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How to Find Halal Stocks in India Using Free Tools

क्या आप भारतीय शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं लेकिन यह सोचकर रुक जाते हैं कि यह हलाल है या नहीं? बहुत से लोग सोचते हैं कि हलाल शेयर ढूंढने के लिए महंगे सॉफ्टवेयर या पेड ऐप की जरूरत होती है। लेकिन सच यह है कि आप खुद भी यह काम बहुत आसानी से और मुफ्त में कर सकते हैं। आज हम आपको यही आसान तरीका सिखाएंगे जिससे आप खुद घर बैठे किसी भी शेयर की जांच कर सकते हैं।

How to Find Halal Stocks in India Using Free Tools

भारत में शरिया के नियमों के अनुसार निवेश करना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। आपको किसी को पैसे देने की जरूरत नहीं है। इस लेख में हम बहुत सरल भाषा में समझेंगे कि आप कैसे खुद से कंपनियों के बिजनेस और उनके पैसों का हिसाब देखकर हलाल शेयर चुन सकते हैं। इसके लिए आपको बस इंटरनेट और थोड़े से समय की जरूरत होगी।

शरिया के अनुसार हलाल शेयर चुनने के दो मुख्य टेस्ट

किसी भी शेयर को हलाल मानने के लिए हमें दो बड़े टेस्ट करने होते हैं। पहला टेस्ट होता है बिजनेस का काम देखना, जिसे हम बिजनेस स्क्रीनिंग कहते हैं। दूसरा टेस्ट होता है कंपनी के पैसों का हिसाब देखना, जिसे हम फाइनेंशियल स्क्रीनिंग कहते हैं। इन दोनों टेस्ट को पास करना हर कंपनी के लिए जरूरी होता है।

पहला टेस्ट यानी बिजनेस स्क्रीनिंग यह देखता है कि कंपनी असल में क्या काम करती है। अगर कंपनी का काम सही है, तभी हम दूसरे टेस्ट पर जाते हैं। अगर कंपनी का काम ही गलत है, तो हम वहीं रुक जाते हैं और उस शेयर को छोड़ देते हैं। भले ही वह कंपनी कितना भी मुनाफा क्यों न कमा रही हो।

दूसरा टेस्ट यानी फाइनेंशियल स्क्रीनिंग यह देखता है कि कंपनी के पास कितना कर्ज है और वह ब्याज से कितना पैसा कमा रही है। आज के समय में कोई भी कंपनी पूरी तरह से ब्याज से बची नहीं हो सकती, इसलिए इसके लिए कुछ सीमाएं तय की गई हैं। इन दोनों टेस्ट को पास करने के बाद ही कोई शेयर निवेश के लिए सही माना जाता है।

पहला टेस्ट: बिजनेस स्क्रीनिंग कैसे करें?

बिजनेस स्क्रीनिंग का मतलब है कि कंपनी किस चीज का व्यापार कर रही है। शरिया के नियमों के अनुसार कुछ बिजनेस पूरी तरह से हराम हैं। आपको ऐसी कंपनियों में एक भी रुपया नहीं लगाना है जो इन सेक्टर्स में काम करती हैं। अगर आप ऐसी कंपनियों में पैसा लगाते हैं, तो आपकी कमाई भी हराम हो जाएगी।

यहाँ उन मुख्य सेक्टर्स की सूची दी गई है जिनसे आपको पूरी तरह दूर रहना है:

  • ब्याज पर चलने वाले बैंक और फाइनेंस कंपनियां
  • शराब, बीयर या कोई भी नशीली चीजें बनाने वाली कंपनियां
  • पोर्क यानी सूअर का मांस या उससे बनी चीजें बेचने वाली कंपनियां
  • जुआ, सट्टा, लॉटरी या कैसीनो चलाने वाली कंपनियां
  • हथियार और गोला-बारूद बनाने वाली कंपनियां
  • सिनेमा हॉल, अश्लील फिल्में या संगीत बनाने वाली कंपनियां
  • तंबाकू, सिगरेट और गुटखा बनाने वाली कंपनियां

