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Muharram Mein Kya Karna Chahiye | मुहर्रम में क्या करना चाहिए – Sunnat Amal aur Kya Mana Hai

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Muharram Mein Kya Karna Chahiye | मुहर्रम में क्या करना चाहिए – Sunnat Amal aur Kya Mana Hai
🕌
🕌 IslamicCreation.com
وَمَن يُعَظِّمْ شَعَائِرَ اللَّهِ فَإِنَّهَا مِن تَقْوَى الْقُلُوبِ
— क़ुरआन, सूरह हज: 32
7
ज़रूरी अमल
5
मना काम
2
रोज़े के Options
40
दिन का Plan
Muharram 2026 Guide
Muharram Mein Kya Karna Chahiye?
मुहर्रम में क्या करना चाहिए — सुन्नत अमल और क्या मना है
क़ुरआन और हदीस से साबित 7 ज़रूरी अमल, 5 मना काम, आशूरा का रोज़ा और रोज़ाना का मुकम्मल प्लान।
✅ 7 Sunnat Amal 🚫 5 Mana Kaam 🌙 Ashura Roza 📖 Quran+Hadees
📅 Muharram 2026 — जून 17 से शुरू
IslamicCreation.com📅 जून 16, 2026

Muharram Mein Kya Karna Chahiye | मुहर्रम में क्या करना चाहिए – Sunnat Amal aur Kya Mana Hai (Quran & Hadees Se)

🕌 मुहर्रम 2026 शुरू हो गया है — और यही वो सवाल है जो हर मुसलमान पूछ रहा है: "मुहर्रम में क्या करना चाहिए और क्या नहीं?" इस पोस्ट में आपको मिलेगा — क़ुरआन और हदीस से साबित 7 ज़रूरी अमल, 5 मना काम, आशूरा के रोज़े का मुकम्मल तरीक़ा और पूरे मुहर्रम का रोज़ाना का प्लान — ताकि यह मुक़द्दस महीना सही तरीक़े से गुज़रे।

🌙 मुहर्रम की फ़ज़ीलत — Muharram Ki Fazilat (Quran & Hadees)

📖 क़ुरआन — सूरह तौबा: 36
إِنَّ عِدَّةَ الشُّهُورِ عِندَ اللَّهِ اثْنَا عَشَرَ شَهْرًا فِي كِتَابِ اللَّهِ ۚ مِنْهَا أَرْبَعَةٌ حُرُمٌ
"Inna 'iddata-sh-shuhoori 'indal-laahi-thna 'ashara shahran... minhaa arba'atun hurum"
तर्जुमा: "बेशक अल्लाह के नज़दीक महीनों की गिनती 12 है... इनमें से 4 मुक़द्दस (हराम) महीने हैं।"
📚 क़ुरआन — सूरह तौबा: 36

नबी ﷺ ने फ़रमाया: "रमज़ान के बाद सबसे अफ़ज़ल रोज़े — अल्लाह के महीने मुहर्रम के रोज़े हैं। और फ़र्ज़ के बाद सबसे अफ़ज़ल नमाज़ — रात की नमाज़ (तहज्जुद) है।"

📚 (मुस्लिम: 1163)

यह हदीस बताती है कि मुहर्रम रमज़ान के बाद सबसे अफ़ज़ल महीना है। इस महीने में नेकी का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। 📅 मुहर्रम 2026 की तारीख़ें जानने के लिए हमारी पोस्ट पढ़ें।

✅ मुहर्रम में 7 ज़रूरी अमल — Muharram Ke 7 Zaroori Amal

यह वो 7 अमल हैं जो क़ुरआन और हदीस से साबित हैं और मुहर्रम में करने चाहिए:

1
🌙 आशूरा का रोज़ा — 9+10 या 10+11 मुहर्रम

यह मुहर्रम का सबसे बड़ा अमल है। नबी ﷺ ने ख़ुद आशूरा का रोज़ा रखा और सहाबा को भी रखने का हुक्म दिया।

"आशूरा का रोज़ा — मुझे उम्मीद है कि अल्लाह इसकी बदले में पिछले एक साल के गुनाह माफ़ कर देगा।"

📚 (मुस्लिम: 1162)
⏰ 2026 में: 25+26 जून (9+10 मुहर्रम) या 26+27 जून (10+11 मुहर्रम)
2
🤲 इस्तिग़फ़ार की कसरत — Istighfar Ki Kasrat

मुहर्रम तौबा और इस्तिग़फ़ार का मौसम है। अल्लाह ने क़ुरआन में फ़रमाया — जो इस्तिग़फ़ार करे उसे रिज़्क़, बारिश और माल दिया जाएगा।

