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Namaz Me Dil Lagane Ke Tarike: Focus Kaise Badhaye

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप नमाज़ के लिए खड़े हुए और अचानक आपको याद आया कि आपने दुकान पर पैसे छोड़ दिए हैं? या फिर आपको याद आया कि गैस पर दूध रखा है? यह एक ऐसी समस्या है जिससे हर दूसरा इंसान परेशान है। हम सब चाहते हैं कि हमारी नमाज़ बिल्कुल सही हो। हम चाहते हैं कि जब हम अल्लाह के सामने खड़े हों, तो हमारा पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ उसी की तरफ हो। लेकिन असल जिंदगी में ऐसा करना बहुत मुश्किल लगता है।

Namaz Me Dil Lagane Ke Tarike: Focus Kaise Badhaye

नमाज़ में ध्यान लगाने को इस्लाम में ख़ुशू कहा जाता है। यह कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है। बस इसके लिए थोड़े प्रयास और सही तरीके की ज़रूरत होती है। आज हम इस लेख में इसी विषय पर विस्तार से बात करेंगे। हम आपको कुछ ऐसे व्यावहारिक तरीके बताएंगे जिन्हें अपनाकर आप अपनी नमाज़ में ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। यह कोई जादू नहीं है जो एक दिन में हो जाएगा। इसके लिए आपको सब्र और लगातार कोशिश की ज़रूरत होगी।

नमाज़ में ध्यान लगाने का क्या महत्व है?

नमाज़ सिर्फ उठने और बैठने का नाम नहीं है। यह हमारे और हमारे खालिक यानी अल्लाह के बीच का एक सीधा संवाद है। जब हम नमाज़ पढ़ते हैं, तो हम सीधे अल्लाह से बात कर रहे होते हैं। अब आप खुद सोचिए। अगर आप किसी बड़े अधिकारी या अपने बॉस से बात कर रहे हों, तो क्या आप अपना फोन देखेंगे? क्या आप इधर-उधर की बातें सोचेंगे? बिल्कुल नहीं। आप उनकी हर बात को बहुत ध्यान से सुनेंगे और सोच-समझकर बोलेंगे.

फिर जब हम पूरी कायनात के मालिक के सामने खड़े होते हैं, तो हमारा ध्यान क्यों भटक जाता है? नमाज़ में ध्यान का होना उतना ही ज़रूरी है जितना शरीर में रूह का होना। बिना ध्यान के पढ़ी गई नमाज़ उस सूखी लकड़ी की तरह है जिसमें कोई जान नहीं होती। इसलिए हमें अपनी नमाज़ों में जान फूंकनी होगी। इसके लिए हमें अपने मन को वश में करना होगा। इस विषय पर और अधिक जानकारी के लिए आप हमारी वेबसाइट इस्लामिक जानकारी पर जा सकते हैं। वहां आपको कई ऐसे लेख मिलेंगे जो आपकी आध्यात्मिक यात्रा को आसान बनाएंगे।

१. वूज़ू के समय से ही मन को तैयार करें

अधिकतर लोग सोचते हैं कि नमाज़ में ध्यान लगाने का काम तब शुरू होता है जब हम अल्लाहू अकबर कहते हैं। लेकिन यह सच नहीं है। नमाज़ की तैयारी तो वूज़ू से ही शुरू हो जाती है। जब आप अपने हाथ-पैर धो रहे होते हैं, तो सिर्फ पानी से धूल साफ नहीं हो रही होती। आपके गुनाह भी धुल रहे होते हैं। वूज़ू करते समय शांत रहें। फालतू की बातें न करें।

हर अंग को धोते समय यह महसूस करें कि आप एक बहुत बड़े दरबार में जाने की तैयारी कर रहे हैं। जब आप चेहरा धोएं, तो सोचें कि अब आप अल्लाह के सामने अपना चेहरा पेश करने वाले हैं। जब आप हाथ धोएं, तो सोचें कि इन हाथों से अब कोई गलत काम नहीं होगा। यह सोच आपके दिमाग को दुनियावी शोर से दूर ले जाएगी। जैसे ही आपका वूज़ू पूरा होगा, आपका मन पहले से ही शांत हो चुका होगा।

