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मीजान और पुल सिरात कहा है - pul sirat ka rasta

मीजान और पुल सिरात 

अबू दावूद ने हज़रते हसन से उन्हों ने हज़रते आइशा रजियल्लाहु तआला अंहा से नकल किया है कि वोह रोई तो हुजूर ﷺ ने पूछा : आइशा ! क्यूं रोती हो? उन्होंने अर्ज़ की, कि मैं जहन्नम को याद कर के रोई हूं, क्या आप क़ियामत के दिन अपने घर वालों को याद रखेंगे ? हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया कि तीन मकामात पर कोई किसी को याद नहीं करेगा, मीज़ाने अमल के वक्त यहां तक कि वोह येह जान ले कि उस का मीज़ान हल्का हुवा या भारी, नामए आ'माल के उड़ने या 'नी तक्सीम होते वक्त यहां तक कि वोह यह जान ले कि उस का सहीए आ'माल दाएं हाथ में आता है या बाएं हाथ में या पीठ के पीछे, और जब पुल सिरात को जहन्नम पर रखा जाएगा यहां तक कि वोह येह न जान ले कि वोह उसे उबूर कर सकता है या नहीं। 
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Pul Siraat

हुजूर ﷺ दस्तगीरिये उम्मत के लिये पुल सिशत् पर तशरीफ़ फ़रमा होंगे

तिर्मिज़ी शरीफ़ में है कि हज़रते अनस رضي الله عنه ने कहा : मैं ने नबिय्ये करीम ﷺ से सुवाल किया कि आप क़ियामत के दिन मेरी सिफारिश फरमाएंगे? आप ने फ़रमाया : मैं इंशाअल्लाह ऐसा करूंगा ! मैं ने अर्ज़ की : मैं आप को कहां तलाश करूं ? आप ने फ़रमाया : पहले मुझे पुल सिरात पर तलाश करना, मैं ने अर्ज़ की, कि अगर मैं पुल सिरात पर आप को न पा सकूं तो फिर कहां तलाश करूं? आप ने फ़रमाया कि फिर मुझे मीज़ान के क़रीब तलाश करना, , मैंने अर्ज़ की, कि अगर मैं आप को मीज़ान के क़रीब भी न पा सकूं तो कहां तलाश करूं? आप ने फरमाया : फिर मुझे हौज़ के क़रीब तलाश करना क्यूंकि मैं इन तीन मकामात के इलावा कहीं नहीं होऊंगा।
हाकिम की रिवायत है कि क़ियामत के दिन मीज़ान रखा जाएगा, अगर उस में वज़्न किया जाए या ज़मीनो आस्मान उस में रख दिये जाएं तो वोह रखे जा सकेंगे, तब फ़िरिश्ते अर्ज़ करेंगे :
ऐ अल्लाह ! इस में किस के आमाल का वज़्न किया जाएगा ? रब तआला फ़रमाएगा : अपनी मखलूक में से जिस के लिये चाहूंगा। 
फ़िरिश्ते अर्ज़ करेंगे : पाक है तू, हम तेरी कमा-हक्कुहू इबादत नहीं कर सके। और पुल सिरात रखा जाएगा जो उस्तरे की धार जैसा होगा। 
फ़िरिश्ते अर्ज़ करेंगे इसे कौन पार करेगा ? 
रब तआला फ़रमाएगा कि मेरी मखलूक में से जिस को मैं चाहूंगा, 