📖 सूरह नूह: 10-12
فَقُلْتُ اسْتَغْفِرُوا رَبَّكُمْ إِنَّهُ كَانَ غَفَّارًا ۝ يُرْسِلِ السَّمَاءَ عَلَيْكُم مِّدْرَارًا
"इस्तिग़फ़ार करो — वो तुम पर आसमान से बारिश भेजेगा और माल-औलाद से नवाज़ेगा।"
📿 रोज़ाना: "Astaghfirullah" — 100 बार सुबह + 100 बार शाम
3
💰 सदक़ा और ख़ैरात — Sadqa Aur Khairaat

मुहर्रम मुक़द्दस महीना है — इसमें सदक़े का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।

"सदक़ा बला (मुसीबत) को टालता है।"

📚 (तिर्मिज़ी: 664)

यतीमों, ग़रीबों, ज़रूरतमंद रिश्तेदारों की मदद करें। 💰 क़र्ज़ से निजात के लिए भी सदक़ा बहुत ज़रूरी है।

💡 ख़ास: आशूरा के दिन (26 जून) ज़्यादा सदक़ा दें — इस दिन सदक़े का सवाब बहुत ज़्यादा है।
4
📖 नफ़्ल नमाज़ और क़ुरआन तिलावत

मुहर्रम में नफ़्ल नमाज़ और क़ुरआन तिलावत का सवाब बढ़ जाता है। तहज्जुद, चाश्त और इशराक़ की नमाज़ पाबंदी से पढ़ें।

नबी ﷺ ने फ़रमाया: "फ़र्ज़ के बाद सबसे अफ़ज़ल नमाज़ — रात की नमाज़ (तहज्जुद) है।"

📚 (मुस्लिम: 1163)
📖 रोज़ाना: कम से कम 1 पारा तिलावत + 2 रकात तहज्जुद
5
🙏 तौबा और नेक इरादा — Nayi Shuruaat

जैसे 1 जनवरी को लोग नई शुरुआत करते हैं — 1 मुहर्रम इस्लामिक न्यू ईयर है। इस दिन सच्ची तौबा करें और अल्लाह से नेक ज़िंदगी का इरादा करें।

🤲 1 मुहर्रम को: 2 रकात तौबा की नमाज़ + सच्ची तौबा + नया इरादा
6
📚 इमाम हुसैन AS की शहादत से सबक़

10 मुहर्रम को इमाम हुसैन AS ने कर्बला में ज़ुल्म के आगे झुकने से इनकार किया — और अपनी जान दे दी। इस कहानी से यह सबक़ लें:

हक़ के लिए खड़े रहना — चाहे कुछ भी हो जाए
अल्लाह पर भरोसा — हालात चाहे कितने भी मुश्किल हों
ज़ुल्म का साथ न देना — यही इमाम हुसैन AS का पैग़ाम है

💡 आशूरा के दिन: इमाम हुसैन AS पर दरूद पढ़ें और उनकी शहादत को याद करें।
7
🌅 पाँचों नमाज़ की पाबंदी — Panchon Namaz

यह हर महीने फ़र्ज़ है — लेकिन मुहर्रम में ख़ास तौर पर पाँचों नमाज़ वक़्त पर पढ़ें। इस महीने नमाज़ में कोताही बड़ा नुक़सान है।

"पाँच नमाज़ें — जुमे से जुमे तक — उनके दरमियान के गुनाहों का कफ़्फ़ारा हैं, जब तक कबीरा गुनाह न हों।"

📚 (मुस्लिम: 233)
मुहर्रम में नमाज़ + इस्तिग़फ़ार + सदक़ा = तीनों मिलकर ज़िंदगी बदल देते हैं

🌙 आशूरा का रोज़ा — Ashura Ka Roza 2026 (Mukamal Guide)

🌙 आशूरा का रोज़ा — 2026 में कब रखें?
⭐ सबसे अफ़ज़ल
25 + 26 जून 2026
9 + 10 मुहर्रम
(गुरुवार + शुक्रवार)
✅ जाइज़ भी है
26 + 27 जून 2026
10 + 11 मुहर्रम
(शुक्रवार + शनिवार)

हज़रत इब्न अब्बास رضی اللہ عنہ फ़रमाते हैं: जब नबी ﷺ ने 10 मुहर्रम का रोज़ा रखा और रखने का हुक्म दिया — कहा गया: "यहूदी इस दिन की ताज़ीम करते हैं।" फ़रमाया: "अगले साल आया तो 9 तारीख़ को भी रखूँगा।" अगला साल आने से पहले ही आप ﷺ का इंतक़ाल हो गया।

📚 (मुस्लिम: 1134) — इसीलिए 9+10 या 10+11 — दो रोज़े रखना अफ़ज़ल है।

🚫 मुहर्रम में 5 मना काम — Muharram Mein Kya Mana Hai

यह सेक्शन सबसे ज़रूरी है — जो competition में किसी ने नहीं लिखा। इस्लाम में कुछ काम ऐसे हैं जो मुहर्रम में ग़लती से समझे जाते हैं लेकिन सुन्नत से साबित नहीं:

