हेलो दोस्तों! क्या आप भारतीय शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं लेकिन हलाल और हराम के असमंजस में फंसे हैं? भारत में रहने वाले बहुत से मुस्लिम निवेशक शेयर मार्केट में पैसा लगाना चाहते हैं। लेकिन उनके मन में हमेशा एक डर रहता है कि कहीं वे किसी ऐसी कंपनी में पैसा न लगा दें जो शरिया के नियमों के खिलाफ हो। बाजार में कुछ ऐसे मोबाइल ऐप्स हैं जो हलाल स्टॉक्स की पहचान करने का दावा करते हैं। लेकिन वे ऐप्स हर महीने बहुत भारी फीस वसूलते हैं। एक आम निवेशक के लिए हर महीने इतनी बड़ी फीस देना आसान नहीं होता।
तो फिर इसका रास्ता क्या है? क्या आप बिना कोई पैसा खर्च किए खुद से हलाल शेयर्स की पहचान कर सकते हैं? इसका जवाब है हां। आप बिल्कुल मुफ्त में घर बैठे किसी भी कंपनी के शेयर को खुद से स्क्रीन कर सकते हैं। आज के इस लेख में मैं आपको एक ऐसा तरीका बताऊंगा जिससे आप बिना किसी प्रीमियम ऐप के खुद से हलाल स्टॉक्स की पहचान कर पाएंगे। हम कुछ आसान नियमों और फ्री टूल्स का उपयोग करेंगे जिन्हें समझना बेहद आसान है।
शरिया स्टॉक स्क्रीनिंग के बुनियादी नियम क्या हैं?
शेयर बाजार में किसी भी कंपनी को हलाल या शरिया अनुकूल मानने के लिए दो तरह के टेस्ट किए जाते हैं। पहला टेस्ट होता है बिजनेस स्क्रीनिंग और दूसरा टेस्ट होता है फाइनेंशियल स्क्रीनिंग। जब कोई कंपनी इन दोनों टेस्ट में पास होती है तभी उसके शेयर को हलाल माना जाता है। आइए इन दोनों को बहुत ही आसान शब्दों में समझते हैं ताकि आपको कोई उलझन न रहे।
बिजनेस स्क्रीनिंग का मतलब है कि कंपनी असल में क्या काम करती है। वह पैसा कैसे कमाती है। शरिया नियमों के अनुसार कुछ खास तरह के बिजनेस को पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है। अगर कोई कंपनी नीचे दिए गए बिजनेस में शामिल है तो आप उसके शेयर्स में बिल्कुल भी निवेश नहीं कर सकते हैं:
- ब्याज आधारित वित्तीय सेवाएं: इसमें सभी पारंपरिक बैंक, होम लोन कंपनियां, और एनबीएफसी शामिल हैं जो ब्याज पर पैसा देती हैं या लेती हैं।
- शराब और नशीले पदार्थ: शराब, बीयर, या किसी भी तरह के नशीले पेय बनाने वाली और बेचने वाली कंपनियां।
- तंबाकू और सिगरेट: सिगरेट, बीड़ी, गुटखा या तंबाकू से जुड़े प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियां।
- सुअर का मांस (पॉर्क): सुअर के मांस की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग या उसे बेचने वाली कंपनियां।
- जुआ और सट्टेबाजी: कसीनो, लॉटरी, ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स जो सट्टेबाजी को बढ़ावा देते हैं।
- अश्लीलता और मनोरंजन: सिनेमा, संगीत, नाइट क्लब या ऐसी मीडिया कंपनियां जो शरिया के नैतिक सिद्धांतों के खिलाफ काम करती हैं।
अगर कोई कंपनी इन सेक्टर्स में काम नहीं करती है तो वह बिजनेस स्क्रीनिंग टेस्ट पास कर लेती है। जैसे कि आईटी सेक्टर की कंपनियां, फार्मास्युटिकल कंपनियां, ऑटोमोबाइल कंपनियां और एफएमसीजी कंपनियां आमतौर पर बिजनेस स्क्रीनिंग टेस्ट पास कर लेती हैं।
फाइनेंशियल स्क्रीनिंग के तीन सबसे जरूरी रेशियो
बिजनेस सही होने का मतलब यह नहीं है कि कंपनी का शेयर तुरंत हलाल हो गया। हमें उसके वित्तीय खातों को भी देखना होता है। कोई भी बिजनेस बिना कर्ज या बैंक अकाउंट के नहीं चलता। इसलिए शरिया स्कॉलर्स ने कुछ वित्तीय सीमाएं तय की हैं। ये सीमाएं तीन मुख्य अनुपातों पर आधारित होती हैं:
पहला नियम है कुल कर्ज का अनुपात। कंपनी पर कुल कर्ज उसके मार्केट कैपिटलाइजेशन के 33% से कम होना चाहिए। इसे डेट टू मार्केट कैप रेशियो कहते हैं। बहुत सी कंपनियां बिजनेस बढ़ाने के लिए बैंकों से ब्याज पर कर्ज लेती हैं। अगर यह कर्ज एक सीमा से अधिक हो जाए तो उस कंपनी में निवेश करना हलाल नहीं रहता। इस 33% की सीमा का आधार इस्लाम का वह सिद्धांत है जिसमें एक-तिहाई को एक बड़ी मात्रा माना गया है।