अगर कोई कंपनी इनमें से कोई भी काम करती है, तो वह शेयर सीधे बाहर हो जाता है। उदाहरण के लिए, आईटीसी कंपनी बहुत अच्छी है लेकिन वह सिगरेट बनाती है, इसलिए वह हलाल नहीं है। इसी तरह एचडीएफसी बैंक या एसबीआई बैंक बहुत बड़े हैं लेकिन उनका पूरा काम ब्याज पर चलता है, इसलिए वे भी निवेश के लिए सही नहीं हैं।

आप आसानी से Islamic investment rules के जरिए इन सेक्टर्स की पहचान कर सकते हैं। इसके लिए आप किसी भी कंपनी की वेबसाइट पर जाकर उसका प्रोफाइल पढ़ सकते हैं। कंपनी क्या काम करती है, यह जानना बेहद आसान है और इसमें ज्यादा समय भी नहीं लगता है।

दूसरा टेस्ट: फाइनेंशियल स्क्रीनिंग के गणित को समझें

जब कंपनी का बिजनेस सही साबित हो जाए, तो आपको उसके पैसों का हिसाब देखना होगा। आधुनिक दुनिया में कोई भी कंपनी पूरी तरह से ब्याज से मुक्त नहीं रह पाती। इसलिए शरिया बोर्ड के विद्वानों ने कुछ वित्तीय सीमाएं तय की हैं जिन्हें समझना आपके लिए बहुत जरूरी है।

पहला नियम है कुल कर्ज का नियम। कंपनी पर जो भी ब्याज वाला कर्ज है, वह कंपनी के कुल एसेट्स यानी संपत्ति के 33% से कम होना चाहिए। इसे हम डेट टू एसेट रेश्यो कहते हैं। अगर किसी कंपनी पर बहुत ज्यादा कर्ज है, तो उसमें निवेश करना सही नहीं माना जाता क्योंकि वह ब्याज के जाल में फंसी होती है।

दूसरा नियम है ब्याज से होने वाली कमाई का नियम। कंपनी अपनी कुल कमाई का 5% से ज्यादा हिस्सा ब्याज से नहीं कमा सकती। कई बार कंपनियों के पास फालतू पैसा बैंक में जमा होता है जिससे उन्हें ब्याज मिलता है। यह ब्याज कुल कमाई का 5% से कम होना चाहिए, तभी वह कंपनी हलाल की श्रेणी में रहेगी।

तीसरा नियम है कैश और रिसीवेबल्स का नियम। कंपनी के पास मौजूद कैश और लोगों से मिलने वाला पैसा यानी रिसीवेबल्स उसके कुल एसेट्स के 33% से कम होना चाहिए। अगर कोई कंपनी बिना किसी असली बिजनेस के सिर्फ कैश लेकर बैठी है, तो उसमें निवेश करने की अनुमति नहीं होती क्योंकि वह सिर्फ पैसों का हेर-फेर कर रही होती है।

इन तीनों नियमों को आप खुद से बहुत आसानी से कैलकुलेट कर सकते हैं। इसके लिए आपको किसी बड़े गणितज्ञ होने की जरूरत नहीं है। हम आपको आगे बताएंगे कि यह सब आप मुफ्त में कैसे कर सकते हैं और इसके लिए कौन सी वेबसाइट सबसे अच्छी है।

Screener. in का उपयोग करके मुफ्त में जांच कैसे करें?

स्क्रीनर डॉट इन भारत की एक बहुत ही लोकप्रिय और मुफ्त वेबसाइट है। इसका उपयोग करके आप किसी भी कंपनी के वित्तीय आंकड़े देख सकते हैं। आइए जानते हैं कि इस पर जांच कैसे करनी है ताकि आप खुद से फैसला ले सकें।

सबसे पहले आप स्क्रीनर डॉट इन पर जाएं और एक मुफ्त अकाउंट बना लें। इसके बाद आप जिस भी शेयर की जांच करना चाहते हैं, उसका नाम सर्च बार में लिखें। उदाहरण के लिए, हम टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस का नाम लिखते हैं जो कि एक बड़ी आईटी कंपनी है।

अब आपके सामने टीसीएस कंपनी का पूरा पेज खुल जाएगा। आपको नीचे की तरफ जाना है जहां बैलेंस शीट और प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट लिखा होता है। यहाँ आपको तीन मुख्य आंकड़े देखने हैं जो हमें हमारी गणना के लिए चाहिए होते हैं।