वूज़ू के बाद तुरंत भागकर नमाज़ के लिए न खड़े हों। कुछ सेकंड के लिए शांत बैठें। एक या दो गहरी सांसें लें। अपने दिल को कहें कि अब अगले दस मिनट के लिए दुनिया का कोई भी काम मेरे लिए ज़रूरी नहीं है। यह छोटा सा अभ्यास आपके दिमाग को पूरी तरह से बदल देगा।

२. जो सूरह आप पढ़ रहे हैं उनका अर्थ समझें

हम में से बहुत से लोग बचपन में याद की गई सूरह को ही बार-बार पढ़ते हैं। हमें उनका अरबी उच्चारण तो याद होता है, लेकिन हमें उनका अर्थ नहीं पता होता। जब हम कोई ऐसी भाषा बोलते हैं जिसे हम खुद नहीं समझते, तो हमारा दिमाग बहुत जल्दी थक जाता है। फिर वह मनोरंजन के लिए इधर-उधर की बातें सोचने लगता है।

इस समस्या का सबसे आसान समाधान यह है कि आप जिन सूरह को नमाज़ में पढ़ते हैं, उनका हिंदी या अपनी भाषा में अनुवाद सीखें। उदाहरण के लिए, जब आप सूरह अल-फातिहा पढ़ते हैं और कहते हैं 'अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन', तो आपके दिमाग में तुरंत यह विचार आना चाहिए कि 'सब तारीफें अल्लाह के लिए हैं जो सब जहानों का पालने वाला है'। जब आप इस अर्थ को महसूस करेंगे, तो आपका दिल भर आएगा।

आपको एक ही दिन में पूरी अरबी सीखने की ज़रूरत नहीं है। आप हर हफ्ते सिर्फ एक छोटी सूरह का अर्थ याद कर सकते हैं। इसके लिए आप our guide on daily prayers को पढ़ सकते हैं। इससे आपको बुनियादी अरबी शब्दों को समझने में बहुत मदद मिलेगी। जब आप अर्थ समझकर पढ़ेंगे, तो नमाज़ आपके लिए एक बहुत ही खूबसूरत अनुभव बन जाएगी।

Namaz Me Dil Lagane Ke Tarike: Focus Kaise Badhaye

३. शारीरिक हरकतों में ठहराव लाएं

क्या आप भी बहुत जल्दी-जल्दी नमाज़ पढ़ते हैं? क्या आपके रुकु और सजदे बहुत छोटे होते हैं? जल्दबाज़ी करना शैतान का काम है। जब हम नमाज़ में जल्दबाज़ी करते हैं, तो हमारा शरीर तो हरकत कर रहा होता है लेकिन दिमाग को शांत होने का मौका ही नहीं मिलता।

नमाज़ की हर हरकत में ठहराव लाएं। जब आप खड़े हों, तो सीधे खड़े रहें। अपनी नज़र को सजदे की जगह पर टिका कर रखें। इधर-उधर न देखें। जब आप रुकु में जाएं, तो अपनी पीठ को बिल्कुल सीधा करें। वहां कम से कम तीन बार शांति से 'सुब्हान रब्बियल अज़ीम' कहें। उस महानता को महसूस करें।

इसी तरह सजदे में भी जल्दबाज़ी न करें। सजदा वह समय होता है जब इंसान अल्लाह के सबसे करीब होता है। अपनी हर परेशानी, अपनी हर चिंता को उस सजदे में अल्लाह के सामने रख दें। सजदे में थोड़ी देर रुकें। अपने दिल की बात कहें। जब आप नमाज़ को आराम से पढ़ेंगे, तो आपके शरीर की नसें शांत होंगी। इससे आपका मानसिक तनाव कम होगा और ध्यान अपने आप लगने लगेगा।

४. नमाज़ के लिए सही जगह और समय का चुनाव करें

हमारे आस-पास का माहौल हमारे दिमाग पर बहुत गहरा असर डालता है। अगर आप ऐसे कमरे में नमाज़ पढ़ रहे हैं जहां टीवी चल रहा है या लोग बातें कर रहे हैं, तो ध्यान लगाना बहुत मुश्किल होगा। कोशिश करें कि नमाज़ के लिए घर का कोई शांत कोना चुनें।

