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हज़रत अली असग़र की शहादत का वाकिया - Hazrat Ali Asghar ki Sahadat - Islamic Creation

शहादत हज़रत अली असग़र

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Hazrat Ali Asghar Ki Sahadat

इमामे आली मक़ाम के छोटे फर्ज़न्द हज़रत अली असग़र जो अभी बहुत कम उम्र और शीर ख़्वार हैं, प्यास से बेचैन हैं, तिश्नगी की शिद्दत तड़प रहे हैं, भूकी प्यासी मां के सीने में दूध खुश्क हो चुका है, खेमा में पानी का एक क़तरा नहीं है, छोटा बच्चा सूखी जुबान बाहर निकालता है, बेचैनी में हाथ पांव मारता है और पेचो - ताब खा कर रह जाता है, मां से बच्चे की यह हालत देखी न गई, गोद में लिये इमामे आली मक़ाम की खिदमत में हाज़िर हुईं और अर्ज़ किया मेरे सरताज ! अब अली असग़र की प्यास देखी नहीं जाती, इस नन्ही सी जान की बेचैनी कुव्वते बर्दाश्त से बाहर है, इस के रोने और तड़पने से कलेजा पाश- पाश हुआ जा रहा है, आप इसको गोद में लेकर जाइये और जालिमों को दिखाइये, शायद उन संगदिलों को इस बच्चे की प्यास पर तरस आ जाएं और पानी के चन्द घूंट इस को पिला दें ।

इमामे आली मकाम उस नन्हे बच्चे को सीने से लगा कर सियाह दिल दुश्मनों के सामने तशरीफ ले गए और फरमाया ऐ मेरे नाना जान का कलिमा पढ़ने वालो! यह मेरा सब छोटा बच्चा हैं जो प्यास से दम तोड़ रहा है, यह अपने नन्हे नन्हे हाथों को तुम्हारी तरफ फैला कर तुम से पानी के चन्द घूंट तलब कर रहा है, अगर तुम्हारे नज़दीक मुजरिम हूं तो मैं हूं, इस बच्चे का तो कोई जुर्म नहीं है, इस को तो पानी पिला दो । देखो प्यास की शिद्दत से इस की हालत कैसी हो रही है, अगर तुम लोगों के दिलों में कुछ भी रहम हो तो इस नन्हे बच्चे के लिये थोड़ा सा पानी दे दो ।

इमामे आली मक़ाम की इस तक़रीर का ज़ालिमाने संगे दिल पर कोई असर नहीं हुआ और बेज़बान बच्चे पर उन को ज़रा भी रहम नहीं आया, पानी के बजाए एक बद बख़्ते अज़ली हुरमला बिन काहिल ने तीर का ऐसा निशाना बांध कर मारा कि अली असगर की हलक को छेदता हुआ इमाम के बाज़ू में पैवस्त हो गया, हज़रत इमाम ने तीर खींचा तो हज़रत अली असग़र के गले से ख़ून का फव्वरा उबलने लगा.. और बच्चे ने बाप के हाथों में तड़प कर जान दे दी।

ज़ख़्मी जिगर ख़बीसों ने तोड़ा हुसैन का
बच्चा भी शीर ख़्वार न छोड़ा हुसैन का

इमामे आली मक़ाम ने हस्रत भरी निगाह आसमान की तरफ उठाई और बारगाहे खुदावन्दी में अर्ज़ किया या रब्बूल आलमीन ! हुसैन की यह नन्ही कुर्बानी भी क़बूल फरमा लें, फिर नन्हे शहीद की लाश को अपने कलेजे से लगा कर आहिस्ता आहिस्ता खेमे की तरफ रवाना हुए। और जब मां की गोद में अली असगर की लाश को दिया तो मां ने हाए मेरा लाल कह कर लाश को कलेजे से लगा लिया और रोते हुए कहा बेटा! मेरा प्यारा बेटा ! एक मर्तबा और अपनी मां के सोखे हुए पिस्तान में मुंह लगा ले, अब तुम को अपने सीने लगाना कभी नसीब न होगा।

हाए अफ्सोस !

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