सबसे पहले बैलेंस शीट में जाकर "Total Assets" यानी कुल संपत्ति का आंकड़ा देखें। मान लेते हैं कि यह आंकड़ा 100 करोड़ रुपये है। अब "Borrowings" यानी कर्ज का आंकड़ा देखें। मान लेते हैं कि यह सिर्फ 5 करोड़ रुपये है।

अब आप कर्ज को कुल संपत्ति से भाग दें और 100 से गुना करें। यानी (5 / 100) * 100 = 5% होता है। चूंकि यह आंकड़ा 33% से बहुत कम है, इसलिए इस कंपनी ने पहला वित्तीय टेस्ट बहुत आसानी से पास कर लिया है।

इसके बाद प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट में जाएं। वहां "Other Income" यानी अन्य आय वाले हिस्से को देखें। उसमें आपको देखना होगा कि ब्याज से कितनी कमाई हुई है। अगर ब्याज की कमाई कुल सेल्स यानी बिक्री के 5% से कम है, तो कंपनी ने दूसरा टेस्ट भी पास कर लिया।

इस तरह आप मात्र पांच मिनट में किसी भी शेयर का पूरा सच जान सकते हैं। यह तरीका पूरी तरह से मुफ्त है और आपको किसी ऐप पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती। अगर आप शेयर बाजार के बजाय म्यूचुअल फंड में रुचि रखते हैं, तो आप our guide on Shariah compliant mutual funds को भी देख सकते हैं।

उदाहरण: जब कोई कंपनी टेस्ट में फेल हो जाती है

आइए अब एक ऐसी कंपनी का उदाहरण देखते हैं जो हमारे टेस्ट में फेल हो जाती है। इससे आपको समझने में और आसानी होगी। हम एचडीएफसी बैंक का उदाहरण लेते हैं जो भारत का एक बहुत बड़ा बैंक है।

जब आप स्क्रीनर डॉट इन पर एचडीएफसी बैंक सर्च करेंगे, तो आप देखेंगे कि इसका मुख्य बिजनेस ही लोगों को कर्ज देना और उस पर ब्याज वसूलना है। चूंकि इसका पूरा ढांचा ही ब्याज पर टिका हुआ है, इसलिए यह बिजनेस स्क्रीनिंग के पहले ही नियम में बाहर हो जाता है। हमें इसके वित्तीय आंकड़ों को देखने की भी जरूरत नहीं है।

आइए एक और उदाहरण लेते हैं जो बिजनेस में तो पास है लेकिन वित्तीय आंकड़ों में फेल है। मान लेते हैं कि कोई कंपनी बिजली बनाने का काम करती है। बिजली बनाना एक हलाल काम है, इसलिए कंपनी ने पहला टेस्ट पास कर लिया।

लेकिन जब हम उसकी बैलेंस शीट देखते हैं, तो हमें पता चलता है कि कंपनी ने अपने प्लांट लगाने के लिए बहुत भारी कर्ज लिया हुआ है। मान लेते हैं कि कंपनी के कुल एसेट्स 10,000 करोड़ रुपये हैं, लेकिन उस पर कुल कर्ज 5,000 करोड़ रुपये है।

जब हम इसका अनुपात निकालते हैं, तो यह 50% आता है। चूंकि यह हमारी 33% की सीमा से बहुत ज्यादा है, इसलिए यह कंपनी फाइनेंशियल स्क्रीनिंग में फेल हो जाती है। हम इस कंपनी के शेयर नहीं खरीद सकते क्योंकि इसका बिजनेस कर्ज और ब्याज के भारी बोझ तले दबा हुआ है।

ब्याज के पैसे को साफ करना क्यों जरूरी है?