पुल सिरात जहन्नम के ऊपर रखा जाएगा

हज़रते अब्दुल्लाह बिन मसऊद رضي الله عنه से मरवी है कि पुल सिरात को जहन्नम के ऊपर रखा जाएगा जो पतली तल्वार की धार की तरह होगी जो फ़िसलने की जगह होगी, उस पर आग के कांटे होंगे जिन से वोह लोगों को उचक लेगी, उस पर रुकने वाला उस में गिरेगा और कुछ तेज़ चलने वाले होंगे जिन में से बाज़ बिजली की तरह गुज़रेंगे और वोह उस से गुज़र कर ही रुकेंगे, बा'ज़ उस से हवा की तरह गुज़रेंगे यहां तक कि वोह नजात पा लेंगे, बा'ज़ घुड़ सुवार की तरह जाएंगे, फिर बा'ज़ लोग दौड़ते हुवे आदमी की तरह, फिर इस से कुछ कम रफ्तार में दौड़ते तरह जाएंगे, फिर बा'ज़ लोग दौड़ते हुवे आदमी की तरह, फिर इस से कुछ कम रफ्तार में दौड़ते हुवे, फिर पैदल चलने वाले आदमी की तरह लोग गुज़रेंगे, फिर इन में सब के आखिर में ऐसा आदमी गुज़रेगा कि जिसे आग ने झुल्सा दिया होगा और तकलीफ़ उठा कर आया होगा, तब अल्लाह तआला उसे अपनी रहमत और फ़ज़्लो करम के तुफैल जन्नत में दाखिल करेगा और उसे कहा जाएगा कि आरजू कर और मांग, वोह शख्स कहेगा कि तू रब्बुल इज़्ज़त हो कर मुझ से मिज़ाह करता है? फिर उसे कहा जाएगा कि तमन्ना कर और मांग, यहां तक कि उस की तमाम तमन्नाएं पूरी हो जाएंगी, रब तआला फ़रमाएगा : तेरे लिये वोह भी है जो तू ने मांगा और उस के बराबर और भी उसके साथ है।
मुस्लिम शरीफ़ की रिवायत है : हज़रते उम्मे मुबश्शिर अन्सारिय्या रजियल्लाहु तआला अंहा फ़रमाती हैं कि मैं ने हज़रते हफ्सा رضي الله عنه के यहां हुज़ूर ﷺ से सुना, आप फ़रमा रहे थे : उन लोगों में से, जिन्हों ने दरख़्त के नीचे बैअत की थी, कोई भी जहन्नम में नहीं जाएगा, हज़रते हफ्सा रजियल्लाहु तआला अंहा ने अर्ज़ की : हां या रसूलल्लाह ! आप ने उन्हें चुप
करवा दिया तो वोह बोलीं : 
قران منكم إلا واردها
 तर्जमए कन्जुल ईमान : और तुम में कोई ऐसा नहीं जिस का गुज़र दोज़ख़ पर न हो
इस पर हुज़ूर ﷺ ने फरमाया कि अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है: तर्जुमा कन्गुल ईमान फिर हम डर वालों को बचा लेंगे और जालिमों को उस में छोड़ देंगे घुटनों
के बल गिरे ।
(फिर नजात देंगे हम उन को जो परहेज़गारी करते
हैं और छोड़ देंगे उस में ज़ालिमों को गिरा हुवा।)
हज़रते अहमद رضي الله عنه से मरवी है कि एक जमाअत ने जहन्नम में दाखिल होने वाले लोगों के बारे में इख़्तिलाफ़ किया है। बा'ज़ का कहना है कि उस में मोमिन दाखिल नहीं होंगे और बाज़ ने कहा है कि तमाम लोग उस में वारिद होंगे, फिर अल्लाह तआला उन लोगों को नजात देगा जो तकवा रखते हैं।

बाज़ लोगों ने हज़रते जाबिर बिन अब्दुल्लाह رضي الله عنه से पूछा तो उन्हों ने कहा कि तमाम लोग उस में वारिद होंगे। फिर उंगलियों को कानों के क़रीब ले जा कर कहा कि येह दो बहरे हों अगर मैं ने हुज़ूर ﷺ को येह फ़रमाते हुवे न सुना हो कि वुरूद से मुराद दुखूल है, कोई नेक और बुरा बाकी न रहेगा मगर सब उस में दाखिल होंगे, तब वोह जहन्नम मोमिनों पर हज़रते इब्राहीम عليه السلام‎ की तरह ठन्डा और सलामती वाला हो जाएगा यहां तक कि उस आग या जहन्नम के लिये आप ने फ़रमाया : मोमिनों की सर्दी की वजह से फ़रयाद निकलेगी फिर अल्लाह तआला उन लोगों को नजात देगा जो परहेज़गारी करते हैं और जालिमों को जहन्नम में गिरा हुवा छोड़ देगा । 
हाकिम की रिवायत है कि लोग जहन्नम में वारिद होंगे और अपने आमाल की बदौलत उस से निकलेंगे, पहले बिजली की चमक की तरह, फिर घुड़ सुवार की तरह, फिर ऊंट सुवार की तरह, फिर दौड़ते हुवे आदमी की तरह और फिर पैदल आदमी की तरह निकलेंगे 

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