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Halal Stocks in India: Bina Premium App Ke Shariah Share Kaise Chune

क्या आप भारत के शेयर बाजार में अपना पैसा लगाना चाहते हैं, लेकिन इस बात से परेशान हैं कि कौन सा शेयर हलाल है और कौन सा हराम? बहुत से लोग सोचते हैं कि हलाल शेयर ढूंढने के लिए हमेशा महंगे मोबाइल ऐप्स या प्रीमियम सॉफ्टवेयर की जरूरत होती है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। आप खुद अपने घर बैठे, बिना एक भी पैसा खर्च किए, किसी भी भारतीय शेयर की शरिया जांच कर सकते हैं। इस गाइड में हम इसी आसान तरीके को समझेंगे जिससे आप खुद अपने दम पर हलाल शेयरों की पहचान कर सकें।

Halal Stocks in India: Bina Premium App Ke Shariah Share Kaise Chune

भारत में शरिया के नियमों के अनुसार निवेश करने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। लोग अब केवल मुनाफा नहीं देखना चाहते, बल्कि वे यह भी देखना चाहते हैं कि उनका पैसा सही जगह लग रहा है या नहीं। शरिया के नियमों के अनुसार पैसे का सही इस्तेमाल सीखने के लिए आप Islamic investment rules को समझ सकते हैं जो निवेश के बुनियादी सिद्धांतों को आसान बनाते हैं। इसके बाद जब आप सीधे शेयर बाजार में उतरते हैं, तो आपको कुछ खास बातों का ध्यान रखना पड़ता है।

Shariah Stocks Screening Ke Buniyadi Niyam Kya Hain?

शेयर बाजार में किसी भी कंपनी को हलाल मानने के लिए दो मुख्य कसौटियों पर परखा जाता है। पहली कसौटी है कंपनी का बिजनेस मॉडल, जिसे हम बिजनेस स्क्रीन कहते हैं। दूसरी कसौटी है कंपनी के वित्तीय आंकड़े, जिसे हम फाइनेंशियल स्क्रीन कहते हैं। इन दोनों पैमानों पर खरा उतरने के बाद ही कोई शेयर निवेश के लिए सही माना जाता है।

कई लोगों को लगता है कि शेयर बाजार पूरी तरह से जुआ या सट्टा है। लेकिन सच यह है कि जब आप किसी कंपनी का शेयर खरीदते हैं, तो आप उस बिजनेस के हिस्सेदार बनते हैं। अगर वह बिजनेस खुद हलाल काम कर रहा है और उसका कर्ज लेने का तरीका सही है, तो उसमें हिस्सेदारी लेना भी पूरी तरह से सही माना जाता है। आइए इन दोनों पैमानों को विस्तार से समझते हैं ताकि आप खुद अपनी रिसर्च कर सकें।

Business Level Screening: Konsi Companies Haram Hain?

सबसे पहला काम यह देखना है कि कंपनी असल में काम क्या करती है। उसका मुख्य बिजनेस क्या है और वह पैसे कहां से कमाती है। शरिया के नियमों के अनुसार कुछ खास सेक्टर्स में निवेश करना पूरी तरह वर्जित है। अगर कोई कंपनी नीचे दिए गए किसी भी बिजनेस में शामिल है, तो आप उसके शेयर नहीं खरीद सकते।

शराब और नशीले पदार्थ इस लिस्ट में सबसे ऊपर आते हैं। शराब बनाने वाली, बेचने वाली या उसका प्रचार करने वाली कंपनियां हराम की श्रेणी में आती हैं। इसमें बियर बनाने वाली और डिस्टिलरी कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा होटल इंडस्ट्री की उन कंपनियों से भी बचना चाहिए जो अपने बार से बड़ा रेवेन्यू कमाती हैं।