जब आप किसी ऐसी कंपनी में निवेश करते हैं जो थोड़ा बहुत ब्याज कमाती है, तो आपके पास भी उस ब्याज का कुछ हिस्सा आ जाता है। हालांकि शरिया के अनुसार 5% तक ब्याज की अनुमति है, लेकिन आप उस पैसे को खुद इस्तेमाल नहीं कर सकते। वह पैसा आपके लिए हलाल नहीं होता है।

इस प्रक्रिया को हम प्यूरीफिकेशन या शुद्धिकरण कहते हैं। इसका मतलब है कि आपको उस ब्याज वाले हिस्से को दान करना होगा ताकि आपका बाकी पैसा पूरी तरह साफ और हलाल रहे। यह काम आपको साल में कम से कम एक बार करना होता है।

इसे समझने के लिए एक आसान उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए आपके पास किसी कंपनी के शेयर हैं और आपको साल में 1000 रुपये का डिविडेंड यानी लाभांश मिलता है। अब आपको देखना होगा कि उस कंपनी की कुल कमाई में ब्याज का हिस्सा कितने प्रतिशत था।

अगर कंपनी की कुल आय में ब्याज का हिस्सा 2% था, तो आपके डिविडेंड का 2% हिस्सा भी ब्याज का माना जाएगा। यानी 1000 रुपये का 2% होता है 20 रुपये। आपको यह 20 रुपये किसी गरीब को दान करने होंगे।

ध्यान रहे कि इस दान पर आपको कोई पुण्य नहीं मिलेगा क्योंकि यह पैसा आपका नहीं था। आप इसे सिर्फ अपने निवेश को पाक करने के लिए दे रहे हैं। इसे आप किसी सामाजिक कार्य या किसी जरूरतमंद की मदद में लगा सकते हैं ताकि वह पैसा आपके सिस्टम से बाहर हो जाए।

How to Find Halal Stocks in India Using Free Tools

Nifty Shariah Index क्या है और यह कैसे मदद करता है?

भारत के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने मुस्लिम निवेशकों की सुविधा के लिए कुछ खास इंडेक्स बनाए हैं। इन्हें हम निफ्टी शरिया इंडेक्स कहते हैं। इनमें सबसे प्रमुख हैं निफ्टी 50 शरिया और निफ्टी 500 शरिया। ये इंडेक्स उन लोगों के लिए बहुत काम के हैं जो खुद ज्यादा रिसर्च नहीं करना चाहते।

ये इंडेक्स उन कंपनियों से मिलकर बनते हैं जो शरिया के नियमों पर पूरी तरह खरी उतरती हैं। एनएसई की एक टीम हर छह महीने में इन कंपनियों की जांच करती है। जो कंपनियां शरिया के नियमों का उल्लंघन करती हैं, उन्हें इंडेक्स से बाहर कर दिया जाता है और नई कंपनियों को शामिल किया जाता है।

यह आपके लिए एक बहुत ही आसान और मुफ्त तरीका हो सकता है। आपको बस एनएसई की वेबसाइट पर जाना है और निफ्टी शरिया इंडेक्स की सूची डाउनलोड करनी है। इस सूची में आपको पहले से ही जांचे-परखे हलाल शेयर मिल जाएंगे। इससे आपका काफी समय बच सकता है।

हालांकि, आपको इस सूची पर भी पूरी तरह आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए। कई बार इंडेक्स अपडेट होने में थोड़ा समय लग जाता है, इसलिए खुद से एक बार बुनियादी जांच कर लेना हमेशा बेहतर होता है। लेकिन शुरुआती निवेशकों के लिए यह सूची एक बेहतरीन शुरुआती बिंदु हो सकती है।

खुद से स्क्रीनिंग करने के फायदे

बहुत से लोग सोचते हैं कि जब बाजार में बहुत सारे पेड ऐप्स उपलब्ध हैं, तो खुद से यह सब करने की क्या जरूरत है। लेकिन खुद से स्क्रीनिंग करने के अपने ही फायदे हैं जो आपको एक बेहतर निवेशक बनाते हैं।

सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपके पैसे बचते हैं। हलाल स्क्रीनिंग करने वाले ऐप्स हर महीने या हर साल काफी बड़ी फीस लेते हैं। अगर आप छोटे निवेशक हैं, तो आपकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा तो फीस में ही चला जाएगा। खुद से सीखकर आप आत्मनिर्भर बनते हैं।

दूसरा फायदा यह है कि आपको कंपनियों के बिजनेस की गहरी समझ होती है। जब आप खुद बैलेंस शीट देखते हैं, तो आपको पता चलता है कि कंपनी सच में मजबूत है या नहीं। इससे आप गलत कंपनियों में फंसने से बच जाते हैं और आपका पैसा सुरक्षित रहता है।

इसमें आपको थोड़ा समय देना पड़ता है, लेकिन अपने पैसों की सुरक्षा के लिए थोड़ा समय निकालना कोई बड़ी बात नहीं है। जब आप खुद से करना शुरू करेंगे, तो धीरे-धीरे यह आपके लिए बहुत आसान हो जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या इंट्राडे ट्रेडिंग हलाल है?

