आशूरा के रोजे की फजीलत
आशूरा का एहतिराम जानवर भी करते हैं
प्यारे प्यारे इस्लामी भाइयो ! आशूरा ऐसा मुबारक दिन है कि इन्सान तो इन्सान चरिन्दो परिन्द (Birds and Animals) हत्ता कि वहशी जानवर भी इस का एहतराम करते हैं और इस दिन की ताज़ीम करते हुए रोज़ा भी रखते हैं।
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| आशूरा के रोजे की फजीलत |
बुजुर्गाने दीन "رحمة الله عليه" के चन्द आंखों देखे वाक़िआत, तरिबात और इर्शादात पढ़िये ।
- अज़ीम ताबेई बुजुर्ग हजुरते सव्यिदुना कैस बिन इबाद "رحمة الله عليه" फ़रमाते हैं : मुझे यह बात पहुंची है कि वहशी जानवर दस मुहुर्रम का रोज़ा रखते थे ।
- हज़रते सय्यदुना फत्ह बिन शख़रफ़ "رحمة الله عليه" फ़रमाते हैं: मैं रोजाना च्यूटियों के लिये रोटी तोड़ कर डालता था, जब दस मुहर्रम का दिन आता तो च्यूंटियां (Ants) उसे न खातीं ।
- हजुरते अबुल हसन अली बिन उमर कुवैनी "رحمة الله عليه" फ़रमाते हैं: दस मुहर्रम को च्यूंटियां भी रोजा रखती हैं।
- अब्बासी ख़लीफ़ा अल क़ादिर बिल्लाह "رحمة الله عليه" के साथ भी येही मुआमला पेश आया तो उसे बहुत हैरत हुई, उस ने हज़रते सव्यिदुना अबुल हसन कुजवैनी "رحمة الله عليه" से इस बारे में पूछा तो उन्हों ने फ़रमाया : 10 मुहर्रम के दिन चीटिया रोज़ा रखती हैं।
- हज़रते अल्लामा इब्ने नासिरुद्दीन दिमश्की "رحمة الله عليه" (वफात: 842 हि.) लिखते हैं: 10 मुहर्रमुल हराम को एक शख़्स गांव आया, लोग उस वक्त जानवर ज़ब्ह कर रहे थे, उस ने वजह पूछी तो गांव वालों ने बताया : "आज वहशी जानवर (Beasts) रोज़े से हैं, हमारे साथ चलो हम तुम्हें दिखाते हैं।" उन्हों ने उस आदमी को एक बाग़ में ले जा कर खड़ा कर दिया उस का बयान है : अस्र के बाद हर तरफ़ से वहशी जानवर आने लगे और बाग़ को घेर लिया, उन के सर आस्मान की तरफ़ उठे हुए थे, किसी एक ने भी ( उस गोश्त में से) कुछ नहीं खाया, जूं ही सूरज गुरूब हुवा वोह वहशी जानवर गोश्त पर टूट पड़े और जल्दी से सब कुछ खा गए।
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