دیئے ہیں (حضرت امام حسن اور امام حسین۔
اس نے مجھ سے محبت کی ، اور جو بھی ان سے ملا ، اس نے مجھ سے محبت کی۔
"
یہ "جنتی جوانوں کا سردار" کہنے کا ارادہ ہے کہ جو۔
لوگ اپنی جوانی میں جنت میں جاتے ہیں اسے نوجوان کہا جاتا ہے مگر صرف لڑکا ، اسے
شیخ اور بوڑھا نہیں کہا جاتا۔ اسی طرح ایک نوجوان کے الفاظ کو بیان کرنے کے لیے
فیوٹ اور جوانی بھی استعمال کی جاتی ہے ، خواہش کرنا کہ ایک شخص بوڑھا ہو لیکن
ہمت رکھتا ہو اور مردانہ ہو ، اسے اپنی طاقت اور دولت کے لحاظ سے جوان کہا جاتا
ہے۔ حضرت امام حسین رضی اللہ عنہ کی عمر پچاس سال سے زیادہ نہیں تھی۔ لیکن شجاعت
اور جوانی کے نقطہ نظر سے ، آپ کو نیز شفقت پڈری کے علم سے جوان بنایا گیا ، اور
یہ سچ ہو سکتا ہے کہ امبیا ، کرم اور خلفائے راشدین کے علاوہ ، امین جلیلین تمام
پہلے آسمان کی سردار ہیں کیونکہ نوجوان جنت سے سب بہتر ہیں یہ اس لیے ہے کہ جنت
میں بوڑھے اور جوان میں کوئی فرق نہیں ہوگا۔ وہاں ہر کوئی جوان ہوگا اور ہر ایک
کی عمر ہوگی۔
حضرت سید عالم نے ان دونوں بیٹوں کو پھول چڑھائے۔ میرے
پاس اس دنیا میں دو پھول ہیں۔
.
حضرت اکادس ان دونوں نوجوانوں کو
پھولوں کی طرح سونگھتے ہیں اور انہیں سینا مبارک سے لپیٹتے ہیں۔
حضرت
ام الفضل بنتے الحارث حضرت عباس بن عبدالمطلب رضی اللہ عنہ حضرت پورنور سید عالم
کی خالہ ایک دن حضرت انور کی موجودگی میں حاضر ہوئے اور دعا کی: میں نے آج رسول
اللہ خضور کو دیکھا تو پوچھا: کیا؟ درخواست کی گئی: وہ بہت گھٹیا ہے۔ اس کے پاس
اس خواب کو بیان کرنے کی ہمت نہیں تھی۔
حضرت نے ایک درخواست مانگی
اور درخواست کی کہ میں نے دیکھا کہ اطہر کا ایک ٹکڑا کاٹ کر میری گود میں رکھا
گیا ہے۔ ارشاد فرمایا: تم نے بہت اچھا خواب دیکھا ہے ، فاطمہ زہرا رضی اللہ عنہا
کا بیٹا ہو گا اور وہ تمہاری گود میں دیا جائے گا۔ ایسا ہی ہوا۔ حضرت امام حسین
رضی اللہ عنہ حضرت ام الفضل کی گود میں پیدا ہوئے اور عطا ہوئے۔
ام
الفضل بیان کرتے ہیں: ایک دن میں نے حجر اکادس میں حاضری دی اور حضرت امام حسین
رضی اللہ عنہ کو آپ کی گود میں رکھا ، کیا میں دیکھتا ہوں کہ چشم مبارک سے آنسوؤں
کی نہریں جاری ہیں۔ میں نے دعا کی: یا نبی اللہ میرے والدین پر قربان! کیا چل رہا
ہے؟ کہا: جبرائیل علیہ السلام میرے پاس آئے اور انہوں نے خبر دی کہ میری امت اس
شخص کو قتل کرے گی۔ میں نے کہا: اس کا کیا؟ کہا: ہاں اور اس کے مکتل کی سرخ مٹی
بھی میرے لیے لایا۔
.