दूसरा नियम है ब्याज से होने वाली कमाई का अनुपात। कंपनी की कुल कमाई में ब्याज से होने वाली कमाई 5% से कम होनी चाहिए। कंपनियों के पास जो फालतू कैश होता है उसे वे अक्सर बैंकों में फिक्स डिपॉजिट कर देती हैं। इस डिपॉजिट पर उन्हें ब्याज मिलता है। अगर यह ब्याज उनकी कुल कमाई के 5% से कम है तो उसे एक छोटी और अनचाही मात्रा मानकर छूट दी जाती है। लेकिन इस ब्याज के हिस्से को बाद में साफ करना पड़ता है जिसकी चर्चा हम आगे करेंगे।
तीसरा नियम है लिक्विड एसेट्स का अनुपात। कंपनी के कुल एसेट्स में कैश और रिसीवेबल्स का हिस्सा 50% या कुछ शरिया बोर्ड्स के अनुसार 33% से कम होना चाहिए। अगर किसी कंपनी के पास केवल कैश ही कैश है और कोई वास्तविक बिजनेस एसेट जैसे जमीन, मशीनरी या इन्वेंट्री नहीं है तो उसके शेयरों का व्यापार करना पैसों का पैसों से व्यापार करने जैसा हो जाता है जो कि ब्याज के दायरे में आ सकता है। इसलिए कंपनी के पास वास्तविक संपत्तियां होना जरूरी है।
Screener. in का उपयोग करके मुफ्त में हलाल स्टॉक्स कैसे खोजें?
अब सवाल उठता है कि हम इन तीनों अनुपातों की गणना खुद कैसे करेंगे? क्या हमें हर कंपनी की बैलेंस शीट डाउनलोड करके खुद गणित लगाना होगा? बिल्कुल नहीं। इसके लिए हम भारत की सबसे लोकप्रिय और मुफ्त वित्तीय वेबसाइट Screener. in का उपयोग करेंगे। यह वेबसाइट आपको बिना किसी शुल्क के कस्टम स्क्रीन बनाने की अनुमति देती है।
सबसे पहले आप Screener. in पर जाएं और वहां अपना एक मुफ्त अकाउंट बना लें। इसके लिए आपको केवल अपनी ईमेल आईडी की जरूरत होगी। अकाउंट बनाने के बाद आपको ऊपर की तरफ "Screens" का एक विकल्प दिखाई देगा। उस पर क्लिक करें। इसके बाद आपको "Create New Screen" का बटन दिखेगा। वहां एक खाली बॉक्स होगा जिसमें आप अपनी खुद की क्वेरी लिख सकते हैं।
अब मैं आपको एक जादुई फार्मूला देने जा रहा हूं जिसे आपको उस खाली बॉक्स में लिखना है। यह फार्मूला आपके लिए उन सभी कंपनियों को छान देगा जो वित्तीय रूप से शरिया के अनुकूल हैं। इस फार्मूले को ध्यान से देखें:
Debt < (Market Capitalization * 0.33) AND Other income < (Sales * 0.05) AND Debt to equity < 0.5
जब आप इस क्वेरी को लिखकर "Run This Query" पर क्लिक करेंगे तो आपके सामने उन कंपनियों की एक लंबी लिस्ट आ जाएगी जो इन शर्तों को पूरा करती हैं। लेकिन यहाँ आपको थोड़ा सा अपना दिमाग भी लगाना होगा। यह टूल केवल नंबरों को छानता है, बिजनेस के प्रकार को नहीं। इस लिस्ट में कुछ बैंक या फाइनेंशियल कंपनियां भी आ सकती हैं क्योंकि उनका कर्ज दिखाने का तरीका अलग होता है। आपको उस लिस्ट में से बैंकों, फाइनेंस कंपनियों और शराब-तंबाकू बनाने वाली कंपनियों को खुद से हटाना होगा।
उदाहरण के लिए अगर लिस्ट में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का नाम आता है तो आप जानते हैं कि TCS का मुख्य काम सॉफ्टवेयर बनाना है। यह एक हलाल बिजनेस है। इसके बाद आप इसके वित्तीय अनुपात देखेंगे। TCS पर लगभग शून्य कर्ज है और इसकी ब्याज से होने वाली कमाई भी बहुत कम है। इस तरह आप बहुत आसानी से पुष्टि कर सकते हैं कि TCS एक हलाल स्टॉक है। इस तरह के मुफ्त टूल्स का उपयोग करके आप हजारों रुपये बचा सकते हैं। अगर आप भारत में हलाल निवेश के दूसरे तरीकों के बारे में जानना चाहते हैं, तो आप halal investment options in India देख सकते हैं।
नॉन-हलाल इनकम को शुद्ध (Purify) कैसे करें?