ब्याज आधारित वित्तीय सेवाएं भी पूरी तरह वर्जित हैं। पारंपरिक बैंक, एनबीएफसी और ऐसी इंश्योरेंस कंपनियां जो ब्याज पर काम करती हैं, उनके शेयर पूरी तरह हराम हैं। चूंकि इनका पूरा बिजनेस ही ब्याज यानी रिबा पर चलता है, इसलिए इनमें निवेश की सख्त मनाही है। हालांकि कुछ इस्लामिक बैंक दुनिया के अन्य देशों में होते हैं, लेकिन भारत में फिलहाल ऐसी कोई मान्यता प्राप्त व्यवस्था नहीं है।

पोर्क और गैर-हलाल मीट बेचने वाली कंपनियां भी इस दायरे से बाहर हैं। सूअर का मांस बेचने वाली या गैर-हलाल तरीके से मीट प्रोसेस करने वाली कंपनियां भी इस लिस्ट में आती हैं। इसके साथ ही जुआ और सट्टा का कारोबार करने वाली कंपनियों को भी हराम माना गया है। कैसीनो चलाने वाली, ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स बनाने वाली या लॉटरी का बिजनेस करने वाली कंपनियां इस लिस्ट में आती हैं।

अश्लीलता और मनोरंजन के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियां भी वर्जित हैं। ऐसी कंपनियां जो फिल्म मेकिंग, म्यूजिक, या केबल टीवी जैसे काम करती हैं जहां शरिया विरोधी चीजें दिखाई जाती हैं, उनमें भी निवेश नहीं किया जा सकता। तंबाकू और सिगरेट बनाने वाली कंपनियां भी इंसानी सेहत को नुकसान पहुंचाती हैं, इसलिए इन्हें भी शरिया के खिलाफ माना जाता है। सिगरेट, गुटका या तंबाकू बनाने वाली कंपनियां इस श्रेणी में आती हैं।

Financial Ratio Screening: Balance Sheet Kaise Check Karein

अगर कोई कंपनी बिजनेस के मामले में पास हो जाती है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह तुरंत हलाल हो गई। अब हमें उस कंपनी की बैलेंस शीट देखनी होगी। बहुत सी कंपनियां अच्छा बिजनेस करती हैं, लेकिन वे बैंक से भारी ब्याज पर कर्ज लेती हैं या अपना पैसा ब्याज कमाने के लिए बैंक में रखती हैं। इस जांच को करने के लिए तीन मुख्य वित्तीय अनुपात देखे जाते हैं।

पहला अनुपात है कुल कर्ज और संपत्ति का अनुपात। शरिया नियमों के अनुसार, कंपनी पर कुल कर्ज उसकी कुल संपत्ति के 33% से कम होना चाहिए। कुछ लोग संपत्ति की जगह बाजार पूंजीकरण का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कुल संपत्ति का पैमाना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। इसका सीधा मतलब है कि कंपनी पूरी तरह से ब्याज के कर्ज पर निर्भर नहीं होनी चाहिए।

दूसरा अनुपात है ब्याज कमाने वाली संपत्तियों का अनुपात। कंपनी के पास जितना भी नकद और बैंक एफडी जैसी चीजें हैं, वे उसकी कुल संपत्ति के 30% से अधिक नहीं होनी चाहिए। अगर कंपनी बहुत ज्यादा पैसा ब्याज कमाने के लिए बैंकों में जमा रखती है, तो उसका मुख्य मुनाफा ब्याज से आने लगता है, जो कि गलत है।

तीसरा अनुपात है देनदारियों का अनुपात। कंपनी के कुल देनदार और नकद राशि उसकी कुल संपत्ति के 50% से कम होनी चाहिए। यदि देनदारियां बहुत ज्यादा हैं, तो इसका मतलब है कि कंपनी पैसे के लेन-देन के व्यापार में ज्यादा फंसी है। इन तीनों अनुपातों को आप खुद बहुत आसानी से निकाल सकते हैं।