شہادت کی شہرت
آپ کی شہادت کی خبر حضرت امام علی مقام کی وفات کے ساتھ مشہور ہوئی ہے ،
شیر خوارگی کی آیت میں ، حضرت اخداء نبی کریم نے ام الفضل کو آپ کی شہادت کے بارے
میں آگاہ کیا ، خاتون آپ کی جنت ہے نونہال نے اپنا خونی جگر (دودھ) بہانے کے لیے
کھلایا۔ زمین پر کربلا میں خون ، علی مرتضیٰ رضی اللہ عنہ نے اپنے دل بند جگر کو
نہ چاٹا کربلا واپس آنے اور مرنے کے لیے ، بیابان میں مصطفی خشک روشنی کو کاٹنے
کے لیے اور راھے خدا میں مردانہ حملے کو جان دینے کے لیے ، امام حسین رضی اللہ
عنہ اسے نعمتوں سے نوازا نہیں۔بہت زیادہ اور جو اس گود میں پرورش پاتا ہے اس کی
کیا عزت ہے۔
.
اس وقت کی تصویر دل دہلا دینے والی ہے ، جب اس آدمی ارجمند کی موت کے ساتھ
شہادت کی خبر پہنچتی تو سید عالم کے تماشے آنسوؤں کے موتیوں کی بارش کر دیتے۔ ہلا
، اس درد کے دل سے پوچھو لجات علی مرتضی رضی اللہ عنہ ، سدکو صفا کے امتحان میں
سنت خلیل کو انجام دیتے ہوئے۔ حضرت خاتون جنت کا بلیو پرنٹ ہے۔ جس کے دل کا ٹکڑا
محبوب نازنین کے سینے سے لگا ہوا ہو ، اس نور کا مجسمہ محبت کی آنکھوں سے دیکھے ،
وہ روح اپنے سرور کی روح کو پیار کرتی ہے ، آفرین تبسم ، محبت کے سمندر میں تال
پیدا کرتی ہے ، ماں اس کی گود میں کھیل کر ، شفقت مادری کی روح سے زیادہ لطف
اندوز ہوتا ہے ، میٹھی میٹھی آنکھوں اور میٹھے الفاظ سے دل کو موہ لیتا ہے ، ایسی
حالت میں کربلا کا نقشہ آپ کے پیشے کے لیے دکھائی دیتا ہے۔ جہاں یہ چہیتا ، نازو
کی پرورش ، بھوک پیاس ، بےبن میں رحمت کے ساتھ شہید کیا گیا ، نہ علی مرتضیٰ اس
کے ساتھ ہے اور نہ ہی مجتبیٰ کو ہنسا ہے ، عزیزو عقرب بردرو فرزند کو قربان کیا
گیا ہے ، تنہائی ہے وہ نازنین ہے ، نوری تیروں کی بارش سے جسم ہے خون بہہ رہا ہے
، وہ اپنی آنکھوں سے اس گروہ کے لوگوں کی بے بسی دیکھتا ہے ، اور خدا میں مردانہ
ہے۔ کربلا کی زمین مصطفی کے پھول سے رنگین ہے ، وہ شمیم پاک جو حبیب خدا کو
عزیز تھا ، کوفہ کے جنگل کی خوشبو بوتا ہے ، یہ نقشہ آسمانی جنت کی آنکھوں کے
سامنے گھوم رہا ہے اور فرزند اس کے سینے سے چمٹا ہوا ہے۔ حضرت ہزارہ یہ منظر
دیکھیں۔
دیکھنا یہ ہے کہ اس بھائی ارجمند کی کاوشیں کریم ہیں ، حبیب خدا ہیں ،
حضرت حق تبارک و طاعلہ کے اپنے رجوع ہیں ، ان کے احکامات بہراو بار میں نفاز ہیں
، شجرو حجر سلام اور مطیع فرمان ہیں ، چاند اشاروں پر چلتا ہے۔ کرتا ہے ، غروب
آفتاب غروب ہو جاتا ہے ، بدر میں ملائکہ لشکری بن جاتی ہے اور شرکت کرتی ہے ،
الٰہی نے کونین کی بنیاد پر حکمرانی کی ہے
(ممکنہ طور پر کنجول ایمان: اور یقینا it قریب ہے کہ آپ کا رب آپ کو اتنا
دے گا کہ آپ راضی ہو جائیں گے)
.
