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मुहर्रम के पहले अशरे (10 दिनों) और आशूरा की अज़मत - 10 Muharram Ki Fazilat in Hindi

 मुहर्रम के पहले अशरे की अज़मत

हज़रते सय्यदुना अबू उस्मान नहदी "رحمة الله عليه" फ़रमाते हैं :

सहाबए किराम तीन अशरों (10 days) की ताज़ीम किया करते थे : 

  • रमजानुल मुबारक का आखिरी अशरा 
  • जुल हिज्जतिल हराम का पहला अशरा 
  • मुहर्रमुल हराम का पहला अशरा 

यौमे आशूरा

प्यारे प्यारे इस्लामी भाइयो! इस मुबारक माह में 10 मुहर्रमुल हराम को खुसूसी अहम्मिय्यत हासिल है, इसे यौमे आशूरा के नाम से जाना जाता है। 10 मुहर्रमुल हराम को आशूरा कहने की एक वजह येह भी है कि इस दिन अल्लाह पाक ने 10 अम्बियाए किराम को एज़ाज़ो इक्राम से नवाजा।

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यौमे आशूरा की मुबारक निस्बतें

यौमे आशूरा को अम्बियाए किराम से खुसूसी निस्बत हासिल है: .

  1. यौमे आशूरा को हज़रते सय्यिदुना मूसा कलीमुल्लाह عليه السلام‎ की मदद की गई और फ़िरऔन और उस के पैरौकार (Followers) इस में हलाक हुए। 
  2. हज़रते सव्यिदुना नूह नजिय्युल्लाह عليه السلام‎ की कश्ती "जूदी पहाड़" पर ठहरी ।
  3. हज़रते सय्यदुना यूनुस عليه السلام‎ को मछली के पेट से नजात मिली । 
  4. हज़रते सय्यदुना आदम सफ़िय्युल्लाह عليه السلام‎ की कबूलिय्यते तौबा का दिन है । 
  5. हज़रते सय्यिदुना यूसुफ़ عليه السلام‎ कूंएं से निकाले गए। 
  6. इसी दिन हज़रते सय्यदुना ईसा रूल्लाह عليه السلام‎ की विलादत हुई और इसी दिन आप को आस्मान पर उठाया गया।
  7. आशूरा के दिन ही हज़रते सय्यिदुना दावूद عليه السلام‎ की तौबा क़बूल हुई । 
  8. हज़रते सय्यदुना इब्राहीम खलीलुल्लाह عليه السلام‎ की इसी दिन विलादत हुई । 
  9. हज़रते सय्यदुना याकूब عليه السلام‎ की बीनाई की कमज़ोरी इसी दिन दूर हुई।
  10. हज़रते सय्यिदुना इदरीस عليه السلام‎ की को आस्मान पर उठाया गया ।
  11. इसी रोज़ अल्लाह पाक ने हज़रते सय्यदुना अय्यूब عليه السلام‎ आज़माइश दूर फ़रमाई । 
  12. यौमे आशूरा को ही हज़रते सव्यिदुना सुलैमान عليه السلام‎ को बादशाहत अता हुई। .

ईद का दिन

येह दिन बनी इसराईल की ईद का दिन था । रिवायत है कि

आशूरा के दिन हज़रते सय्यिदुना मूसा कलीमुल्लाह عليه السلام‎ कत्तान के कपड़े पहनते और इस्मिद सुरमा लगाया करते थे।

अह्दे रिसालत और यौमे आशूरा

  • ज़मानए जाहिलिय्यत में कुरैश यौमे आशूरा का रोज़ा रखते थे।, नबिय्ये करीम ﷺ भी इस दिन का रोज़ा रखते थे और इसी दिन काबतुल्लाह शरीफ़ का गिलाफ़ तब्दील किया जाता। 
  • ख़ैबर और मदीनए मुनव्वरह में यहूदियों की बहुत बड़ी तादाद आबाद थी, चूंकि इन का तअल्लुक़ बनी इसराईल से था और बनी इसराईल ने यौमे आशूरा ही को फ़िरऔन से नजात पाई थी लिहाज़ा इस दिन को बतौरे ईद मनाया करते और रोज़ा रखा करते । 
  • जब नबिय्ये अकरम ﷺ मदीनए पाक तशरीफ़ लाए तो आप ने देखा कि यहूदी भी आशूरा के दिन रोज़ा रखते हैं, आप ﷺ ने पूछा : आज के दिन रोज़ा क्यूं रखते हो? यहूदियों ने अर्ज़ की : येह अज़मत वाला दिन है, येह वोह दिन है जिस में अल्लाह पाक ने बनी इसराईल और हज़रते मूसा عليه السلام‎ को ( उन के दुश्मन फ़िरऔन से) नजात दी तो हुज़रते सय्यिदुना मूसा अलैहिस्सलाम ने शुक्राने में इस दिन का रोज़ा रखा था और हम भी इस दिन का रोज़ा रखते हैं । रसूले करीम ﷺ ने इर्शाद फ़रमाया : "हम मूसा अलैहिस्सलाम के तुम से ज़ियादा हक़दार हैं।” चुनान्चे आप ﷺ ने उस दिन रोज़ा रखा और लोगों को रोज़ा रखने का हुक्म इर्शाद फ़रमाया । 

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