Market Capitalization Vs Total Assets

वित्तीय अनुपात निकालते समय नीचे की संख्या क्या होनी चाहिए, इस पर विद्वानों में थोड़ा मतभेद है। कुछ शरिया बोर्ड बाजार पूंजीकरण का इस्तेमाल करते हैं। वहीं कुछ अन्य बोर्ड कुल संपत्ति का इस्तेमाल करते हैं।

बाजार पूंजीकरण का मतलब है कंपनी के कुल शेयरों की बाजार में कीमत। यह कीमत हर दिन बदलती रहती है। जब शेयर बाजार गिरता है, तो बाजार पूंजीकरण भी तेजी से गिर जाता है। इससे होता यह है कि एक कंपनी जो कल तक हलाल थी, आज बाजार गिरने के कारण हराम की श्रेणी में आ जाती है, भले ही उसके बिजनेस में कोई बदलाव न हुआ हो।

इसलिए कुल संपत्ति का इस्तेमाल करना ज्यादा सही और स्थिर माना जाता है। कुल संपत्ति साल में केवल चार बार ही बदलती है जब कंपनी अपने वित्तीय नतीजे पेश करती है। इससे आपके निवेश में स्थिरता रहती है और आपको बार-बार शेयर बेचने और खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती।

Screener. in Par Free Mein Check Karne Ka Tarika

अब सवाल उठता है कि ये सारे आंकड़े हमें मिलेंगे कहां? इसके लिए आपको किसी पेड सर्विस की जरूरत नहीं है। भारत में स्क्रिनर डॉट इन नाम की एक बेहतरीन और मुफ्त वेबसाइट है। आप इस पर जाकर अपना एक फ्री अकाउंट बना सकते हैं। इसके बाद आप किसी भी कंपनी का नाम सर्च करें और उसकी बैलेंस शीट खोलें।

बैलेंस शीट में आपको कुल संपत्ति और कर्ज के आंकड़े आसानी से मिल जाएंगे। चलिए एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए हम टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की जांच करना चाहते हैं। सबसे पहले वेबसाइट पर इसका नाम लिखें। इसके बाद इसके बैलेंस शीट सेक्शन में जाएं।

वहां देखें कि कंपनी के पास कुल संपत्ति कितनी है। मान लीजिए वह बीस हजार करोड़ रुपये है। अब उसकी कुल उधारी देखें। मान लीजिए वह एक हजार करोड़ रुपये है। अब हमें कर्ज को कुल संपत्ति से भाग देना है। इसके बाद जो प्रतिशत आएगा वह कर्ज का अनुपात होगा। यदि यह तैंतीस प्रतिशत से कम है, तो यह कंपनी कर्ज के मामले में सही है। इसी तरह आप बाकी के दो अनुपातों की भी गणना कर सकते हैं।

Halal Stocks in India: Bina Premium App Ke Shariah Share Kaise Chune

Annual Report Mein Segment Revenue Kaise Dekhein

जब आप किसी कंपनी की बिजनेस स्क्रीनिंग करते हैं, तो केवल उसकी मुख्य वेबसाइट देखना काफी नहीं होता। कई बार कंपनियां कई अलग-अलग तरह के काम करती हैं। इसके लिए आपको कंपनी की सालाना रिपोर्ट डाउनलोड करनी चाहिए।

सालाना रिपोर्ट के अंदर एक सेक्शन होता है जिसे सेगमेंट रिपोर्टिंग कहा जाता है। वहां कंपनी साफ-साफ लिखती है कि उसे किस काम से कितना पैसा मिला है।

उदाहरण के लिए, यदि कोई बड़ी होटल कंपनी है, तो सेगमेंट रिपोर्ट में लिखा होगा कि उसे कमरों के किराये से कितना पैसा मिला और रेस्टोरेंट या बार से कितना पैसा मिला। यदि बार से होने वाली कमाई उसकी कुल कमाई के पांच प्रतिशत से अधिक है, तो वह कंपनी शरिया के दायरे से बाहर हो जाएगी। यह जानकारी आपको किसी भी ऐप पर इतनी आसानी से नहीं मिलेगी।