اپنے بیٹے ارجمند کی شہادت کی خبر کے باوجود ، چشم مبارک سے آنسو جاری
ہوتے ہیں لیکن مصطفیٰ دعا کے لیے ہاتھ نہیں اٹھاتے تباہی کی دعا نہیں کرتے ، نہ
علی مرتضیٰ دعا کرتے ہیں کہ یا رسول اللہ اس خبر نے آپ کے دل اور روح کو پارہ
پارہ کردیا ہے۔ پارا ، آپ نے قربان کیا! بارگاہ حق میں اپنے بیٹے کے لیے دعائیں
کریں۔ نہ کھاتون جنت یہ وہم کرتا ہے کہ اے سلطان دارین! عالم آپ کے اوم کے فیض سے
فیضیاب ہے اور آپ کی برکت مستجاب ہے۔ میرے اس عزیز کے لیے نماز پڑھیں ، نہ اہلی
بیت نہ ازواج مطہرات نہ صحابی کرم ہر کوئی شہادت کی خبر سنتا ہے ، شہرت عام ہو
جاتی ہے ، لیکن بارگاہ رسالت میں دعا کی درخواست کسی طرف سے پیش نہیں کی جاتی۔
بات یہ ہے کہ مکامے کے امتحان میں ایک ثابت قدم ہونے کی ضرورت ہے ، یہ محض عروج
اور تممل نہیں ہے ، ایسے وقت میں آپ بہادر ہیں کہ مر جائیں۔ مردوں کے شیوا نہیں ،
نشاری اخلاص سے جاننے کی خواہش ہے۔
نمازیں پڑھی گئیں لیکن یہ کہ یہ فرزند مقام صفا اور وفا میں صادق ثابت ہو۔
توفیق الٰہی - مسعود وہاں ہو ، مسیب اور امبوہ کا عالم اس قدم کو پلٹ نہ سکے۔
.
احادیث میں اس شہادت کی بہت سی اطلاعات ہیں۔ ابن سعد اور طبرانی نے حضرت
ام المؤمنین عائشہ صدیقہ رضی اللہ عنہا سے روایت کیا کہ حضرت انور نے کہا: مجھے
جبرائیل نے اطلاع دی کہ میرے بعد میرے بھائی حسین رضی اللہ عنہ مجھ میں دفن نہیں
ہوں گے اور جبریل زمین پر لائیں گے۔ اس نے پوچھا کہ یہ حسین رضی اللہ عنہ کے خواب
کا نقشہ ہے۔ کوفہ کے قریب طف اس جگہ کا نام ہے جسے کربلا کہا جاتا ہے۔
امام احمد نے بیان کیا کہ حُور اقدس - نے کہا کہ میرے مال میں سرائے اقدس
وہ فرشتہ آیا جو اس سے پہلے کبھی پیش نہیں ہوا تھا ، اس نے درخواست کی کہ آپ
فرزند حسین عَلَیْهِ ٱلسَّلَامُ اور اگر آپ کو قتل کیا جائے تو میں مٹی سے آپ کی
مدد کر سکتا ہوں۔ اس سرزمین کا جہاں وہ شہید ہوگا۔ پھر اس نے تھوڑی سی گندی مٹی
پیش کی۔ اس قسم کی حدیث بہت عقلمند ہے ، بعض کے ہاں بارش کے فرشتے کی خبر دینے کی
روایت ہے ، بعض میں ام سلمہ کو کربلا تفویز کرنے اور اس خاک کی موت کو امام کہنے
کا رواج ہے۔ جس سے معلوم ہوتا ہے کہ حضرت اقدس اوم کو بار بار اس شہادت کی اطلاع
دی گئی۔ حجر نے یہ بارہ بار بھی پڑھا اور یہ شہادت حضرت امام َلَ عَلَيْهِ
لسَّلَامُ توفلیات کے کلام سے بہت مشہور ہوئی اور سب کو معلوم ہوا کہ آپ انسان کے
مشہد ہیں۔
.