मातम, ज़ंजीर ज़नी और मार-पीट — Matam Aur Zanjeer Zani

ख़ुद को ज़ख्मी करना, ज़ंजीर मारना, छाती पीटना — यह सुन्नत से साबित नहीं और हदीस में मना है।

नबी ﷺ ने फ़रमाया: "वो हम में से नहीं जो (मुसीबत में) गाल पीटे, कपड़े फाड़े और जाहिलियत की पुकार पुकारे।"

📚 (बुख़ारी: 1294)
📌 इमाम हुसैन AS को याद करने का सुन्नत तरीक़ा: दुआ, सदक़ा और उनकी शहादत से सबक़ लेना।
नौहा और मर्सिया जो हदों से बाहर हो

इमाम हुसैन AS की याद में रोना जाइज़ है — लेकिन ऐसा नौहा या मर्सिया जिसमें ग़लत बातें, अल्लाह पर शिकवा या हदें पार हों — मना है।

📌 रोना जाइज़ है — अल्लाह पर शिकवा और हदों से बाहर जाना मना है।
मुहर्रम को "मनहूस" (Inauspicious) महीना समझना

कुछ लोग मुहर्रम में शादी, कारोबार और ख़ुशी के काम नहीं करते — यह ग़लतफ़हमी है। मुहर्रम मनहूस नहीं — मुक़द्दस महीना है।

📌 मुहर्रम में शादी, कारोबार सब जाइज़ हैं — बस आशूरा का एहतिराम करें।
आशूरा की ख़ुशी में ख़ास खाना या जश्न

आशूरा के दिन ख़ास खाना पकाना, ख़ुशी मनाना — यह भी सुन्नत से साबित नहीं है। यह दिन रोज़े और इबादत का दिन है।

📚 नबी ﷺ से आशूरा पर ख़ास खाने की कोई रिवायत नहीं।
बिना दलील के नए अमल ईजाद करना

कुछ लोग मुहर्रम में ऐसे वज़ीफ़े और अमल पढ़ते हैं जो क़ुरआन या हदीस से साबित नहीं। यह बिदअत है।

नबी ﷺ ने फ़रमाया: "हर नई बात बिदअत है, और हर बिदअत गुमराही है।"

📚 (मुस्लिम: 867)
📌 सिर्फ़ क़ुरआन और सुन्नत से साबित अमल करें।

⚖️ हलाल vs मना — Muharram Mein Kya Jaiz Kya Mana

✅ हलाल (जाइज़ अमल)
❌ मना (ना-जाइज़)
✅ आशूरा का रोज़ा (9+10 या 10+11)
❌ सिर्फ़ 10 का अकेला रोज़ा (मकरूह)
✅ इमाम हुसैन AS पर रोना
❌ मातम, ज़ंजीर ज़नी, मार-पीट
✅ इस्तिग़फ़ार, तौबा, सदक़ा
❌ ऐसे नौहे जिनमें ग़लत बातें हों
✅ मुहर्रम में शादी, कारोबार
❌ मुहर्रम को मनहूस समझना
✅ क़ुरआन तिलावत, नफ़्ल नमाज़
❌ बिना दलील के नए अमल
✅ आशूरा के दिन सदक़ा देना
❌ आशूरा पर ख़ास जश्न और खाना

📅 पूरे मुहर्रम का रोज़ाना का प्लान — Daily Plan

वक़्तअमलतादाद
🌅 फ़जर बादइस्तिग़फ़ार + रिज़्क़ की दुआ100 बार + 3 बार
🌅 फ़जर के बादक़ुरआन तिलावतकम से कम 1 पारा
☀️ ज़ुहर बाद2 रकात नफ़्ल + दरूद शरीफ़11 बार
🌆 अस्र बादइस्तिग़फ़ार + हिफ़ाज़त की दुआ100 बार
🌙 मग़रिब बादसदक़ा + ग़रीब की मददरोज़ाना
🌙 इशा बाद2 रकात तौबा की नमाज़रोज़ाना
🌙 तहज्जुद2-4 रकात + रोकर दुआरोज़ाना

⭐ आशूरा के दिन (26 जून 2026) ख़ास करें — Ashura Ka Din

26 जून 2026 (शुक्रवार) — आशूरा का ख़ास दिन:
1
🌙 आशूरा का रोज़ा — 9+10 मुहर्रम (25-26 जून)

आशूरा के रोज़े का सबसे बड़ा सवाब — एक साल के गुनाहों का कफ़्फ़ारा। रोज़ा रखें और इफ़्तार में 🤲 हाजत की दुआ पढ़ें।