Debt Aur Lease Liabilities Ka Antar

बैलेंस शीट में कर्ज देखते समय एक बहुत बड़ी गलती लोग करते हैं। वे लीज लायबिलिटीज को भी कर्ज मान लेते हैं। लीज लायबिलिटी का मतलब है कि कंपनी ने कोई जगह या मशीन किराये पर ली है और उसका किराया देना बाकी है।

शरिया के कई बड़े विद्वानों के अनुसार, लीज लायबिलिटी को ब्याज वाला कर्ज नहीं माना जाता क्योंकि यह किसी सीधे ब्याज वाले लोन की तरह नहीं होता। इसलिए जब आप स्क्रिनर डॉट इन पर कर्ज की गणना करें, तो केवल बोरोइंग्स को ही देखें और लीज लायबिलिटी को उसमें से घटा दें।

यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात है जो महंगे शरिया ऐप्स भी अक्सर नहीं बताते। वे बस सीधे कुल लायबिलिटी को जोड़ देते हैं जिससे कई अच्छी हलाल कंपनियां भी हराम की श्रेणी में दिखने लगती हैं। खुद से जांच करने पर आप इस गलती से बच सकते हैं।

Haram Income Aur Dividend Purification Kya Hai?

कई बार ऐसा होता है कि एक पूरी तरह हलाल कंपनी भी थोड़ा बहुत ब्याज कमा लेती है। जैसे कि कंपनी का कुछ पैसा बैंक के चालू खाते या फिक्स्ड डिपॉजिट में पड़ा हो, जिस पर उसे ब्याज मिला हो। शरिया नियमों के अनुसार, अगर कंपनी की कुल कमाई में से हराम या ब्याज से होने वाली कमाई पांच प्रतिशत से कम है, तो उस कंपनी को हलाल माना जा सकता है। लेकिन हमें उस ब्याज के हिस्से को अपने मुनाफे से अलग करना होगा।

इस प्रक्रिया को लाभांश का शुद्धिकरण कहते हैं। जब भी वह कंपनी आपको लाभांश देती है, तो आपको यह पता लगाना होता है कि उस लाभांश का कितना हिस्सा ब्याज की कमाई से आया है। आमतौर पर यह जानकारी कंपनी की सालाना रिपोर्ट में मिल जाती है।

मान लीजिए आपको कंपनी से सौ रुपये का लाभांश मिला और कंपनी की कुल कमाई का दो प्रतिशत हिस्सा ब्याज से आया था। तो आपको उस सौ रुपये में से दो रुपये किसी गरीब या चैरिटी को दान करने होंगे। इस दान पर आपको कोई पुण्य की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए, यह केवल आपके पैसे को साफ करने का एक तरीका है।

अगर आप सीधे शेयर नहीं खरीदना चाहते और इस जटिल गणना से बचना चाहते हैं, तो आप our guide on ethical investing in stock market देख सकते हैं जहां हमने बिना ब्याज वाले निवेश के दूसरे तरीकों के बारे में बताया है। म्यूचुअल फंड्स भी इसका एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं जिसके बारे में हम आगे चर्चा करेंगे।

Kya Mutual Funds Ek Accha Vikalp Hain?