इंट्राडे ट्रेडिंग का मतलब होता है एक ही दिन में शेयर खरीदना और बेचना। बहुत से शरिया विद्वानों के अनुसार, इंट्राडे ट्रेडिंग हलाल नहीं मानी जाती। इसका मुख्य कारण यह है कि इसमें आपको शेयर की असली डिलीवरी नहीं मिलती। आप बिना मालिकाना हक पाए ही शेयर को बेच देते हैं। इस्लाम में किसी ऐसी चीज को बेचना मना है जो आपके पास असल में मौजूद न हो। इसलिए हमेशा डिलीवरी बेस्ड ट्रेडिंग ही करें।

क्या फ्यूचर और ऑप्शंस में काम करना हलाल है?

फ्यूचर और ऑप्शंस को हम डेरिवेटिव्स कहते हैं। यह पूरी तरह से एक तरह का सट्टा या कॉन्ट्रैक्ट होता है जिसमें किसी भी वास्तविक संपत्ति का लेन-देन नहीं होता। शरिया के नियमों के अनुसार यह पूरी तरह से हराम माना गया है। इसमें बहुत ज्यादा जोखिम होता है और यह जुए के समान काम करता है। इसलिए शरिया के अनुसार निवेश करने वाले लोगों को इससे दूर रहना चाहिए।

क्या आईपीओ में पैसा लगाना हलाल है?

हाँ, आप आईपीओ में पैसा लगा सकते हैं, लेकिन आपको वही नियम अपनाने होंगे जो हम आम शेयरों के लिए अपनाते हैं। जब भी कोई नई कंपनी अपना आईपीओ लाती है, तो वह एक दस्तावेज जारी करती है जिसे प्रॉस्पेक्टस कहते हैं। आपको उस दस्तावेज को पढ़कर कंपनी के बिजनेस और उसके कर्ज की जांच करनी होगी। अगर कंपनी के आंकड़े शरिया के नियमों के अनुकूल हैं, तो आप बेझिझक आईपीओ में आवेदन कर सकते हैं।

शरिया नियमों के साथ वित्तीय मजबूती भी देखें

एक आम गलती जो बहुत से नए निवेशक करते हैं, वह यह है कि वे सिर्फ यह देखते हैं कि शेयर हलाल है या नहीं। वे कंपनी की वित्तीय सेहत को देखना भूल जाते हैं। आपको याद रखना चाहिए कि हलाल होना निवेश की पहली शर्त है, आखिरी नहीं। आपको मुनाफा भी तो कमाना है।

अगर कोई कंपनी हलाल है लेकिन उसका बिजनेस लगातार घाटे में चल रहा है, तो आपको उसमें पैसा नहीं लगाना चाहिए। आपको ऐसी कंपनियों को चुनना है जो हलाल भी हों और जिनका बिजनेस भी लगातार बढ़ रहा हो। तभी आपका पैसा बढ़ेगा।

निवेश करने से पहले हमेशा देखें कि कंपनी का मुनाफा हर साल बढ़ रहा हो। कंपनी के प्रमोटर्स या मालिक ईमानदार होने चाहिए। शेयर की कीमत बहुत ज्यादा महंगी नहीं होनी चाहिए। इन सब बातों को देखने के बाद ही अपना पैसा लगाएं ताकि आपको नुकसान न उठाना पड़े।

हलाल निवेश करना कोई मुश्किल काम नहीं है। यह आपके विश्वास और आपके भविष्य दोनों को सुरक्षित रखने का एक बेहतरीन तरीका है। आज ही स्क्रीनर डॉट इन पर जाएं और अपनी पसंदीदा कंपनी का नाम लिखकर उसकी जांच करें। शुरुआत करने के लिए आज से बेहतर कोई दिन नहीं हो सकता।

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