حکیم نے ابن عباس رضی اللہ عنہ سے روایت کیا کہ ہمیں کوئی شک نہیں تھا اور
اتفاق سے جانتے تھے کہ امام حسین رضی اللہ عنہ کربلا میں شہید نہیں ہوں گے۔
ابو نعیم ناجی Hajrmi سے روایت ہے، وہ حضرت مولا علی مرتضی کا ساتھی تھا
کہ رضي الله صفر صفین میں الا نه، ہم ایک ایسی جگہ ہے جہاں حضرت یونس ليه ٱلسلا
الا ر الاي کہا، اے ابو عبداللہ قریب آیا تو! قہر کے کنارے پر رہیں۔ میں نے
درخواست دی: کس کے لیے؟ کہا: نبی کریم نے کہا کہ جبرئیل نے مجھے اطلاع دی ہے کہ
امام حسین فرات کے کنارے شہید ہوں گے اور مجھے وہاں مٹی کا ایک ٹکڑا دکھایا۔
ابو نعیم نے اسباگ بن نبطا سے روایت کیا کہ ہم حضرت مولا علی رضی اللہ عنہ کے
ساتھی امام حسین رضی اللہ عنہ کی قبر پر پہنچے۔ حضرت مولا علی رضی اللہ عنہ نے
کہا: یہاں فخر کرنے والوں کے اونٹ بندھے جائیں گے ، یہاں ان کے کوے رکھے جائیں گے
، یہاں ان کا خون بہتا رہے گا ، نوجوان علی محمد اس میدان میں شہید ہوں گے ،
آسمان اور زمین ان پر روئے گی .
ان اطلاعات سے معلوم ہوا کہ علی
مرتضیٰ اور صحابی کرم سرزمین کربلا کے ہر کونے کو جانتے تھے ، وہ جانتے تھے کہ
اونٹ کہاں باندھے جائیں گے ، سامان کہاں رکھا جائے گا ، خون کہاں بہتا ہے۔ یہ
شہادت کا معجزہ ہے ، ایسا اعلان عام ہونا چاہیے ، اپنے تمام اجنبیوں کو بتائیں ،
جگہ بتائی گئی ہے ، وہاں کی مٹی شیشیوں میں رکھی گئی ہے ، اس کے خون نکلنے کا
انتظار کریں اور اس میں کوئی کمی نہیں ہونی چاہیے پرجوش شہادت۔ ہر روز برکتیں ہوں
، تمام چاہنے والے پہلے سے جان لیں ، اس زخم پر ہر دل خوش ہو ، اور صبر کے ساتھ
زندگی دینے والے کی راہ میں زندگی قربان ہو جائے۔ یہ مردانے کامل اور فرزندان
مصطفی ان کا حصہ اور حوصلہ افزائی ہیں۔
یہاں تک کہ اگر کوئی پہاڑ
ہوتا تو وہ گھبرا جاتا اور اس کی زندگی کا ہر لمحہ گزرنا مشکل ہو جاتا ، لیکن
طالب رضاعیٰ مولا کی خواہشات کا دلدادہ ہے ، اس میں اس کے دل کا سکون اور اس کا
حقیقی اطمینان ہے ، کبھی کبھی ظلم ، مصیبت ہے وہ کبھی قریب آنے میں ناکام نہیں
ہوتا ، کبھی عافیت کی دعا نہیں کرتا اور اس مصیبت سے چھٹکارا پاتا ہے ، جذبات کے
ساتھ انتظار کے دن گزارتا ہے اور اسپیکر موعود کے لیے بے چینی سے انتظار کرتا ہے۔
.شہادت کی وجہ سے
یزید کا مختار تاجکیرہ۔
یزید بن معاویہ ابو خالد اموی بد نصیب آدمی ہے ، جس کا چہرہ اہل بیت کرم
کے گناہ گار قتل کے سیاہ رنگ سے داغ دار ہے اور جس پر دنیا ہر لمحہ اسلام کو ڈانٹ
رہی ہے اور قیامت تک اس کا نام تحاکر کے ساتھ لیا جائے گا۔ یہ بری باتیں ، سیاہ
دل ، ننگے خاندان 25 گھنٹے امیر معاویہ کے گھر میں میسون بنتے بہدل کالبیا کے بطن
سے پیدا ہوئے۔ وہ بہت موٹا ، بد مزاج ، کڑوا ، بد مزاج ، چالاک ، فاسک ، فاذر ،
شرابی ، شریر ، ظالم ، بے ایمان ، متکبر تھا۔ اس کی شرارت اور حماقت ایسی ہے کہ
شریر کو بھی شرم آنی چاہیے۔
عبداللہ بن حنظلہ ابن الغسل (رضی اللہ عنہ) نے کہا: اے خدا! ہم نے