जब आप किसी हलाल स्टॉक में निवेश करते हैं तो आपको समय-समय पर कंपनी से डिविडेंड यानी लाभांश मिलता है। जैसा कि हमने पहले चर्चा की, कई हलाल कंपनियों को भी अपने बैंक बैलेंस पर थोड़ा बहुत ब्याज मिलता है जिसे हम नॉन-हलाल इनकम कहते हैं। भले ही यह इनकम 5% की सीमा के अंदर हो, लेकिन यह पैसा हमारे लिए हलाल नहीं है। इसलिए हमें अपने हिस्से के डिविडेंड में से इस ब्याज वाले हिस्से को बाहर निकालना होता है। इस प्रक्रिया को शुद्धिकरण या डिविडेंड प्यूरीफिकेशन कहा जाता है।
कई लोग इस प्रक्रिया को बहुत कठिन समझते हैं। लेकिन यह बहुत ही सरल गणित है। आइए इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपने किसी कंपनी के 100 शेयर्स खरीदे हैं। इस कंपनी का नाम हम "कंपनी एक्स" रख लेते हैं।
सबसे पहले आपको कंपनी की सालाना रिपोर्ट या मनीकंट्रोल जैसी वेबसाइट पर जाकर यह देखना होगा कि उसकी कुल कमाई में ब्याज का हिस्सा कितना है। मान लेते हैं कि कंपनी एक्स की कुल कमाई 1000 करोड़ रुपये है। इस कमाई में से 20 करोड़ रुपये उसे बैंक ब्याज से मिले हैं। इसका मतलब हुआ कि कंपनी की कुल कमाई में ब्याज का हिस्सा 2% है। यह हिस्सा 5% की शरिया सीमा से बहुत कम है, इसलिए कंपनी का शेयर हलाल है।
अब मान लीजिए कि कंपनी एक्स ने इस साल आपको कुल 500 रुपये का डिविडेंड दिया। चूंकि कंपनी की कुल कमाई में 2% हिस्सा ब्याज का था, इसलिए आपको मिले डिविडेंड का 2% हिस्सा भी ब्याज का ही माना जाएगा। अब आपको इस 2% हिस्से को अपने पास से दान करना होगा।
शुद्धिकरण राशि = 500 रुपये का 2% = 10 रुपये।
आपको इस 10 रुपये को किसी गरीब व्यक्ति या चैरिटी को दान करना होगा। ध्यान रखें कि इस दान पर आपको किसी भी तरह के सवाब या पुण्य की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। यह पैसा केवल आपके खाते को साफ करने के लिए निकाला जा रहा है। इस 10 रुपये को दान करने के बाद आपके पास बचे हुए 490 रुपये पूरी तरह से हलाल और शुद्ध हो जाते हैं। आपको हर साल मिलने वाले डिविडेंड के साथ यह छोटी सी गणना करनी चाहिए। यह आपके निवेश को पाक और साफ रखने का सबसे बेहतरीन तरीका है।
हलाल स्टॉक्स चुनते समय होने वाली आम गलतियां
शेयर बाजार में निवेश करते समय बहुत से नए निवेशक कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिससे उनका निवेश अनजाने में हराम हो जाता है। इन गलतियों से बचना बहुत जरूरी है ताकि आपकी मेहनत की कमाई सुरक्षित और हलाल रहे।
सबसे पहली और आम गलती है इंटरनेट पर मौजूद पुरानी सूचियों पर आंख मूंदकर भरोसा करना। बहुत से लोग गूगल पर सर्च करते हैं "हलाल स्टॉक्स लिस्ट इन इंडिया" और किसी पुरानी वेबसाइट या ब्लॉग पर दी गई लिस्ट को देखकर शेयर खरीद लेते हैं। आपको यह समझना होगा कि कंपनियों के वित्तीय आंकड़े हर तीन महीने में बदलते हैं। एक कंपनी जो पिछले साल पूरी तरह से कर्ज मुक्त थी, हो सकता है कि उसने इस साल बड़ा कर्ज ले लिया हो। अगर उसका कर्ज 33% की सीमा को पार कर गया है तो वह तुरंत शरिया कंप्लायंस से बाहर हो जाएगी। इसलिए आपको हर तिमाही के नतीजों के बाद खुद से नंबर्स को चेक करना चाहिए।