उस कोने को साफ-सुथरा रखें। वहां कोई ऐसी चीज़ न हो जो आपका ध्यान भटकाए। आपकी जाएनमाज़ बहुत सादी होनी चाहिए। आजकल बाज़ार में बहुत चमकदार और डिज़ाईनर जाएनमाज़ मिलती हैं। इन पर बने डिज़ाईन कई बार हमारा ध्यान भटकाते हैं। इसलिए हमेशा एक सादे रंग की जाएनमाज़ का इस्तेमाल करें।

इसके अलावा, अपने कपड़ों का भी ध्यान रखें। नमाज़ के समय ऐसे कपड़े पहनें जो ढीले और आरामदायक हों। अगर आपके कपड़े बहुत तंग होंगे, तो आपका ध्यान बार-बार कपड़ों को ठीक करने में ही लगा रहेगा। शांत माहौल और आरामदायक कपड़े नमाज़ में मन लगाने में बहुत मददगार साबित होते हैं।

५. शैतान के वसवसों से बचना सीखें

जब भी कोई बंदा अल्लाह की इबादत करने खड़ा होता है, तो शैतान को बहुत तकलीफ होती है। वह हर मुमकिन कोशिश करता है कि बंदे का ध्यान भटक जाए। हदीस में आता है कि एक खास शैतान होता है जिसका काम ही नमाज़ में वसवसे यानी बुरे विचार डालना है। उसका नाम 'खिंजब' है।

जैसे ही आप नमाज़ शुरू करते हैं, वह आपको पुरानी बातें याद दिलाने लगता है। वह आपको डराता है कि तुम्हारा यह काम छूट जाएगा। इससे बचने का तरीका यह है कि जैसे ही आपको महसूस हो कि आपका ध्यान भटक गया है, घबराएं नहीं। अपने ध्यान को वापस नमाज़ पर लाएं। अपने मन में कहें 'अऊजु बिल्लाही मिनश शैतानिर रजीम' और अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें।

यह सोचना गलत है कि अगर ध्यान भटक गया तो नमाज़ नहीं होगी। अल्लाह हमारी नीयत को देखता है। वह जानता है कि आप कोशिश कर रहे हैं। आपकी हर कोशिश पर आपको दोगुना सवाब मिलता है। इसलिए शैतान के बहकावे में आकर नमाज़ को अधूरा न छोड़ें और न ही निराश हों।

६. नमाज़ को अपनी प्राथमिकता बनाएं

नमाज़ को अपने दिन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएं। अपने कामों को नमाज़ के वक्त के हिसाब से तय करें। जब अज़ान हो, तो सब कुछ छोड़ दें। यह सोचें कि यह बुलावा सीधे अल्लाह की तरफ से है। जब आप नमाज़ को प्राथमिकता देंगे, तो आपका दिमाग भी इसके लिए तैयार रहेगा।

नियमितता ही सफलता की कुंजी है। अगर आप पांचों वक्त की नमाज़ पाबंदी से पढ़ेंगे, तो धीरे-धीरे यह आपकी आदत बन जाएगी। आदत बनने के बाद मन को एकाग्र करना बहुत आसान हो जाता है। शुरुआत में थोड़ी मुश्किल होगी, लेकिन समय के साथ सब ठीक हो जाएगा।

अपने दिन की शुरुआत फज्र की नमाज़ से करें। सुबह का समय बहुत शांत होता है। इस समय ध्यान लगाना सबसे आसान होता है।

नमाज़ केवल एक धार्मिक कर्तव्य नहीं है। यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी एक बेहतरीन थेरेपी है। दिन में पांच बार दुनिया की भागदौड़ से अलग होकर शांत बैठना हमारे दिमाग को रीसेट करता है।

इसलिए नमाज़ को एक तोहफा समझें, कोई बोझ नहीं। आज ही से अपनी नमाज़ों में सुधार करने की कोशिश शुरू करें। अल्लाह आपकी हर कोशिश को आसान बनाए।

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