یزید کا مذاق اڑایا جب ہمیں خدشہ تھا کہ اس کی شرارتیں آسمان سے پتھروں کی بارش
نہ کر دیں۔ (واقدی) مہرامات کے ساتھ شادی اور سود اور برکتوں کا عطیہ اس بے دین
نے الانیا کو دیا۔ مدینہ طیبہ اور مکہ مکرمہ کی برکت ہوئی۔ ایسے آدمی کی حکمرانی
گرگ کی چوپانی سے زیادہ خطرناک تھی ، اربابے فراسات اور اسابے اسرار اس وقت
خوفزدہ تھے جب انین سلطانی اس شکی کے ہاتھ میں آئی ، 59 ایچ۔ میں حضرت ابوہریرہ
رضی اللہ عنہ میں انہوں نے دعا کی: یا رب - میں آپ سے پناہ مانگتا ہوں جناب۔ 60
گھنٹے اس دعا سے معلوم ہوا کہ حضرت ابوہریرہ رضی اللہ عنہ ، جو کہ حمل اسرار تھے
، جانتے تھے کہ C.60 کا آغاز لڑکوں کی حکمرانی کا وقت ہے اور فٹ ہونے کا وقت ہے۔
دعا قبول ہوئی اور انہوں نے کہا 59 ایچ۔
روئانی نے اپنے مسند میں
حضرت ابو درداصحابی رضی اللہ عنہ سے ایک حدیث بیان کی ہے ، جس میں بتایا گیا ہے
کہ میں نے حضرت اقدس نبی کریم heard سے سنا ہے کہ حضرت نے کہا کہ میری سنت کا
پہلا کنورٹ ایک آدمی ہوگا جس کا نام ہوگا۔ یزید۔ "
ابو یعلہ نے اپنی مسند
میں حضرت ابو عبیدہ رضی اللہ عنہ سے روایت کی ہے کہ حضرت پورانور سید عالم نے
فرمایا کہ "میری امت میں عدل و انصاف ہوگا ، یہاں تک کہ جب پہلی بچی ، اندہ اور
بنیے ، سیتم کے فرد بن گئے۔ . "جس کا نام" یزید "ہوگا. یہ حدیث ضعیف ہے۔
.
ARBIC
حادث مثل الحادث
مشهد دموي لكربلاء على
الارض
سيدش شهداء حضرة الإمام الحسين وأديمول مشعل فاليري من روفكا إن
ولاية مباركة
.
ولاية سيدشهدى حضرة الإمام الحسين رضي الله الا ن 5 شعبان. 4 ساعات
الذي عقد في مديناي المناورة. حزور بورنور ، سيد علم ، سمّاك حسين وشبير وكونياتك
هي أبو عبد الله ولقب سبت رسول الله وريهانتور رسول ومثل أخيك معظم ، لقد دُعيت
أيضًا قائد الجنود السماويين وابنك.
هوزور أكداس ، نبية أكرم كان لها حب وحنان كبيران معك. حدث ارشاد في
حديث شريف:
ن ابن اس من ما د ومن ما د ابغضنی
"من أعطى هذين (حضرة الإمام الحسن والإمام الحسين
رضي الله الا نه) أحبني ومن التقى بهم أحبني ".
وهي نية قول "سردار جنتي جوانس" ذلك الذي
يذهب الناس إلى
الجنة في صغرهم ، ويطلق عليه اسم شاب ولكن صبي فقط ، لا يُدعى شيخًا وشيخًا.
وبنفس الطريقة تستخدم الفتوحات والنضارة أيضًا لوصف كلام الشاب ، الذي يتمنى أن
يكون الإنسان عجوزًا ولكن لديه شجاعة ورجولية ، ويطلق عليه اسم الشاب من حيث قوته
وثروته. كان عمر حضرة الامام الحسين رضي الله نه اكثر من خمسين عاما. لكن من وجهة
نظر الشجاعات والشباب ، فقد صغرت بمعرفة نزهة شفقت بيدري ، وقد يكون صحيحًا أنه
باستثناء أمبيا وكيرام وخلفي راشدين ، فإن إمين جليلين هو رئيس كل الجنة الأولى
لأن الشباب كلهم خير من السماء ، وذلك لأنه لا فرق بين الكبار والصغار في الجنة.
هناك سيكون الجميع صغارًا وسيكون لكل فرد عمر.
هزور سيد علم
قدم أزهاره لهذين ولديه. لدي زهرتان في هذا العالم.
حُزور
أكداس تشتم هذين الشابين كالزهور وتلفهما بسينا مبارك.