अगर आपको लगता है कि हर कंपनी की बैलेंस शीट देखना और खुद से गुणा-भाग करना आपके लिए मुश्किल है, तो भारत में शरिया आधारित म्यूचुअल फंड भी मौजूद हैं। ये फंड खुद ही कंपनियों की जांच करते हैं और केवल हलाल कंपनियों में ही लोगों का पैसा लगाते हैं।

भारत में दो प्रमुख शरिया म्यूचुअल फंड उपलब्ध हैं। पहला है टाटा एथिकल फंड और दूसरा है टॉरस एथिकल फंड। इन फंड्स के पास अपनी एक शरिया कमेटी होती है जो लगातार कंपनियों की निगरानी करती है। जैसे ही कोई कंपनी शरिया के नियमों से बाहर होती है, ये फंड मैनेजर तुरंत उस कंपनी के शेयर बेच देते हैं।

हालांकि, म्यूचुअल फंड में निवेश करने पर आपको कुछ फीस देनी होती है जिसे एक्सपेंस रेशियो कहते हैं। यदि आप खुद से शेयर चुनकर निवेश करते हैं, तो आप इस फीस को बचा सकते हैं। खुद से निवेश करने का फायदा यह है कि आपको अपने पैसों पर पूरा नियंत्रण मिलता है। लेकिन अगर आपके पास समय की कमी है, तो म्यूचुअल फंड आपके लिए सबसे बेहतरीन और सुरक्षित रास्ता साबित हो सकते हैं।

Khud Se Screening Karte Waqt In Galtiyon Se Bachein

जब आप खुद से शेयरों की जांच करना शुरू करते हैं, तो कुछ आम गलतियां होने की संभावना हमेशा बनी रहती है। इन गलतियों से बचना बहुत जरूरी है ताकि आपका निवेश पूरी तरह से पाक और साफ रहे।

पहली गलती यह है कि लोग केवल कंपनी का नाम देखकर फैसला कर लेते हैं। उदाहरण के लिए, किसी कंपनी के नाम में एथिकल लिखा होने का यह मतलब नहीं है कि वह हमेशा नियमों का पालन कर रही है। आपको हमेशा उसकी बैलेंस शीट के ताजा आंकड़ों को देखना चाहिए क्योंकि कंपनियों का कर्ज समय के साथ बदलता रहता है। हो सकता है कि छह महीने पहले जो कंपनी कर्ज मुक्त थी, उसने आज बड़ा कर्ज ले लिया हो।

दूसरी गलती यह है कि लोग केवल तिमाही नतीजों को देखकर अनुपात बदल देते हैं। शरिया स्क्रीनिंग के लिए हमेशा सालाना रिपोर्ट या पिछले बारह महीनों के आंकड़ों का ही इस्तेमाल करना चाहिए। छोटे समय के बदलावों से घबराने की जरूरत नहीं होती।

तीसरी गलती डिविडेंड को साफ न करना है। बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर कंपनी हलाल है तो उसका पूरा डिविडेंड भी हलाल है। ऐसा नहीं है। जैसा कि हमने पहले बताया, आपको हमेशा अपनी डिविडेंड इनकम का एक छोटा हिस्सा दान करना चाहिए ताकि आपका पैसा पूरी तरह शुद्ध रहे।

Aapka Agla Kadam Kya Hona Chahiye?

अब जब आप समझ गए हैं कि बिना किसी प्रीमियम ऐप के खुद से हलाल शेयर कैसे ढूंढे जाते हैं, तो आपको आज ही से शुरुआत करनी चाहिए। सबसे पहले स्क्रिनर डॉट इन पर जाएं और अपनी पसंद की पांच कंपनियों की लिस्ट बनाएं। फिर उनकी बैलेंस शीट खोलकर ऊपर बताए गए तीनों अनुपातों की गणना करें।

यह काम शुरू में थोड़ा कठिन लग सकता है, लेकिन दो-तीन बार करने के बाद यह आपके लिए बेहद आसान हो जाएगा। आपको किसी भी महंगे ऐप पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस तरह आप न केवल अपने पैसे बचाएंगे बल्कि शरिया निवेश के बारे में आपकी समझ भी मजबूत होगी।

क्या आपने कभी खुद किसी शेयर की बैलेंस शीट चेक की है? नीचे कमेंट करके हमें जरूर बताएं और अगर कोई सवाल हो तो जरूर पूछें। खुशहाल और हलाल निवेश की शुभकामनाएं।

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