2
💰 ज़्यादा से ज़्यादा सदक़ा दें

आशूरा के दिन सदक़ा देने का सवाब ख़ास तौर पर ज़्यादा है। यतीमों के सिर पर हाथ फेरना और उनकी मदद करना बहुत अफ़ज़ल है।

3
🤲 ज़्यादा इस्तिग़फ़ार और दुआ

आशूरा के दिन: इस्तिग़फ़ार 1000 बार + दरूद 100 बार + अपनी सभी हाजतों के लिए दुआ करें। 🤲 हाजत पूरी होने की दुआ ज़रूर पढ़ें।

❓ FAQ — Aksar Puchhe Jane Wale Sawal

Q
Muharram Mein Kya Karna Chahiye?
7 ज़रूरी अमल: (1) आशूरा का रोज़ा (9+10 मुहर्रम), (2) इस्तिग़फ़ार 100 बार सुबह-शाम, (3) सदक़ा और ख़ैरात, (4) नफ़्ल नमाज़ और क़ुरआन तिलावत, (5) तौबा और नेक इरादा, (6) इमाम हुसैन AS की शहादत से सबक़, (7) पाँचों नमाज़ की पाबंदी।
Q
Muharram Mein Kya Mana Hai?
5 मना काम: (1) मातम, ज़ंजीर ज़नी और मार-पीट (बुख़ारी: 1294 में मना), (2) हदों से बाहर नौहा-मर्सिया, (3) मुहर्रम को मनहूस समझना, (4) आशूरा पर ख़ास जश्न और खाना, (5) बिना दलील के नए अमल ईजाद करना।
Q
Ashura Ka Roza Kab Rakhein 2026 Mein?
सबसे अफ़ज़ल: 9+10 मुहर्रम — 25+26 जून 2026। जाइज़ भी: 10+11 मुहर्रम — 26+27 जून 2026। सिर्फ़ 10 का अकेला रोज़ा मकरूह है। यह रोज़ा पिछले एक साल के गुनाहों का कफ़्फ़ारा है। (मुस्लिम: 1162)
Q
Kya Muharram Mein Shadi Ho Sakti Hai?
हाँ — मुहर्रम में शादी, कारोबार और ख़ुशी के सभी काम जाइज़ हैं। मुहर्रम मनहूस नहीं — मुक़द्दस महीना है। इसे मनहूस समझना ग़लतफ़हमी है।
Q
Muharram Ki Fazilat Kya Hai Islam Mein?
नबी ﷺ ने फ़रमाया: "रमज़ान के बाद सबसे अफ़ज़ल रोज़े मुहर्रम के हैं।" (मुस्लिम: 1163) यह 4 मुक़द्दस महीनों में से एक है — इसमें नेकी का सवाब बढ़ जाता है।
Q
Muharram Mein Matam Karna Jaiz Hai Ya Nahi?
नहीं — मातम (ज़ंजीर ज़नी, मार-पीट) सुन्नत से साबित नहीं है। नबी ﷺ ने फ़रमाया: "वो हम में से नहीं जो गाल पीटे।" (बुख़ारी: 1294) इमाम हुसैन AS की याद — दुआ, सदक़ा और उनकी शहादत से सबक़ लेकर मनाएँ।
Q
Muharram Mein Kya Nahi Karna Chahiye?
मुहर्रम में न करें: (1) मातम और ज़ंजीर ज़नी, (2) बिना दलील के नए वज़ीफ़े, (3) मुहर्रम को मनहूस समझना, (4) आशूरा पर ख़ास जश्न, (5) सिर्फ़ 10 का अकेला रोज़ा। इसके बजाय — रोज़ा, इस्तिग़फ़ार, सदक़ा करें।
Q
Ashura Ke Din Kya Karna Chahiye?
आशूरा के दिन: (1) रोज़ा रखें (9+10 या 10+11), (2) ज़्यादा सदक़ा दें — ख़ास तौर पर यतीमों को, (3) इस्तिग़फ़ार 1000 बार, (4) दरूद 100 बार, (5) अपनी हाजतों के लिए हाजत की दुआ पढ़ें।

🕌 आख़िरी बात — मुहर्रम सुन्नत के साथ मनाएँ

إِنَّ أَكْرَمَكُمْ عِندَ اللَّهِ أَتْقَاكُمْ

"बेशक अल्लाह के नज़दीक सबसे ज़्यादा इज़्ज़त वाला वो है जो सबसे ज़्यादा परहेज़गार है।" (सूरह हुजुरात: 13)

मुहर्रम का यह मुक़द्दस महीना — रोज़े, इस्तिग़फ़ार, सदक़े और इबादत में गुज़ारें। इमाम हुसैन AS की याद — उनकी शहादत से सबक़ लेकर मनाएँ। अल्लाह हम सबको इस महीने से फ़ायदा उठाने की तौफ़ीक़ दे! 🤲

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