حضرة أم
الفضل بنت الحريش حضرة عباس بن عبد المطلب رضي الله نه كي عمة حزور بورنور سيد
علم ظهرت في حضور حزور أنور ذات يوم وصليت: رأيت يا رسول الله خزورب اليوم
واستفسر: ماذا؟ مطلوب: إنه مظلل للغاية. لم يكن لديه الشجاعة لرواية هذا
الحلم.
طلبت حزور طلبًا وطلبت أن أرى قطعة أثر مقطوعة ووضعت في
حضني. قال إرشاد: لقد حلمت بحلم جيد جداً ، فاطمة ستكون ابن الزهراء (رضی اللہ
نہ) وسيُعطى في حضنك. هكذا حدث الأمر. ولد حضرة الإمام الحسين رضي الله الا ن
وأعطي في حضن حضرة أم الفضل.
تروي أم الفضل: ذات يوم حضرت حزور
أكداس ووضعت حضرة الإمام الحسين رضي الله الا ن في حضنك ، هل أرى تيارات الدموع
تتدفق من جاشمي مبارك. صليت: يا نبي الله أضحي على والديّ حزور! ما أخبارك؟ قال:
جاءني جبريل (عليه السلام) وأخبرني أن أمتي ستقتل هذا الرجل. قلت: ما هذا؟ قَالَ:
أَجْلَتِي أَيْضًا تَرْبَةَ مَكْتَلِهِ الْحَمْرَ.
.
شهرة الاستشهاد
اشتهر خبر استشهادك بوفاة الإمام علي مقام ن ، في أيام شير خوارجي ،
أبلغت حُزور أكداس نبي كريم أم الفضل عن استشهادك ، خاتون هي جنتك نونيهال تغذي
كبده الدموي (الحليب) ليذرف. دم في كربلاء على الارض ، علي مرتضى رضي الله الا نه
يلعق قلبه يغلق الكبد ليعود الى كربلاء ويموت ، مصطفى في بيابان لكي يقطع الضوء
الجاف ويعطي الحياة للرجولة الهجوم في راحي خدي الامام الحسين رضي الله الا نهه
بركاته كثيرا جدا و ما هو احترام من نشأ في هذه الحضن.
صورة ذلك الزمان توجع القلب ، عندما كان سيصل خبر الاستشهاد مع وفاة
هذا الرجل أرجومند ، كانت نظرات سيد علم تنهمر دموعًا من اللؤلؤ. اهتز ، واسأل
القلب عن هذا الألم لاجات علي مرتضى رضي الله الا نه يؤدي سنن خليل في امتحان
سيدكو صفا. حضرة خاتون هو مخطط الجنة. التي تعلقت قطعة قلبها بصدر الحبيبة نظنين
، تنظر إلى دمية هذا النور بعيون الحب ، تلك الروح تعشق روح سروار ، أفرين تبسم ،
تخلق تالومًا في بحر الحب ، يا أمي من خلال اللعب في حجرها ، تتمتع شفقت بروح
مادري ، وتأسر القلب بعيون حلوة وكلمات حلوة ، وفي مثل هذه الحالة تكون خريطة
كربلاء مرئية لمهنتك. حيث يحي شهيتة ، نازو المغذي ، الجائع العطش ، استشهد برحمة
في بيبان ، لا علي مرتضى معه ولا ضحك مجتبى ، تم التضحية عزيزو عقارب بردرو فرزند
، وحيد هو نازنين ، نوري من مطر السهام الجسد هو ينزف ، يرى بأم عينيه عجز أهل
الجماعة ، وهو رجولي في الله. أرض كربلاء ملوّنة بزهرة مصطفى ، التي كانت شميم
باك عزيزة على حبيب خودة ، تزرع عطر غابة الكوفة ، هذه الخريطة تتقلب أمام أعين
الجنة السماوية والفرزند يتشبث بصدره. حضرة حضرة مشاهدة هذا المشهد.
من الواضح أن جهود هذا الأخ أرجوماند هي كريم ، حبيبة هو الله ،
حضرة حق تبارك وتعلاء لديهم ريزاجو ، أوامرهم هي نافيز في باهرا بار ، وشاجرو
حجار سلام ، والمطيّة هي مراسيم ، والقمر يمشي على إيماءات. هل ، تنقلب الشمس ،
تصبح مليكة في بدر لاشكاري وتحضر ، يحكم الله على أساس كاونين ؛ في صداق العبيد ،
يتم عمل الخلق ، هناك مساعدة ، يحصل المرء على الرزق.
