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इल्मे दीन की फजीलत और इल्मे दीन सिखने व सिखाने के फायदे

इल्मे दीन की फजीलत 

 (1) अज़ीम नेमत 

अल्लाह जिस के साथ भलाई का इरादा फ़रमाता है उसे दीन की समझ बूझ अता फ़रमाता है। 
صحیح بخاری ج ۱ ص 43 حديث ۷۱)

(2)गुनाहों की मुआफ़ी 

जो बन्दा इल्म की जुस्त-जू में जूते, मोजे या कपड़े पहनता है तो अपने घर की चौखट से निकलते ही उस के गुनाह मुआफ़ कर दिये जाते हैं। 

इल्मे दीन की फजीलत


 (3) लौटने तक राहे ख़ुदा में 

जो इल्म की तलाश में निकलता है वोह वापस लौटने तक अल्लाह की राह में होता है। 
(طبرانی اوسط ، باب الميم ، الحدیث ۵۷۲۲، ج 4 ص ۲۰4) (جامع ترمذی، کتاب العلم ، الحديث : ۲۹۵، ج 4، ص ۲۹۶) 


 (4) राहे इल्म में इन्तिकाल करने वाला शहीद है

 इल्म का एक बाब जिसे आदमी सीखता है मेरे नज़दीक हज़ार रक्अत नफ़्ल पढ़ने से ज़ियादा पसन्दीदा है और जब किसी तालिबुल इल्म को इल्म हासिल करते हुए मौत आ जाए तो वोह शहीद है। 


 (5) अच्छी निय्यत से सीखना सिखाना 

जो मेरी इस मस्जिद में सिर्फ भलाई की बात सीखने या सिखाने के लिये आया तो वोह अल्लाह की राह में जिहाद करने वाले की तरह है और जो किसी और निय्यत से आया तो वोह गैर के माल पर नज़र रखने वाले की तरह है।


 


 (6) अच्छी तरह याद कर के सिखाने की फजीलत 

जो कोई अल्लाह के फ़राइज़ से मु-तअल्लिक एक या दो या तीन या चार या पांच कलिमात सीखे और उसे अच्छी तरह याद कर ले और फिर लोगों को सिखाए तो वोह जन्नत में ज़रूर दाखिल होगा । 
 हज़रते सय्यिदुना अबू हुरैरा फ़रमाते हैं : "मैं रसूलुल्लाह ﷺ से येह बात सुनने के बाद कोई हदीस नहीं भूला।"
 الترغيب والترهيب، كتاب العلم ، الترغيب في العلم الخ، رقم ۲۰، ج ۱، ص 54)


(7) हज़ार रक्अतों से बेहतर अमल 

तुम्हारा किसी को किताबुल्लाह की एक आयत सिखाने के लिये जाना तुम्हारे लिये सो रक्अतें अदा करने से बेहतर है और तुम्हारा किसी को इल्म का एक बाब सिखाने के लिये जाना ख्वाह उस पर अमल किया जाए या न किया जाए तुम्हारे लिये हज़ार रक्अतें अदा करने से बेहतर है। (سنن ابن ماجه ، کتاب السنة، الحديث ۲۱۹، ج ۱، ص ۱۹۲)

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