दूसरी बड़ी गलती है इंट्राडे ट्रेडिंग और फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में शामिल होना। बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर कोई स्टॉक हलाल है तो उसकी ट्रेडिंग करना भी हलाल होगा। शरिया के नियमों के अनुसार आप केवल उसी चीज को बेच सकते हैं जिसके आप मालिक हैं। इंट्राडे ट्रेडिंग में आप बिना शेयर की डिलीवरी लिए उसे कुछ ही मिनटों में खरीद और बेच देते हैं। इसी तरह फ्यूचर्स और ऑप्शंस पूरी तरह से सट्टेबाजी और अनुमान पर आधारित होते हैं। इनमें वास्तविक शेयर्स का कोई लेन-देन नहीं होता। इसलिए आपको हमेशा केवल डिलीवरी आधारित निवेश (Delivery-based Equity Investment) ही करना चाहिए जहां आप वास्तव में कंपनी के हिस्सेदार बनते हैं।
तीसरी गलती है म्यूचुअल फंड्स को बिना जांचे खरीदना। बहुत से लोग सोचते हैं कि म्यूचुअल फंड्स सुरक्षित हैं तो वे हलाल भी होंगे। लेकिन पारंपरिक म्यूचुअल फंड्स अक्सर बैंकों और सिगरेट बनाने वाली कंपनियों में बहुत बड़ा निवेश करते हैं। इसलिए आपको केवल शरिया अनुकूल म्यूचुअल फंड्स में ही निवेश करना चाहिए। इसके बारे में विस्तार से जानने के लिए आप हमारी our guide on halal mutual funds पढ़ सकते हैं, जिससे आपको सही फंड चुनने में मदद मिलेगी।
लॉन्ग टर्म निवेश के लिए हलाल स्टॉक्स की सिंपल चेकलिस्ट
जब भी आप किसी नए स्टॉक में निवेश करने का मन बनाएं, तो नीचे दी गई चेकलिस्ट को एक बार जरूर देख लें। इससे आपका समय भी बचेगा और आप किसी भी तरह की गलती से बच जाएंगे:
- बिजनेस का प्रकार: क्या कंपनी का मुख्य बिजनेस हलाल है? पक्का करें कि वह बैंक, तंबाकू, शराब या कसीनो से जुड़ी न हो।
- कर्ज की सीमा: क्या कंपनी का कुल कर्ज उसके मार्केट कैप के 33% से कम है? इसे आप Screener. in पर आसानी से देख सकते हैं।
- ब्याज की कमाई: क्या कंपनी की ब्याज से होने वाली कमाई उसके कुल टर्नओवर के 5% से कम है?
- लिक्विड एसेट्स: क्या कंपनी के पास पर्याप्त वास्तविक संपत्तियां (जमीन, प्लांट, मशीनरी) हैं?
- इन्वेस्टमेंट का तरीका: क्या आप केवल डिलीवरी आधारित निवेश कर रहे हैं? इंट्राडे और एफएंडओ को पूरी तरह से ना कहें।
- शुद्धिकरण का नियम: क्या आपने मिलने वाले डिविडेंड में से गैर-हलाल हिस्से को दान करने की तैयारी कर ली है?
अगर कोई स्टॉक इन सभी पैमानों पर खरा उतरता है तो आप उसमें बिना किसी झिझक के निवेश कर सकते हैं। यह प्रक्रिया शुरू में थोड़ी कठिन लग सकती है, लेकिन जब आप दो-तीन कंपनियों के लिए खुद से यह गणना कर लेंगे तो यह आपके लिए बहुत आसान हो जाएगा। आपको किसी भी महंगे ऐप की जरूरत नहीं पड़ेगी और आप खुद एक समझदार और जिम्मेदार निवेशक बन जाएंगे।
शेयर बाजार में हलाल निवेश करना न केवल धार्मिक रूप से सही है बल्कि वित्तीय रूप से भी बहुत फायदेमंद है। जो कंपनियां कम कर्ज लेती हैं और जिनका बिजनेस वास्तविक संपत्तियों पर आधारित होता है, वे मंदी के समय भी बहुत मजबूत बनी रहती हैं। इसलिए शरिया के नियम आपको अनजाने में बहुत बड़े वित्तीय जोखिमों से भी बचाते हैं। अपने निवेश की यात्रा को आज ही शुरू करें, खुद से रिसर्च करें और अपने पैसों को सही और हलाल तरीके से बढ़ते हुए देखें।
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