(على الأرجح كانجول إيمان: ومن المؤكد أنه قريب من أن يمنحك ربك ما
يكفيك لتوافق)
.
على الرغم من خبر نجله أرجوم واستشهاده تنطلق الدموع من جاشمي مبارك
ولكن مصطفى لا يرفع يده للصلاة ولا تصلي للدمار ولا علي مرتضى يدعو يا رسول الله
هذا الخبر جعل قلبك وأرواحك زئبق. الزئبق ، ضحيت! صلِّي على ابنك في برجاهي حق.
ولا خاتونة جنة الوهم أن يا سلطان دارين! العالم فايزاب من فايزك ام و بركاتك
مستجيب. قدم الصلاة لهذا عزيزي ، لا أهل بيت ولا أزواج متهارات في صحابة كرام ،
يسمع الجميع خبر الاستشهاد ، وتنتشر الشهرة ، ولكن في برجي رسالات ، طلب الصلاة
غير مطروح من أي جهة. والشيء أن هناك حاجة لخطوة مثبتة في الفحص المكامي ، فهذا
ليس ماهل أجر وتأمل ، في مثل هذا الوقت ، فأنت شجاع بما يكفي للموت. ليست شيفا من
الرجال ، نيشاري رغبة في المعرفة من إخلاص.
صليت الصلاة ولكن هذا المقامي الفرزند يجب أن يكون صادق ثابت في
الصفا والوفاء. توفيق إلهي - أتمنى أن يكون المساعد هناك ، لم تستطع كتلة المصائب
وأمبوه العلم عكس هذه الخطوة.
وردت أنباء كثيرة عن هذا الاستشهاد في الأحاديين. روى ابن سعد
والطبراني عن حضرة أم المؤمن عائشة صدیقة رضی ل نہ أن حزور أنور قالت: علمت من
جبريل أن من بعدي أخي حسين رضي الله نه سيُدفن فيّ وجبريل عندما أتى بالأرض إلى
طلب منه أن يكون مخطط حلم (مكتل) حسين رضي الله الا نه. تاف قرب الكوفة هو اسم
المكان الذي يسمى كربلاء.
.
وروى الإمام أحمد أن حزور أقداس - قالت إن في ثروتي جاء سراي الأقدس
ذلك الملاك الذي لم يظهر قبله من قبل ، وطلب منك فرزند حسين َلَيْهِ ٱلسَّلَامُ
وإذا كنت تريد ، يمكنني مساعدتك في التراب. من الأرض التي سوف يستشهد فيها. ثم
قدم القليل من التربة الحمراء. هذا النوع من الحديث حكيم جدا ، والبعض لديه تقليد
إعطاء أخبار ملاك المطر ، وفي بعض الأحيان هو ممارسة إخبار أم سلمى بعمل كربلاء
التفويز وتسمية موت هذا الكاك بالإمام. ومن المعروف أن حُزور أقدس أم أبلغت
مرارًا بهذا الاستشهاد. كما تلاها حزر اثنتي عشرة مرة وأصبح هذا الاستشهاد
مشهورًا جدًا بكلمات حضرة الإمام َلَيْهِ لسَّلَامُ توفولييات ، وعرف الجميع أنك
مشهد الإنسان.
وروى الحكيم لابن عباس رضي الله الا ن أنه ليس لدينا شك وعرفنا
بالصدفة أن الإمام الحسين رضي الله نه سيستشهد في كربلاء.
رواه أبو النعيم من ناجي Hajrmi، أنه كان رفيق حضرة مولى علي مرتضى
رضي الله الا نه في صفر صفين، عندما وصلنا بالقرب من مكان ليه ٱلسلا الا ر الاي
قال حضرة يونس، يا أبا عبد الله! ابق على حافة الغضب. تقدمت بطلب: من أجل ماذا؟
قال: قال النبي كريم إن جبريل أبلغني أن الإمام الحسين سيستشهد على ضفاف الفرات
وأراني قطعة من التراب هناك.
وروى أبو نعيم لأسباغ بن نبطه
أننا وصلنا إلى قبر الإمام الحسين رضي الله الا ن رفيق حضرة مولا علي رضي الله
الا ن. قال حضرة مولا علي رضي الله الا ن: هنا تقيد جمال المستكبرين ، وهنا تحفظ
غربانهم ، وهنا تسيل دمائهم ، ويستشهد الشاب العلي محمد في هذا الحقل ، وتبكي
عليهم السماء والأرض. .
ومعلوم من هذه الروايات أن علي مرتضى
وصحاب كرام كانا يعرفان كل ركن من أركان أرض كربلاء ، وكانا يعرفان أين سيتم
تقييد الجمال ، وأين ستُحفظ البضائع ، وأين ستجرى الدم. هذه هي معجزة الاستشهاد ،
مثل هذا الإعلان يجب أن يكون شائعا ، ليعلم كل غرباءك ، قيل المكان ، الغبار هناك
محفوظ في القوارير ، انتظر حتى ينزف ولا ينبغي أن يكون هناك أي نقص في استشهاد
عاطفي ، عسى أن تكون البركات في كل يوم ، عسى أن يعرف كل الأحبة مسبقًا ، ليبتهج
كل قلب بهذا الجرح ، وليضحي بالحياة في سبيل من يعطي الحياة بصبر. يه مردان كامل
وفرزندان مصطفى جانبهما والتشجيع.
حتى لو كان هناك جبل لكان
مرعوبًا وكان من الصعب أن يمر كل لحظة من حياته ، لكن طالب رضا حق مغرم برغبات
مولا ، في هذا لديه سلام قلبه ورضاه الحقيقي ، أحيانًا القسوة ، المتاعب موجودة ،
فهو لا يتوانى عن الاقتراب ، ولا يصلي أبدًا من أجل الراحة والخروج من هذه الضيق
Ujma ، ويقضي أيام الانتظار بشغف وينتظر بقلق للمتكلم موود.
.بسبب الاستشهاد
يزيد مختصار طاجكيرا
يزيد بن معاوية أبو خالد أموي رجل سيئ الحظ وجهه ملطخ باللون الأسود
من جريمة قتل أهل بيت كرام الآثمة والتي ظل العالم يوبخ عليها الإسلام في كل لحظة
وحتى يوم القيامة اسمه. سيؤخذ مع التذكر. نعم الكلام السيئ ، القلب الأسود ،
الأسرة العارية 25 ساعة. في منزل أمير معاوية ولدت ميسون بنت بهادال في رحم
كلبيا. كان سمينا جدا ، سيء الطبيعة ، مر ، سيئ الدم ، ماكر ، طوري ، فزير ،
سكران ، شرير ، قاس ، غير أمين ، متعجرف. إن أذيته وحماقته من هذا القبيل حتى
الأشرار يجب أن يخجلوا.
قال عبدالله بن حنظلة بن الغسيل (رضي الله الا نه): يا الله!
استهزأنا بـ يزيد عندما خشينا ألا تتسبب آثامه في تساقط الحجارة من السماء.
(وقدي) كان الزواج من مهرامات ومنح الفوائد والبركات من هذا باي دين إلى العانية.
تمت نعمة المدينة الطيبة ومكة المكرمة. كان حكم مثل هذا الرجل أكثر خطورة من حكم
تشوباني قورغ وأرباب فراسات وعصبي أسرار عندما أصبحت السلطنة في يد شاكي 59 هـ.
في حضرة أبو هريرة رضي الله الا ن صلى: يا رب - أعوذ منك يا سيدي. 60 ساعة ومعلوم
من هذه الصلاة أن حضرة أبو هريرة رضي الله نهه ، وهو هامل أسرار ، علم أن بداية
سي 60 هي وقت حكم الصبيان ووقت الملاءمة ، فقبل دعاء وقال في 59 هـ.
يروي روياني حديثاً عن حضرة أبو الدرداء الصحابي رضي الله نهه في مسنده ،
والذي جاء فيه أنني سمعت من حُزور أقدس ، النبي كريم ، أن حُزور قال: "صار أول من
اعتنق سنتي ، سيكون هناك رجل يكون اسمه. يزيد ".
وروى أبو يعلا في
مسنده عن حضرة أبي عبيدة رضي الله نهه ، أن هوزور بورانور سيد علم قال: "في أمتي
عدل وعدالة ، حتى لو صار أول رقاد ، أندا وبني ، من سطام. "الذي سيكون اسمه
يزيد". هذا الحديث هو زيف.
.
0 टिप्पणियाँ